Obesity Risk: बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा मोटापे का खतरा, इन 5 अनहेल्दी चीजों से बनाएं दूरी, वरना बिगड़ सकती है बात

Obesity Risk: बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा मोटापे का खतरा, इन 5 अनहेल्दी चीजों से बनाएं दूरी, वरना बिगड़ सकती है बात

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Obesity Risk: क्या आप जानते हैं कि आपके घर में मौजूद पैकेट वाली चीजें बच्चों के भविष्य की सेहत बिगाड़ सकती हैं? आज के समय में बचपन का मोटापा यानी चाइल्डहुड ओबेसिटी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरी है, जिसे लेकर माता-पिता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पहले के समय में जो मोटापा सिर्फ वयस्कों की परेशानी माना जाता था, आज वह स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों में भी तेजी से दिखाई दे रहा है। जीवनशैली में बदलाव, खेलकूद की कमी और बाहरी जंक फूड का अधिक सेवन इस समस्या की मुख्य वजहें हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा स्वस्थ और फुर्तीला रहे, तो उसकी थाली से इन 5 चीजों को हटाना बेहद जरूरी है।

Obesity Risk, चिप्स और नमकीन: स्वाद जो सेहत के लिए है भारी

आजकल हर बच्चे को स्कूल टिफिन या घर में स्नैक्स के रूप में पैकेट वाले चिप्स और नमकीन खाना बेहद पसंद होता है। दिखने में ये चीजें भले ही छोटी और सामान्य लगें, लेकिन इनके अंदर नमक और हानिकारक फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इन्हें खाने से बच्चे का पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को जो पोषक तत्व मिलने चाहिए, वे बिल्कुल नहीं मिलते। इनमें इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स बच्चों के मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देते हैं, जिससे शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है। जब बच्चा हर रोज इन चीजों का सेवन करता है, तो मोटापा बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया हो जाती है।

कोल्ड ड्रिंक्स और शुगर वाली ड्रिंक्स का बढ़ता चलन

बच्चों को मीठी कोल्ड ड्रिंक्स या बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड ड्रिंक्स बहुत लुभाते हैं। इनमें चीनी की मात्रा इतनी अधिक होती है कि एक गिलास पीना ही बच्चे की पूरे दिन की शुगर की जरूरत से ज्यादा हो सकता है। जब शरीर में इतनी अधिक कैलोरी एक साथ जाती है, तो शरीर उसे ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट के रूप में जमा करने लगता है। इन ड्रिंक्स का लगातार सेवन न केवल मोटापे की वजह बनता है, बल्कि बच्चों में कम उम्र में ही डायबिटीज और दांतों की सड़न जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे इन ड्रिंक्स के बजाय घर का बना ताज़ा जूस, नारियल पानी या सादा पानी देने की आदत डालें।

जंक फूड: बर्गर, पिज्जा और फ्रेंच फ्राइज का मोह

बर्गर, पिज्जा और फ्रेंच फ्राइज आज के दौर के बच्चों का सबसे मनपसंद खाना बन चुका है। फास्ट फूड की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनमें रिफाइंड मैदा, अनहेल्दी ऑयल और ढेर सारा चीज इस्तेमाल होता है, जिसमें कैलोरी बहुत अधिक होती है। हफ्ते में कई बार इनका सेवन करने से शरीर का वजन तेजी से बढ़ने लगता है। ये जंक फूड्स बच्चों के पाचन तंत्र को भी कमजोर करते हैं। इन चीजों को छोड़ना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ये पेट तो भर देते हैं, लेकिन शरीर को पोषण के नाम पर कुछ नहीं देते। अगर बच्चा कभी-कभार बाहर का खाना खाए तो ठीक है, लेकिन इसे आदत बना लेना बहुत घातक हो सकता है।

चॉकलेट, कैंडी और मिठाइयों का मायाजाल

मिठाई या चॉकलेट देना अक्सर प्यार जताने का एक तरीका माना जाता है, लेकिन इसकी अति बच्चों के लिए नुकसानदायक है। कैंडी और चॉकलेट में मौजूद शुगर और आर्टिफिशियल कलर्स बच्चे के शरीर में ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ा देते हैं। जब बच्चा बार-बार मीठी चीजें खाता है, तो उसे और मीठा खाने की तलब होने लगती है, जिसे ‘शुगर क्रेविंग’ कहते हैं। यह चक्र बच्चों में अधिक कैलोरी का सेवन बढ़ाता है और अंततः मोटापे का कारण बनता है। घर में मिठाइयों का स्टॉक रखने के बजाय, बच्चों को फल और ड्राई फ्रूट्स देने की शुरुआत करें।

Obesity Risk, बिस्किट और केक: नाश्ते में छिपा है मोटापा

अक्सर माता-पिता यह मानकर बच्चों को पैकेट वाले बिस्किट और केक देते हैं कि ये हल्का नाश्ता है। लेकिन क्या आपने कभी इन पैकेट के पीछे लिखे इंग्रीडिएंट्स देखे हैं? इनमें मैदे के अलावा डालडा या रिफाइंड तेल और चीनी की भारी मात्रा होती है। बाजार में मिलने वाले केक और बिस्किट लंबे समय तक खराब न हों, इसके लिए इनमें ऐसे केमिकल मिलाए जाते हैं जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। बिस्किट और केक का रोज सेवन बच्चों की शारीरिक गतिविधि को कम करने और उन्हें आलसी बनाने में योगदान देता है, जिससे वजन बढ़ना लाजिमी है।

Obesity Risk: पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

बच्चों के बढ़ते वजन को रोकने के लिए सबसे बड़ा बदलाव रसोई से शुरू करना होगा। बच्चों को घर का बना पौष्टिक भोजन दें। दाल, रोटी, हरी सब्जियां और मौसमी फलों को उनकी डाइट का हिस्सा बनाएं। साथ ही, बच्चों को स्क्रीन से दूर निकालकर मैदान में खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। अगर बच्चा दिन में कम से कम एक घंटा शारीरिक रूप से सक्रिय रहता है, तो उसके वजन को नियंत्रित रखना बहुत आसान हो जाता है।

आप अपने बच्चे को जो खाने की आदत आज डालेंगे, वही आदत उसके आने वाले भविष्य की सेहत तय करेगी। अगर आपको लगता है कि बच्चा बहुत ज्यादा वजन बढ़ा रहा है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे डॉक्टर से परामर्श लें। हर बच्चे का शरीर अलग होता है, इसलिए उनकी डाइट को उनकी जरूरत और सेहत के हिसाब से ही तैयार करें। आज से ही छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपने बच्चे को एक स्वस्थ और खुशहाल भविष्य का उपहार दे सकते हैं। सतर्कता ही बच्चों के स्वास्थ्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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