Maharashtra News: रायगढ़ में 32,490 पेड़ों की कटाई पर विवाद, CM फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को बताया भ्रामक
कर्जत में 3,000 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना का विरोध तेज, सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और वनीकरण का दिया हवाला।
Maharashtra News: महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत क्षेत्र में प्रस्तावित एक महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना के लिए 32 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई के आदेश ने राज्य की राजनीति और पर्यावरण हलकों में भारी उबाल पैदा कर दिया है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं, नागरिक संगठनों और प्रमुख विपक्षी दलों ने पश्चिमी घाट के इस संवेदनशील इलाके में पेड़ों के संहार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस तीखे विरोध के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने विपक्षी दलों पर विकास कार्यों में बाधा डालने और जनता के बीच भ्रामक व मनगढ़ंत नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजना को पर्यावरण और वन मंत्रालय से सभी वैधानिक मंजूरियां मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि पर्यावरणविदों का तर्क है कि इस स्तर पर वनों की कटाई से पश्चिमी घाट का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र तबाह हो जाएगा।
Maharashtra News: टोरेंट पावर की 3,000 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना पर क्यों छिड़ा संग्राम
यह पूरा विवाद निजी क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी टोरेंट पावर की प्रस्तावित 3,000 मेगावाट क्षमता वाली ‘पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट’ (PSP) से जुड़ा हुआ है। इस विशाल परियोजना को रायगढ़ जिले के कर्जत तालुका स्थित साईडोंगर, कोटवाल खलाटी और पाली के पहाड़ी व वन क्षेत्रों में स्थापित करने की योजना है। बिजली की पीक आवर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्तावित इस परियोजना के दायरे में आरक्षित वन भूमि का एक बड़ा हिस्सा आ रहा है।
परियोजना के निर्माण कार्यों, जलाशयों और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वन विभाग ने लगभग 32,490 पूरी तरह विकसित पेड़ों की कटाई की मंजूरी दी है। यही मंजूरी अब बड़े जन-आंदोलन का कारण बन गई है। स्थानीय आदिवासियों, ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों को काटने से वन्यजीवों का प्राकृतिक गलियारा छिन्न-भिन्न हो जाएगा, भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा और बारहमासी प्राकृतिक जल स्रोतों पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पलटवार, विपक्ष पर साधा निशाना
पेड़ों की कटाई को लेकर राज्य सरकार पर हो रहे चौतरफा हमलों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह परियोजना महाराष्ट्र को हरित और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि थर्मल पावर प्लांट्स से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ग्रिड को स्थिरता प्रदान करने के लिए पंप्ड स्टोरेज तकनीक आज दुनिया भर में सबसे प्रभावी माध्यम मानी जा रही है।
फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर इस मामले में जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासियों के अधिकारों का पूरा सम्मान करती है। प्रशासन स्थानीय लोगों की सभी जायज चिंताओं और आपत्तियों को सुनने के लिए तैयार है तथा विकास कार्यों के साथ-साथ आजीविका व पर्यावरण की सुरक्षा को पूरी तरह संतुलित रखा जाएगा।
90 हजार नए पौधे लगाने और वन्यजीव सुरक्षा का सरकारी आश्वासन
पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की भरपाई के लिए त्रिस्तरीय प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत कुल 90,000 नए पौधे लगाए जाएंगे, जिसका पूरा वित्तीय खर्च संबंधित कंपनी और राज्य वन विभाग वहन करेगा। इसके साथ ही इन नए जंगलों की देखरेख के लिए दीर्घकालिक बजटीय प्रावधान भी तय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि परियोजना का मुख्य कार्यस्थल भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है, जिससे संरक्षित वन क्षेत्र और वन्यजीवों को कोई सीधा खतरा नहीं है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों और वनस्पतिशास्त्रियों का कहना है कि दशकों पुराने विशालकाय देशी वृक्षों और समृद्ध जैव विविधता की भरपाई केवल नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती, क्योंकि एक पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित होने में कई दशक लग जाते हैं।
आदित्य ठाकरे और रोहित पवार ने घेरा, राज ठाकरे से भी गुहार
रायगढ़ में प्रस्तावित पेड़ों की कटाई के विरोध में विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार पर कॉरपोरेट कंपनियों के मुनाफे के लिए महाराष्ट्र की अमूल्य प्राकृतिक संपदा की बलि चढ़ाने का खुला आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्जत और पश्चिमी घाट का क्षेत्र मुंबई और एमएमआर क्षेत्र के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है, जहां अंधाधुंध कटाई से भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने भी इस परियोजना की समीक्षा की मांग करते हुए पूछा कि क्या नवीकरणीय ऊर्जा के नाम पर जंगलों को उजाड़ना पर्यावरण संरक्षण की श्रेणी में आता है। इसी बीच, स्थानीय संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है, जिस पर राज ठाकरे ने इलाके का दौरा करने और स्थानीय लोगों की समस्याओं को सरकार के सामने पुरजोर ढंग से उठाने का आश्वासन दिया है।
Maharashtra News: स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता बनाम पश्चिमी घाट के संरक्षण की चुनौती
कर्जत का यह विवाद अब केवल 32 हजार पेड़ों तक सीमित न रहकर आधुनिक विकास मॉडल और पर्यावरण संरक्षण के बीच छिड़ी व्यापक बहस का केंद्र बन चुका है। एक तरफ राज्य सरकार का दृष्टिकोण है कि 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर स्टोरेज परियोजनाओं की स्थापना अपरिहार्य है, तो दूसरी तरफ नागरिक समाज का आग्रह है कि बुनियादी ढांचे के ऐसे विशाल प्रोजेक्ट्स को घने जंगलों के बजाय बंजर अथवा गैर-वन भूमियों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। रायगढ़ में ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और राजनीतिक तकरार के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या नए कदम उठाता है।
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