Delhi Onam Celebration: मयूर विहार का उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर बना आकर्षण का केंद्र
मयूर विहार के उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में पूकालम, पूजा और केरल की संस्कृति का संगम
Delhi Onam Celebration: केरल की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक उल्लास और सामाजिक समरसता का प्रतीक महापर्व ओणम देशभर में पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। थिरुवोणम के इस पावन अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निवासरत मलयाली समुदाय ही नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के लोग भी केरल की परंपराओं को करीब से अनुभव कर रहे हैं। यदि आप दिल्ली की व्यस्त दिनचर्या के बीच केरल के पारंपरिक मंदिरों का शांत वातावरण, भव्य पूकालम (फूलों की रंगोली) और पारंपरिक दक्षिण भारतीय वास्तुकला की दिव्यता महसूस करना चाहते हैं, तो पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 स्थित उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
केरल के त्रिशूर स्थित विश्वप्रसिद्ध गुरुवायुर मंदिर की तर्ज पर निर्मित यह देवालय ओणम के दौरान पूरी तरह से उत्सव के रंगों में रंगा नजर आता है। मंदिर प्रांगण में गूंजती चेंडा मेलम की ध्वनि, पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दिल्ली में रहते हुए ‘गॉड्स ओन कंट्री’ केरल की जीवंत अनुभूति कराती हैं।
Delhi Onam Celebration: ओणम का पौराणिक महत्व और राजा महाबली के स्वागत की परंपरा
मलयालम कैलेंडर के पहले महीने ‘चिंगम’ में मनाया जाने वाला ओणम मूल रूप से एक ऐतिहासिक फसल उत्सव है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में केरल पर न्यायप्रिय और प्रजावत्सल राजा महाबली (मावेली) का शासन था, जिनके राज्य में चारों तरफ सुख, शांति, समानता और समृद्धि थी। भगवान श्रीहरि विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा महाबली को पाताल लोक का अधिपति बनाया था, किंतु उनकी अनन्य भक्ति और प्रजा प्रेम को देखते हुए उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रिय प्रजा से मिलने धरती पर आने का वरदान दिया था।
राजा महाबली के इसी वार्षिक आगमन की खुशी में ओणम का दस दिवसीय उत्सव मनाया जाता है। थिरुवोणम के मुख्य दिन परिवार के लोग अपने घरों के आंगन में ताजे फूलों से भव्य ‘पूकालम’ सजाते हैं, मिट्टी से बनी महाबली और वामन की प्रतिमाओं को स्थापित करते हैं तथा पारंपरिक 26 से अधिक व्यंजनों से सजी ‘ओणसद्या’ तैयार कर सामूहिक रूप से पर्व मनाते हैं। दिल्ली में भी इस परंपरा को उसी निष्ठा के साथ जीवित रखा गया है।
उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर की वास्तुकला और ओणम पर विशेष आकर्षण
मयूर विहार फेज-1 के पॉकेट-3 में स्थित उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर की वास्तुकला पूरी तरह से पारंपरिक केरल शैली की काष्ठ और पाषाण शिल्प कला पर आधारित है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह भगवान श्रीकृष्ण को ‘गुरुवायुरप्पन’ (बाल गोपाल रूप) के रूप में समर्पित है। इसके साथ ही परिसर में चोट्टानिक्करा भगवती, भगवान शिव, विघ्नहर्ता गणपति, स्वामी अय्यप्पा और नाग देवताओं के अलग-अलग उप-मंदिर स्थापित हैं, जो केरल के तीर्थस्थलों का संपूर्ण स्वरूप प्रस्तुत करते हैं।
ओणम के पावन पर्व पर मंदिर के मुख्य प्रांगण में विशाल और बहुरंगी पूकालम का निर्माण किया जाता है, जो आने वाले हर श्रद्धालु के आकर्षण का केंद्र बनता है। मंदिर परिसर में शाम के समय दीप प्रज्वलन की अलौकिक परंपरा (दीपालंकारम) निभाई जाती है, जहां सैकड़ों पीतल के दीपकों की जगमगाहट वातावरण को आध्यात्मिक आभा से भर देती है। इसके साथ ही कई बार यहां कथकली, मोहिनीअट्टम और शास्त्रीय गायन के विशेष आयोजन भी आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर का ऐतिहासिक सफर और स्थापना की पृष्ठभूमि
उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर का निर्माण 1980 के दशक के उत्तरार्ध में आर्ष धर्म परिषद के तत्वावधान में दिल्ली के मलयाली और दक्षिण भारतीय समुदाय के सहयोग से प्रारंभ हुआ था। शुरुआत में जनकपुरी क्षेत्र में भूमि आवंटित हुई थी, किंतु पारंपरिक वास्तु और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर वर्तमान मयूर विहार स्थल का चयन किया गया। 17 मई 1989 को विधिवत महाकुंभाभिषेकम के साथ यहां भगवान गुरुवायुरप्पन की पाषाण प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी।
पवित्र यमुना नदी की दिशा की ओर मुख किए हुए इस मंदिर को उत्तर भारत में दक्षिण भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। ओणम के अतिरिक्त भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, विषु (मलयाली नववर्ष) और मंडला पूजा के दौरान भी यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु शीश नवाते हैं।
मंदिर तक पहुंचने का सरल मार्ग और दर्शन का समय
उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर तक पहुंचना दिल्ली-एनसीआर के किसी भी कोने से बेहद सुगम है। दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और पिंक लाइन के इंटरचेंज स्टेशन ‘मयूर विहार फेज-1’ से यह मंदिर पैदल दूरी पर स्थित है। मेट्रो स्टेशन के बाहर से आसानी से ई-रिक्शा और ऑटो भी उपलब्ध रहते हैं।
त्योहारों के विशेष अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए दर्शन के समय में आंशिक बदलाव किए जाते हैं। सामान्यतः मंदिर प्रातःकाल 5:30 बजे से 11:30 बजे तक तथा सायंकाल 5:00 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक खुला रहता है। ओणम के दिन विशेष पूजा और महाआरती का आयोजन होता है, इसलिए सुबह के समय जल्दी दर्शन करना अधिक सुविधाजनक माना जाता है।
Delhi Onam Celebration: संस्कृति और समरसता का संगम
महानगरीय परिवेश में ओणम जैसे पारंपरिक पर्व न केवल क्षेत्रीय समुदायों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़े रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराते हैं। मयूर विहार का उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह उत्तर और दक्षिण भारत के सांस्कृतिक सेतु के रूप में कार्य करता है।
पारंपरिक कसावु मुंडू और साड़ी में सजे श्रद्धालुओं का उत्साह, मंत्रोच्चार और फूलों की सुगंध दिल्ली के इस कोने को कुछ पलों के लिए केरल का साक्षात रूप बना देती है। यदि आप भी इस ओणम पर दक्षिण भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा, भव्य वास्तुकला और उत्सव की मिठास का अनुभव लेना चाहते हैं, तो मयूर विहार के इस पावन मंदिर का भ्रमण निश्चित रूप से एक अविस्मरणीय और सुखद अनुभव प्रदान करेगा।
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