Monsoon Skin Care: बारिश के मौसम में क्यों रूठने लगती है त्वचा, जानें बचाव का सही तरीका

Monsoon Skin Care: बारिश के मौसम में क्यों रूठने लगती है त्वचा, जानें बचाव का सही तरीका

0

Monsoon Skin Care: चिपचिपी गर्मी से निजात तो मिल जाती है, लेकिन मानसून आते ही आईने में एक नई समस्या दिखने लगती है बेजान, रूखी और कहीं-कहीं दाने भरी त्वचा। यह शिकायत सिर्फ कुछ लोगों की नहीं, बल्कि हर साल बारिश के मौसम में लाखों लोगों की होती है। असल वजह त्वचा की सबसे बाहरी परत यानी स्किन बैरियर के कमजोर पड़ने में छिपी है, और डर्मेटोलॉजिस्ट इसे समझे बिना इलाज करने को गलत तरीका मानते हैं।

Monsoon Skin Care: आखिर स्किन बैरियर होता क्या है

त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक स्किन बैरियर को समझने का सबसे आसान तरीका है इसे ईंट-सीमेंट की दीवार जैसा सोचना। त्वचा की कोशिकाएं यहां ईंटों का काम करती हैं, जबकि सेरामाइड्स, कोलेस्ट्रॉल और फैटी एसिड जैसे तत्व सीमेंट की भूमिका निभाते हुए इन कोशिकाओं को जोड़े रखते हैं। यही परत त्वचा में नमी को कैद रखती है और धूल-मिट्टी, प्रदूषण व बैक्टीरिया को अंदर घुसने से रोकती है। जब यह दीवार कमजोर पड़ती है, तभी त्वचा बेजान और संवेदनशील नज़र आने लगती है।

मानसून में यह परत टूटती क्यों है

बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। इसका सीधा असर त्वचा के तेल और पसीने के संतुलन पर पड़ता है दोनों साथ मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, और यहीं से मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिल जाता है।

चिपचिपाहट से परेशान होकर बहुत से लोग दिन में तीन-चार बार चेहरा धोने लगते हैं, यह सोचकर कि इससे त्वचा साफ रहेगी। हकीकत इसके उलट है। बार-बार धोने से त्वचा का प्राकृतिक तेल निकल जाता है और बैरियर और कमज़ोर होता चला जाता है।

बारिश का मतलब यह नहीं कि प्रदूषण थम जाता है। हवा में मौजूद बारीक कण त्वचा की सतह पर जमते रहते हैं, जिससे सूजन और जलन की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा सीलन भरा माहौल फंगस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए मुफीद साबित होता है यही वजह है कि इस मौसम में खुजली, इंफेक्शन और जलन की शिकायतें अचानक बढ़ जाती हैं।

हर समस्या का अलग इलाज नहीं, बैरियर मज़बूत करना ज़्यादा ज़रूरी

त्वचा विशेषज्ञों की सलाह है कि रूखापन, मुंहासे और संक्रमण इन तीनों को अलग-अलग समस्या मानकर तीन तरह के इलाज ढूंढने के बजाय जड़ पर ध्यान देना चाहिए। अगर स्किन बैरियर मज़बूत हो, तो यह तीनों समस्याएं अपने आप कम होने लगती हैं।

क्लींजिंग में बरतें सावधानी

चेहरा धोने के लिए ऐसा क्लींजर चुनना चाहिए जो pH-बैलेंस्ड हो और जिसमें सल्फेट न मिला हो। इससे चेहरे की गंदगी तो साफ होती है, लेकिन त्वचा का प्राकृतिक तेल बरकरार रहता है।

सेरामाइड्स को बनाएं आदत का हिस्सा

सेरामाइड्स युक्त प्रोडक्ट स्किन बैरियर की मरम्मत में मदद करते हैं। यह तत्व त्वचा से निकल चुकी नमी को वापस लाने में कारगर माने जाते हैं, इसलिए मानसून के मौसम में इन्हें रोज़मर्रा की स्किनकेयर रूटीन में शामिल करने की सलाह दी जाती है।

मॉइस्चराइजर छोड़ना नहीं, बदलना है सही तरीका

बहुत से लोग यह सोचकर मॉइस्चराइजर लगाना बंद कर देते हैं कि बारिश के मौसम में त्वचा वैसे भी नम रहती है। यह धारणा गलत है। ऑयली त्वचा वाले लोगों को भी मॉइस्चराइज़र की ज़रूरत पड़ती है, बस भारी क्रीम की जगह हल्के जेल-बेस्ड या लोशन-बेस्ड विकल्प चुनने चाहिए।

Monsoon Skin Care: बादलों के पीछे भी सक्रिय रहती हैं UV किरणें

सनस्क्रीन को लेकर एक आम गलतफहमी यह है कि बारिश या बादलों के मौसम में इसकी ज़रूरत नहीं होती। जबकि सच यह है कि UV किरणें बादलों को भी भेदकर त्वचा तक पहुंच सकती हैं। इसलिए मौसम चाहे जैसा भी हो, रोज़ सनस्क्रीन लगाना त्वचा की सुरक्षा के लिए ज़रूरी माना जाता है।

Monsoon Skin Care: रोज़मर्रा की आदतों में छोटे बदलाव, बड़ा असर

गौर करने वाली बात यह है कि मानसून में त्वचा की देखभाल के लिए किसी महंगे या जटिल इलाज की ज़रूरत नहीं होती। सही क्लींजर, सेरामाइड्स वाला मॉइस्चराइज़र और नियमित सनस्क्रीन इन तीन आदतों से ही बड़ा फर्क देखने को मिल सकता है।

जो लोग पहले से ऑयली या सेंसिटिव स्किन से जूझते रहे हैं, उनके लिए यह मौसम विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण साबित होता है। ऐसे में बार-बार चेहरा धोने या हर नई समस्या के लिए अलग प्रोडक्ट आज़माने के बजाय, त्वचा की सुरक्षा परत को मज़बूत बनाने वाली एक सीधी और सरल रूटीन अपनाना कहीं ज़्यादा असरदार विकल्प है।

बारिश के मौसम की खूबसूरती और राहत तभी पूरी महसूस होती है जब त्वचा भी साथ दे। थोड़ी सी सजगता और सही स्किनकेयर आदतों के साथ, मानसून की नमी को त्वचा की दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी दोस्त बनाया जा सकता है।

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.