RELIEF Scheme Exporters 2027: पश्चिम एशिया तनाव के बीच निर्यातकों को बड़ी राहत, RELIEF योजना मार्च 2027 तक बढ़ाई गई

RELIEF Scheme Exporters 2027: पश्चिम एशिया तनाव के बीच निर्यातकों को बड़ी राहत, RELIEF योजना मार्च 2027 तक बढ़ाई गई

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RELIEF Scheme Exporters 2027: पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता से भारतीय निर्यातकों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने RELIEF योजना के कंपोनेंट-II की अवधि छह महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी है। वाणिज्य विभाग ने डीजीएफटी अधिसूचना संख्या 37/2026-27 के जरिए यह विस्तार किया है। योजना का मकसद समुद्री माल ढुलाई की बढ़ती लागत, बीमा प्रीमियम में इजाफे और युद्ध से जुड़े जोखिमों से निर्यातकों की रक्षा करना है, ताकि भारतीय सामान की आपूर्ति बाधित न हो। पात्र निर्यातकों को ईसीजीसी के माध्यम से योग्य शिपमेंट पर 95 प्रतिशत तक जोखिम कवर मिल सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब जहाजों की आवाजाही और बीमा खर्च सामान्य से कहीं ज्यादा हो गए हैं।

RELIEF का पूरा नाम रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन है। इसे एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत 19 मार्च 2026 को शुरू किया गया था। योजना मुख्य रूप से उन निर्यातकों के लिए बनाई गई थी जो संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजरायल, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, यमन जैसे देशों या उनके जरिए ट्रांसशिपमेंट वाले शिपमेंट भेजते हैं। विस्तार से पात्र निर्यातकों को अतिरिक्त समय मिल गया है, जिससे वे लंबे समय तक सुरक्षा का लाभ ले सकें।

RELIEF योजना क्या है और इसे क्यों बढ़ाया गया?

RELIEF योजना पश्चिम एशिया के संकट से पैदा हुए असाधारण खर्चों और जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों की मदद के लिए बनाई गई थी। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण जहाजों के रास्ते बदल रहे हैं, माल ढुलाई शुल्क बढ़ रहे हैं और बीमा कंपनियां ज्यादा प्रीमियम मांग रही हैं। इससे निर्यातकों की लागत बढ़ जाती है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल महसूस करते हैं। कंपोनेंट-II का विस्तार इसलिए किया गया है ताकि निर्यातक आने वाले शिपमेंट के लिए ईसीजीसी कवर ले सकें और असाधारण नुकसान से बच सकें। सरकार का मकसद आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखना और भारतीय निर्यात को बनाए रखना है। अन्य प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे। निर्यातकों को सलाह है कि वे आधिकारिक अधिसूचना और ईसीजीसी की गाइडलाइंस जरूर देखें।

95 प्रतिशत जोखिम कवर कैसे और किन्हें मिलेगा?

कंपोनेंट-II के तहत पात्र निर्यातकों को योग्य शिपमेंट पर 95 प्रतिशत तक जोखिम कवर उपलब्ध कराया जा सकता है। यह कवर युद्ध से जुड़े और राजनीतिक जोखिमों के लिए है। आमतौर पर ईसीजीसी 80 से 90 प्रतिशत तक कवर देता है, लेकिन इस योजना के तहत अतिरिक्त सुरक्षा दी जा रही है। सरकार अतिरिक्त क्लेम के लिए ईसीजीसी को रिइम्बर्स करती है और प्रीमियम को संकट से पहले के स्तर पर बनाए रखने का प्रावधान है। इसका मतलब यह नहीं कि हर नुकसान का 95 प्रतिशत सरकार सीधे चुकाएगी। लाभ बीमा पॉलिसी, शिपमेंट की पात्रता और योजना की शर्तों पर निर्भर करेगा। यह सुविधा मुख्य रूप से 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई स्टैंडअलोन या होल-टर्नओवर पॉलिसियों पर लागू होती है।

किन शिपमेंट और कार्गो को कवर मिलेगा?

योजना के तहत तीन तरह के कार्गो शामिल हैं। पहला एफसीएल यानी फुल कंटेनर लोड, जिसमें पूरा कंटेनर एक शिपमेंट के लिए इस्तेमाल होता है। दूसरा एलसीएल यानी लेस दैन कंटेनर लोड, जिसमें माल को दूसरे शिपमेंट के साथ भेजा जाता है। तीसरा रेफ्रिजरेटेड यानी तापमान नियंत्रित कंटेनर, जो खाद्य पदार्थों और संवेदनशील सामान के लिए इस्तेमाल होते हैं। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े शिपमेंट इस कवर से बाहर रखे गए हैं। इसलिए सभी तरह के माल को स्वतः लाभ नहीं मिलेगा। कवर उन शिपमेंट पर लागू होता है जो निर्दिष्ट पश्चिम एशियाई देशों के लिए या उनके जरिए ट्रांसशिपमेंट के लिए जा रहे हों। निर्यातकों को अपनी पॉलिसी और बिल ऑफ लेडिंग की तारीख जांचनी चाहिए।

आवेदन और क्लेम कैसे करें?

पात्र निर्यातकों को ईसीजीसी के आधिकारिक ग्राहक पोर्टल www.ecgcltd.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन और क्लेम जमा करने होंगे। ईसीजीसी ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध कराए हैं, जिनमें रजिस्ट्रेशन, यूजर आईडी बनाने और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया समझाई गई है। आवेदन से पहले निर्यातकों को अपनी बीमा पॉलिसी की तारीख, शिपमेंट डिटेल्स और अन्य जरूरी दस्तावेजों की पात्रता जरूर जांच लेनी चाहिए। कोई भी गलती होने पर क्लेम रद्द हो सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए समय पर प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

इस विस्तार से निर्यात कारोबार को क्या फायदा होगा?

इस विस्तार से पात्र निर्यातकों को अनिश्चित माहौल में भी कारोबार जारी रखने में मदद मिल सकती है। बढ़ते माल ढुलाई शुल्क और बीमा खर्च के बावजूद जोखिम कवर से उनका नुकसान सीमित रह सकता है। इससे खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय सामान की आपूर्ति बनाए रखने में सहायता मिलेगी। खासकर छोटे और मध्यम निर्यातकों को भरोसा मिल सकता है। हालांकि योजना का असली असर इस पर निर्भर करेगा कि कितने निर्यातक इसका सही तरीके से लाभ लेते हैं। यह कदम लागत या तनाव को खत्म नहीं करेगा, लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा जरूर देगा। निर्यातकों को सलाह है कि वे ईसीजीसी और वाणिज्य विभाग की वेबसाइट पर ताजा जानकारी देखते रहें और किसी भी एजेंट से बचें।

सरकार का यह कदम निर्यात को बढ़ावा देने और निर्यातकों के भरोसे को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी जटिल है, इसलिए ऐसे समय-सीमित लेकिन लक्षित उपाय निर्यात समुदाय के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं। पात्र निर्यातकों को सलाह दी जाती है कि वे जल्द से जल्द अपनी पात्रता जांचें और प्रक्रिया पूरी करें, ताकि वे विस्तारित अवधि का पूरा लाभ उठा सकें।

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