AIIMS Bhopal IVF Centre: एम्स भोपाल में मप्र का पहला सरकारी IVF सेंटर, खर्च करीब 75 हजार बताया जा रहा

AIIMS Bhopal IVF Centre: एम्स भोपाल में प्रदेश का पहला सरकारी IVF और फर्टिलिटी सेंटर शुरू। निजी के मुकाबले सस्ता इलाज, करीब 75 हजार का जिक्र, जांच-दवाई अलग हो सकती है।

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AIIMS Bhopal IVF Centre: संतान की चाह कई परिवारों के लिए सालों का इंतजार बन जाती है। निजी केंद्रों में आईवीएफ का बिल लाखों तक पहुंच जाता है। इसी बीच भोपाल के एम्स में सरकारी आईवीएफ और फर्टिलिटी सेंटर शुरू होने की खबर उन दंपतियों के लिए राहत लेकर आई है जो खर्च के डर से इलाज टालते रहे।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के तहत यह सुविधा मध्य प्रदेश का पहला सरकारी आईवीएफ सेंटर बताई जा रही है। जांच, सलाह और आगे का इलाज एक छत के नीचे देने की कोशिश है। अब सवाल यही है कि पैकेज में क्या शामिल है और हर जोड़े को सीधे आईवीएफ मिलेगा या नहीं।

AIIMS Bhopal IVF Centre: एम्स भोपाल में क्या सुविधा शुरू हुई

सोमवार के आसपास एम्स भोपाल ने आईवीएफ एवं फर्टिलिटी सेंटर का शुभारंभ किया। संस्थान के अनुसार यहां महिला और पुरुष दोनों पक्षों से जुड़ी प्रजनन समस्याओं की जांच और काउंसिलिंग होगी। सिर्फ प्रक्रिया नहीं, पहले कारण समझने पर जोर है।

सरकारी अस्पताल में यह केंद्र इसलिए चर्चा में है क्योंकि प्रदेश में अब तक ऐसी उन्नत सुविधा मुख्य रूप से निजी क्लिनिक तक सीमित रही। दिल्ली और रायपुर के एम्स में पहले से आईवीएफ सेवा का जिक्र रहा है। भोपाल वाला केंद्र राज्य के मरीजों के लिए दूरी और खर्च दोनों घटाने वाला विकल्प बन सकता है।

खर्च निजी से कितना कम बताया जा रहा है

निजी केंद्रों में एक चक्र का खर्च मामले और दवा के हिसाब से डेढ़ लाख से चार लाख रुपये तक बताया जाता है। कुछ रिपोर्टों में पांच लाख तक का जिक्र भी है। एम्स भोपाल में इलाज करीब 75 हजार रुपये में होने की बात कही जा रही है।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में संस्थान की प्रकाशित दरों का हवाला देते हुए आईवीएफ शुल्क करीब 60 हजार और आईसीएसआई वाले विकल्प को करीब 65 हजार बताया गया। दवाएं, अतिरिक्त जांच और दोबारा चक्र लगने पर अंतिम रकम बढ़ सकती है। इसलिए भर्ती से पहले लिखित में पूछना जरूरी है कि पैकेज में क्या-क्या है।

एक महत्वपूर्ण बात और सामने आई है। मेडिकल रिपोर्टों के मुताबिक यह इलाज आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं बताया गया। कम फीस राहत है, लेकिन बीमा या योजना का सहारा हर मरीज को नहीं मिलेगा।

हर दंपति को सीधे आईवीएफ नहीं मिलेगा

अस्पताल साफ कह रहा है कि हर जोड़े को तुरंत आईवीएफ की सलाह नहीं दी जाएगी। पहले अंडाणु विकास और ओव्यूलेशन की निगरानी, हार्मोन जांच और जरूरत पड़ने पर दवा से सहायता जैसे कदम आ सकते हैं। कुछ मामलों में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान यानी आईयूआई का विकल्प भी रहता है।

जिन जोड़ों को इससे आगे की जरूरत होगी, उनके लिए प्रयोगशाला में निषेचन और भ्रूण स्थानांतरण वाली आईवीएफ प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई है। पुरुष साथी की जांच भी इसी केंद्र पर हो सकेगी। देखने पर लगता है कि सरकार महंगी तकनीक को आखिरी पायदान पर रख रही है, पहले सरल रास्ते आजमाने की बात कर रही है। यह सही भी है, क्योंकि हर बांझपन आईवीएफ से हल नहीं होता।

