Nepal Flood Crisis: मौतों का आंकड़ा 800 के करीब, 320 भारतीय अब भी लापता; त्रिशूली टनल में जिंदगी बचाने की जंग जारी

त्रिशूली टनल में रेस्क्यू जारी, 320 भारतीयों की तलाश में भारत-नेपाल की टीमें सक्रिय

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Nepal Flood Crisis: हिमालयी राष्ट्र नेपाल में बादल फटने, ग्लेशियर ढहने और उसके बाद भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों में आई प्रलयंकारी बाढ़ से उपजे संकट में मृतकों की संख्या बढ़कर 800 के करीब (788 से 797 के बीच) पहुंच गई है। दोनों देशों के हिमालयी बेसिन में कुल लापता लोगों की संख्या अब 3,000 के पार जा चुकी है, जिसमें अकेले नेपाल क्षेत्र से 2,500 से अधिक लोग शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं और यात्रा पर गए कम से कम 320 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत एवं बचाव दल जुटे हुए हैं।
आपदा के पांचवें दिन त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की अंडरग्राउंड टनल में फंसे 100 से अधिक कामगारों को जीवित बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना और भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। भोटेकोशी नदी के जलस्तर में रुक-रुक कर हो रहे उछाल के चलते सर्च ऑपरेशन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, जिसके मद्देनजर बचाव दलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

Nepal Flood Crisis: त्रिशूली 3A टनल में जिंदगी बचाने का महा-अभियान, 100 मजदूरों के जीवित होने की आस

रसुवा और नुवाकोट जिलों में स्थापित 9 प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं में कार्यरत 537 से अधिक श्रमिक और इंजीनियर सैलाब के बाद से लापता हैं। इनमें सबसे विकट स्थिति त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के भूमिगत पावरहाउस में बनी हुई है। घटना के समय दर्जनों तकनीकी कर्मी और मजदूर टनल के भीतर मरम्मत कार्य में जुटे थे, तभी मलबे और गाद ने टनल के मुख्य मुहाने को अवरुद्ध कर दिया।
नेपाली सेना के इंजीनियरिंग कोर ने रातभर चले जटिल ऑपरेशन के बाद टनल के अंदर ऑक्सीजन और पानी पहुंचाने के लिए एक लाइफलाइन पाइपलाइन डालने में कामयाबी हासिल की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंदर हवा का दबाव सामान्य रहने से 100 से अधिक कामगार अब भी सुरक्षित हो सकते हैं। भारत से पहुंची विशेष टनल रेस्क्यू यूनिट और चीनी विशेषज्ञों का दल अत्याधुनिक हाइड्रोलिक कटर, भारी मशीनरी और नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए मलबे को हटाकर रास्ता चौड़ा करने में जुटा हुआ है।

320 भारतीयों की तलाश तेज, दूतावास और विदेश मंत्रालय सक्रिय

भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाल सरकार के आपदा नियंत्रण कक्ष के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए हुए हैं। आधिकारिक विवरण के अनुसार, 320 भारतीय नागरिकों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिनमें अधिकांश सीमावर्ती बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिक और इंजीनियर हैं।
राहत की बात यह है कि अब तक दर्जनों भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और तमिलनाडु के कई कामगारों को प्राथमिक उपचार के बाद भारत वापस भेज दिया गया है। भारत के अलावा अमेरिका के 85 नागरिक भी लापता सूची में शामिल हैं, जबकि 9 अमेरिकी नागरिकों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। यूक्रेन, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा के नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।

देवघाट के जंगलों में सामूहिक दफन, डीएनए सैंपलिंग से होगी पहचान

चितवन जिला इस त्रासदी का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां अब तक 264 से अधिक शव निकाले जा चुके हैं। नवलपरासी पूर्व में 194, नवलपरासी पश्चिम में 120, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनहुं में 37 और रसुवा में 13 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
अस्पतालों के शवगृहों में जगह पूरी तरह समाप्त हो जाने और अज्ञात शवों के क्षत-विक्षत होने के कारण प्रशासन ने स्वास्थ्य संकट से बचने के लिए चितवन के देवघाट जंगल में सैकड़ों कब्रें तैयार कर सामूहिक दफन की प्रक्रिया शुरू की है। भविष्य में परिजनों द्वारा शिनाख्त सुनिश्चित करने के लिए नेपाल और भारत की संयुक्त फॉरेंसिक टीमें प्रत्येक शव के डीएनए सैंपल और बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रख रही हैं।

17 हजार बच्चों पर संकट, 38 स्कूल क्षतिग्रस्त या तबाह

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने चेतावनी जारी की है कि बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित पर्वतीय जिलों में 17,000 से अधिक बच्चों को तत्काल आपातकालीन पोषण, स्वच्छ पेयजल और मानवीय सहायता की सख्त आवश्यकता है। आपदा में 18 स्कूल पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं, जबकि 20 अन्य विद्यालयों की इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे हजारों बच्चों की शिक्षा अनिश्चितकाल के लिए ठप हो गई है।
नेपाल के प्रधानमंत्री ने संसद को सूचित किया है कि थल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नागरिक प्रशासन के 20 हजार से अधिक जवानों ने अब तक 8,700 से अधिक लोगों को जमीनी रास्तों से सुरक्षित निकाला है, जबकि हेलीकॉप्टरों की सैकड़ों उड़ानों के जरिए 4,451 अत्यंत गंभीर पीड़ितों को एयरलिफ्ट किया गया है।

Nepal Flood Crisis: वैश्विक सहायता का ऐलान और मौसम की गंभीर चेतावनी

आपदा की विशालता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 30 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है, जबकि अमेरिका आपातकालीन खाद्य पैकेज भेज रहा है। नेपाल सरकार ने मित्र राष्ट्रों से दुर्गम घाटियों में राहत पहुंचाने के लिए हैवी-लिफ्ट ट्रांसपोर्ट ड्रोन, डीएनए टेस्टिंग किट और मोबाइल रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की तत्काल आपूर्ति का अनुरोध किया है।
मौसम विभाग के अनुसार, हिंदू कुश हिमालयी क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। नदी तटों के कटाव और नई झीलों के अस्थिर होने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में लाउडस्पीकर और मोबाइल संदेशों के जरिए लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर बने रहने की सख्त हिदायत दी है। राहत दल समय के खिलाफ दौड़ रहे हैं ताकि टनल में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाला जा सके।

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