Neelam Devi News: नीलम देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस, 25 नवंबर तक की डेडलाइन
पटना के 1 मॉल रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का निर्देश, अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी विवाद जारी।
Neelam Devi News: बिहार के चर्चित बाहुबली नेता व मोकामा से विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह वर्ष के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब राज्य सरकार ने नीलम देवी पर बड़ा प्रशासनिक शिकंजा कसा है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने नीलम देवी को पटना के अति-विशिष्ट 1 मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को 25 नवंबर 2026 तक खाली करने का आधिकारिक नोटिस थमा दिया है। इससे पहले राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नीलम देवी को राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया था और उन्हें प्राप्त राज्य मंत्री का दर्जा भी तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया था।
Neelam Devi News: पद छिनते ही रद्द हुआ आवास आवंटन, 25 नवंबर तक की तय समयसीमा
भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी बेदखली नोटिस के अनुसार, नीलम देवी को पटना स्थित 1 मॉल रोड का यह सरकारी बंगला 19 मई 2026 को आवंटित किया गया था। यह आवंटन राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति में उनकी बतौर सदस्य नियुक्ति और उन्हें दिए गए उपमंत्री/राज्य मंत्री के दर्जे के आधार पर विशेष श्रेणी के तहत किया गया था।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा उनका मनोनयन और मंत्री स्तर का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद नियमों के तहत उनका आवास आवंटन भी स्वतः निरस्त हो गया है। सरकारी नियमों के मुताबिक पदमुक्ति के बाद निर्धारित ग्रेस अवधि के भीतर बंगला खाली करना अनिवार्य होता है। विभाग ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 25 नवंबर 2026 तक परिसर को खाली कर चाबी संबंधित अधिकारियों को सौंप दें, अन्यथा नियमानुसार जबरन खाली कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बगावत के बाद जेडीयू ने दोनों को छह साल के लिए दिखाया था बाहर का रास्ता
अनंत सिंह और नीलम देवी के खिलाफ यह प्रशासनिक कार्रवाई पार्टी के भीतर हुई खुली बगावत का सीधा परिणाम मानी जा रही है। 24 अक्टूबर को जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व ने दोनों नेताओं को गंभीर अनुशासनहीनता और पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
इस तल्खी की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद उपचुनाव के दौरान सामने आई थी। आरोप है कि मोकामा में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले अनंत सिंह ने जदयू के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थन के बजाय प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में खुलकर प्रचार किया और अपने समर्थकों को लामबंद किया। पार्टी नेतृत्व ने इसे सीधा विद्रोह मानते हुए तत्काल प्रभाव से निष्कासन का चाबुक चला दिया।
विधायकी रद्द कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष के पाले में गेंद
नीलम देवी का रसूख और सरकारी सुविधाएं छिनने के साथ ही अब विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। जेडीयू विधायक दल ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को दलबदल विरोधी कानून और पार्टी व्हिप के उल्लंघन के आधार पर समाप्त करने की औपचारिक याचिका बिहार विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार के वीडियो और अन्य साक्ष्य भी सौंपे गए हैं।
हालांकि, संवैधानिक और संसदीय नियमों के अनुसार किसी विधायक को केवल राजनीतिक दल से निष्कासित किए जाने मात्र से उसकी सदन की सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। इस संवेदनशील मामले में विधानसभा अध्यक्ष को दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला सुनाना होगा। ऐसे में अनंत सिंह की सदस्यता को लेकर कानूनी और तकनीकी पेंच अभी फंसा हुआ है।
Neelam Devi News: राजनीतिक हलकों में बदले समीकरण, मोकामा में गरमाई सियासत
नीतीश कुमार सरकार की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने बिहार के राजनीतिक गलियारों और विशेषकर मोकामा-बाढ़ क्षेत्र में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। पहले पार्टी से बेदखली, फिर सरकारी ओहदा और लालबत्ती की समाप्ति और अब आलीशान सरकारी बंगले से निष्कासन का फरमान—यह स्पष्ट संकेत है कि सत्ताधारी दल अब बाहुबली नेताओं के दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है।
25 नवंबर तक बंगला खाली कराने की समयसीमा के बीच अनंत सिंह का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और विधानसभा अध्यक्ष उनकी विधायकी पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर पूरे सूबे की नजरें टिकी हुई हैं।
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