लैब और एक जगह इलाज क्यों मायने रखता है

आईवीएफ में सलाह के साथ लैब क्षमता चाहिए। अंडाणु-शुक्राणु संबंधी प्रक्रिया और भ्रूण को सुरक्षित रखने जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में हों तो मरीज को शहर-शहर भटकना कम पड़ता है। एम्स का दावा है कि आधुनिक लैब और जरूरी उपकरण जुटाए गए हैं।

भोपाल और आसपास के जिलों के परिवारों के लिए यह व्यावहारिक फर्क है। निजी केंद्र महानगरों में हैं, रहने-खाने का खर्च इलाज से अलग पड़ता है। सरकारी परिसर में जांच और फॉलोअप एक जगह हों तो मजदूर, किसान और छोटे नौकरीपेशा घरों पर बोझ कुछ हल्का हो सकता है। भीड़ और अपॉइंटमेंट का इंतजार अलग चुनौती रहेगा, यह सरकारी अस्पतालों का पुराना सच है।

किन लोगों के लिए यह केंद्र सोचना चाहिए

लंबे समय से गर्भ न ठहरने पर डॉक्टर जब सहायक प्रजनन की सलाह दें, तभी यह रास्ता आता है। उम्र, पुरानी बीमारी, पहले हुए ऑपरेशन और जांच की रिपोर्ट हर मामले को अलग बनाती है। सेंटर उन परिवारों के लिए खास तौर पर राहत हो सकता है जो निजी बिल नहीं उठा सकते।

मामला कुछ इस तरह से है कि उम्मीद बढ़ी है, गारंटी नहीं। सफलता हर चक्र में एक जैसी नहीं होती। एक बार में परिणाम न आने पर दोबारा कोशिश का खर्च और मानसिक थकान दोनों बढ़ते हैं। काउंसलिंग इसीलिए केंद्र का हिस्सा बताई गई है। सोशल मीडिया पर चमत्कार वाली भाषा से बचना चाहिए।

एक छोटा ट्विस्ट यह है कि सस्ता होना गुणवत्ता का विरोधी नहीं माना जा रहा। एम्स जैसे संस्थान में प्रोटोकॉल और प्रशिक्षण का ढांचा निजी छोटी क्लिनिक से अलग होता है। फिर भी मशीनें लगना काफी नहीं, नियमित विशेषज्ञ उपलब्धता और इंतजार की अवधि तय करेंगी कि राहत कागजों तक रहती है या घर तक पहुंचती है।

AIIMS Bhopal IVF Centre: इलाज शुरू करने से पहले क्या पूछें

फीस की रसीद में दवा, अल्ट्रासाउंड, हार्मोन टेस्ट और भ्रूण संरक्षण शामिल हैं या नहीं, यह लिखवा लें। कितने चक्र तक यही दर रहेगी, स्पष्ट कर लें। आयुष्मान न लगने की जानकारी पहले ही ले लें ताकि बाद में भ्रम न हो।

दोनों साथी जांच के लिए तैयार रहें। केवल महिला पर जिम्मेदारी डालना अधूरा इलाज है। दूसरी राय लेने का हक मरीज का है। कोई भी नई प्रक्रिया चिकित्सकीय सलाह के बिना शुरू न करें। यह जानकारी समाचार और अस्पताल प्रस्तुति पर आधारित है, व्यक्तिगत नुस्खा नहीं।

एम्स भोपाल में मध्य प्रदेश का पहला सरकारी आईवीएफ सेंटर शुरू हो गया है। निजी के लाखों के मुकाबले यहां खर्च करीब 75 हजार रुपये बताया जा रहा है, हालांकि जांच और दवा से बिल बदल सकता है। हर जोड़े को सीधे आईवीएफ नहीं दिया जाएगा। पहले जांच और सरल विकल्प, फिर जरूरत पर आगे की प्रक्रिया। कम आय वाले परिवारों के लिए यह दरवाजा खुलने जैसा है। अपॉइंटमेंट, पैकेज की लिखित जानकारी और डॉक्टर की सलाह के बाद ही कदम बढ़ाएं। केंद्र कैसे चलता है, इसकी अगली तस्वीर मरीजों के अनुभव से बनेगी।

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