Nepal Flood: नेपाल में जलप्रलय का तांडव, 105 भारतीय पर्यटकों समेत 300 से ज्यादा लापता, 15 हेलीकॉप्टर्स से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Nepal Flood: नेपाल के रसुवा में आई अचानक बाढ़ से 105 भारतीयों समेत 300 से अधिक लोग लापता हैं। राहत कार्यों के लिए 15 हेलीकॉप्टर उतारे गए हैं।

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Nepal Flood: पड़ोसी देश नेपाल से एक बेहद डरावनी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां प्रकृति का ऐसा भयंकर रूप देखने को मिला है कि हर तरफ चीख-पुकार मच गई है। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उफान पर आने से आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से अब तक आठ लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक सौ पांच भारतीय पर्यटकों समेत तीन सौ से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ के इस भयंकर तांडव के बाद से ही दोनों देशों के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अचानक आए इस सैलाब ने कैसे हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को पलभर में लील लिया होगा और अब अपनों की तलाश में भटक रहे परिजनों का क्या हाल होगा?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है, जिसमें सेना के हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में केवल विदेशी नागरिक ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और तीर्थयात्री भी फंसे हुए हैं। हर गुजरते घंटे के साथ लापता लोगों की तलाश का दायरा बढ़ाया जा रहा है, लेकिन लगातार खराब होते मौसम के कारण रेस्क्यू टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर इस भयानक जलप्रलय की पृष्ठभूमि क्या है और सीमावर्ती इलाकों में इसका कितना गहरा असर देखने को मिल रहा है।

Nepal Flood: भोटेकोशी नदी का रौद्र रूप और टिमुरे बाजार में तबाही

सब कुछ सामान्य चल रहा था कि अचानक बुधवार की सुबह भोटेकोशी नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नदी के इस विकराल रूप ने रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र और टिमुरे बाजार को अपनी आगोश में ले लिया, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ है। पानी के तेज बहाव में सड़क किनारे खड़े कई वाहन खिलौनों की तरह बह गए और बड़े-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान मलबे में तब्दील हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी इतना डरावना मंजर नहीं देखा था, जहां पानी कुछ ही मिनटों में सब कुछ बहाकर ले गया।
मामला कुछ इस तरह से सामने आया कि जब तक लोग अपनी जान बचाकर ऊंचे स्थानों की तरफ भागते, तब तक पानी बस्तियों के भीतर घुस चुका था। नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन को शुरुआती रिकॉर्ड से पता चला है कि प्रभावित इलाकों से कुल तीन सौ चौरासी यात्री लापता हैं। इनमें दो सौ इक्यानवे विदेशी और तिरानवे नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात जुटी हुई हैं। इस सूची में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के पर्यटक भी शामिल हैं, जो हिमालयी खूबसूरती देखने आए थे।

सेना के पंद्रह हेलीकॉप्टर्स के साथ युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन

आपदा की भूनमिका को भांपते हुए नेपाल सरकार ने तुरंत सेना और अन्य बचाव एजेंसियों को मैदान में उतार दिया है, ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, बुसी और तुसु जैसे बेहद दुर्गम इलाकों से अब तक पच्चीस लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस पूरे राहत अभियान को अंजाम देने के लिए कुल पंद्रह हेलीकॉप्टरों को आसमान में उतारा गया है, जिनमें सात नेपाल सेना के और आठ अन्य एजेंसियों के विमान शामिल हैं। घायलों और बीमारों के तुरंत इलाज के लिए एक मछली ट्रेनिंग कैंप के पास अस्थाई मेडिकल सेंटर भी बनाया गया है।
जानकार बताते हैं कि इस तरह के पहाड़ी इलाकों में जब अचानक बाढ़ आती है, तो सड़क मार्ग पूरी तरह कट जाते हैं और ऐसे में हेलीकॉप्टर ही एकमात्र उम्मीद बचते हैं। मेडिकल टीमों के साथ-साथ राहत दल भी संवेदनशील बिंदुओं पर मुस्तैदी से तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। लापता लोगों की तलाश में अनुभवी ट्रेकिंग गाइडों की भी मदद ली जा रही है, जो इन रास्तों और पहाड़ियों को अच्छी तरह से जानते हैं। अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों के लिए यह हर एक पल किसी सदमे से कम नहीं गुजर रहा है।

तेरह जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान और यातायात ठप

इस जलप्रलय ने केवल इंसानी जिंदगियों को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी हिलाकर रख दिया है। बाढ़ के तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से कुल तेरह जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। कई प्रमुख परियोजनाओं के बांध, बिजली घर और वहां तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा झटका लगा है। काठमांडू ट्रैफिक पुलिस ने एहतियात के तौर पर रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है।
नदी के निचले इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए भी प्रशासन की तरफ से लगातार लाउडस्पीकर के जरिए अलर्ट जारी किया जा रहा है। काठमांडू से बाहर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बलों का पहरा बैठा दिया गया है ताकि कोई भी अपनी जान जोखिम में डालकर उस तरफ न जाए। यह एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ है जिसने नेपाल के पर्यटन कारोबार के साथ-साथ सामान्य जनजीवन को भी पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। लोग सोशल मीडिया पर लगातार एक-दूसरे से सुरक्षित रहने की अपील कर रहे हैं और यह दर्दनाक खबरें हर किसी का दिल दहला रही हैं।

Nepal Flood: भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी का कड़ा पहरा और हाई अलर्ट

पड़ोसी देश में आए इस भारी जलप्रलय का असर अब भारत की सीमाओं पर भी साफ तौर पर देखा जा सकता है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने चौकसी बढ़ा दी है। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी अप्रतिहत स्थिति से निपटने के लिए एसएसबी की ग्यारह विशेष रेस्क्यू और रिलीफ टीमों को पूरी तरह तैयार किया गया है, जबकि सात अतिरिक्त टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। कोसी और नारायणी नदी बेसिन के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की आशंका के मद्देनजर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
उत्तर और पूर्वी बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के घाघरा-कर्णाली और उत्तराखंड के महाकाली नदी तंत्र से जुड़े संवेदनशील इलाकों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। सीमा पर तैनात सभी बटालियनों को स्थानीय जिला प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर काम करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। भारत के इन सीमावर्ती क्षेत्रों के आम लोग भी इस घटना के बाद से अपनी सुरक्षा को लेकर थोड़े चिंतित नजर आ रहे हैं। प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है ताकि यदि बाढ़ का पानी भारतीय सीमा की तरफ रुख करे, तो स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।
नेपाल की इस दुखद और भीषण प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना लाचार है। रसुवा जिले में मची इस तबाही ने न केवल दर्जनों परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि सैकड़ों लोगों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल भी खड़े कर दिए हैं। राहत और बचाव दल अपनी जान पर खेलकर हर एक जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं, और हर कोई बस यही प्रार्थना कर रहा है कि लापता लोग सुरक्षित मिल जाएं। इस बड़ी त्रासदी के बाद पर्यावरण और नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर भविष्य में गंभीर नीतिगत कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है। इस पूरी घटना से जुड़ी आगे की हर एक बड़ी जानकारी और रेस्क्यू अपडेट्स लगातार आनी बाकी हैं, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर राहत कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।

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