Goa Anti-Conversion Bill 2026: गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक 2026 को मिली मंजूरी, जबरन धर्मांतरण पर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
जबरन धर्मांतरण पर 14 साल तक की सजा, सामूहिक मामलों में उम्रकैद का प्रावधान
Goa Anti-Conversion Bill 2026: गोवा में जबरन, प्रलोभन, छल-कपट अथवा विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले गैर-कानूनी धर्मांतरण पर पूर्ण अंकुश लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘गोवा प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन ऑफ रिलिजन बिल 2026’ (गोवा गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध विधेयक 2026) के मसौदे को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। इस प्रस्तावित कानून में धोखाधड़ी या दबाव बनाकर कराए गए धर्म परिवर्तन के मामलों में कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं, जिसमें दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा, लाखों रुपये का आर्थिक जुर्माना और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की स्पष्ट व्यवस्था शामिल है।
मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिलने के बाद अब इस महत्वपूर्ण विधेयक को 31 अगस्त से प्रारंभ हो रहे गोवा विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के पटल पर चर्चा और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। राज्य के मुख्य सचिव वी. कंडावेलू ने कैबिनेट बैठक के बाद लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य समाज के सीधे-सादे, आर्थिक रूप से कमजोर और संवेदनशील वर्गों को प्रलोभन, अनुचित प्रभाव, बलप्रयोग और झूठे वादों के जरिए किए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन के चंगुल से सुरक्षित रखना है।
Goa Anti-Conversion Bill 2026: 3 से 14 वर्ष तक की कठोर कैद और 5 लाख तक का मुआवजा
प्रस्तावित विधेयक के वैधानिक ढांचे के अनुसार, गैर-कानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन कराने या इसमें षड्यंत्रकारी भूमिका निभाने वाले किसी भी व्यक्ति—चाहे वह कोई आम नागरिक हो अथवा पुजारी, पादरी, कर्मकांडी, मौलवी या मुल्ला जैसा कोई धार्मिक व्यक्ति—को न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। इसके साथ ही दोषी पर न्यूनतम 50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाएगा।
यदि यह गैर-कानूनी धर्मांतरण किसी नाबालिग (18 वर्ष से कम आयु), महिला, दिव्यांग व्यक्ति, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति अथवा अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के सदस्य का कराया जाता है, तो कानून में इसे अत्यधिक गंभीर श्रेणी का अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी को न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक की कठोर कैद और कम से कम एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान रखा गया है। सामूहिक रूप से धर्मांतरण कराने के मामलों में अदालत परिस्थितियों की गंभीरता के आधार पर आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक का कड़ा फैसला सुना सकती है। इसके अतिरिक्त, सक्षम न्यायालय को यह वैधानिक अधिकार होगा कि वह दोषी पक्ष से पीड़ित व्यक्ति को 5 लाख रुपये तक का आर्थिक मुआवजा दिलवाने का आदेश पारित करे।
विवाह के नाम पर धोखाधड़ी और संस्थागत धर्मांतरण पर सख्त पाबंदी
विधेयक के मसौदे में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि कोई विवाह केवल और केवल धर्म परिवर्तन कराने के गुप्त उद्देश्य से रचाया गया है, अथवा किसी व्यक्ति का जबरन धर्म बदलवाकर विवाह किया गया है, तो पारिवारिक या सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसे विवाह को शून्य और अमान्य (Null and Void) घोषित कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, यदि कोई गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, सामाजिक संस्था अथवा धार्मिक निकाय ऐसे किसी अवैध धर्मांतरण नेटवर्क, फंडिंग या गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो राज्य सरकार उस संस्था का पंजीकरण रद्द करने के साथ-साथ उसे मिलने वाले सभी प्रकार के सरकारी अनुदान, वित्तीय सहायता, रियायती भूमि आवंटन और कर छूट को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर देगी।
स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पूर्व जिला मजिस्ट्रेट को घोषणा अनिवार्य
कानून के तहत अपनी स्वतंत्र इच्छा, आस्था और आत्मिक विश्वास से धर्म परिवर्तन करने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संरक्षित किया गया है। नए नियमों के अनुसार, यदि कोई वयस्क व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे धर्मांतरण की तिथि से कम से कम 60 दिन पूर्व संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) या अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) के समक्ष एक औपचारिक घोषणा पत्र जमा करना होगा।
इस घोषणा पत्र में आवेदक को यह स्पष्ट प्रमाणित करना होगा कि वह यह निर्णय बिना किसी भय, दबाव, प्रलोभन, वित्तीय लालच या बाहरी प्रभाव के अपनी स्वतंत्र चेतना से ले रहा है। इसके साथ ही, जो धार्मिक गुरु या पुरोहित धर्मांतरण की औपचारिक धार्मिक रस्म या संस्कार संपन्न कराएंगे, उन्हें भी उस अनुष्ठान से ठीक एक महीने पूर्व संबंधित जिला प्रशासन को लिखित सूचना प्रेषित करनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट इस सूचना के आधार पर पुलिस और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से गोपनीय जांच कराएंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया में कोई धोखाधड़ी या जबरदस्ती शामिल नहीं है। निर्धारित समय सीमा में पूर्व सूचना न देने पर संबंधित धार्मिक संस्कार कराने वाले व्यक्ति को भी कानूनी दंड का भागीदार बनाया जाएगा।
गोवा का जनसांख्यिकीय ताना-बाना और कानून की आवश्यकता का आधार
तटीय राज्य गोवा अपने अनूठे सांस्कृतिक सौहार्द, पर्यटन और बहुधार्मिक विविधता के लिए विश्वविख्यात है। राज्य की कुल जनसंख्या में लगभग 25 प्रतिशत ईसाई और 10 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी है। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने विगत वर्ष जुलाई माह में विधानसभा में वक्तव्य देते हुए स्पष्ट किया था कि गोवा की शांतिपूर्ण सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए एक पारदर्शी धर्मांतरण रोधी कानून की नितांत आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री का तर्क था कि संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के धर्म को मानने और उसका आचरण करने की स्वतंत्रता देता है, किंतु यह स्वतंत्रता किसी को धोखे, बीमारी ठीक करने के झूठे चमत्कारी दावों, वित्तीय प्रलोभन या शादी के झांसे से धर्म बदलवाने का अधिकार कतई नहीं देती। कैबिनेट की मंजूरी के बाद गोवा अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे उन प्रमुख राज्यों की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है, जहां जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानून पहले से अस्तित्व में हैं।
Goa Anti-Conversion Bill 2026: मानसून सत्र में होगी विधायी बहस और आगामी प्रशासनिक क्रियान्वयन
विधानसभा के तीन दिवसीय मानसून सत्र में पेश किए जाने के दौरान इस विधेयक पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी विधायी बहस होने की संभावना है। राज्य सरकार का दृढ़ रुख है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि यह केवल आपराधिक मंशा से किए जाने वाले दबाव और छल-कपट को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
विधेयक के विधानसभा से पारित होने और राज्यपाल की औपचारिक सहमति प्राप्त होने के पश्चात यह राज्य में विधिवत कानून का रूप ले लेगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य गृह विभाग द्वारा सभी जिलों में विशेष निगरानी प्रकोष्ठ और मजिस्ट्रियल जांच की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी, ताकि कानून का दुरुपयोग रोके जाने के साथ-साथ पीड़ितों को त्वरित न्याय और सुरक्षा मिल सके।
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