Modi-Putin Meeting: BRICS से पहले मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात, व्यापार-ऊर्जा-रक्षा पर चर्चा
मोदी-पुतिन ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की, पुतिन ने भारत को रूस आने का न्योता दिया
Modi-Putin Meeting: भारत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई। दोनों वैश्विक नेताओं ने भारत और रूस के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंधों, विशेष व विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी (Special and Privileged Strategic Partnership), ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष अन्वेषण और औद्योगिक सहयोग की प्रगति की गहन समीक्षा की।
वार्ता के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक टकरावों और समुद्री व्यापारिक मार्गों पर मंडराते संकट पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया। बैठक का एक प्रमुख कूटनीतिक परिणाम यह रहा कि राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को आगामी 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का औपचारिक निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
Modi-Putin Meeting: वर्ष 2026 में दूसरी उच्चस्तरीय मुलाकात: निरंतरता और विश्वास का प्रतीक
वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इस द्विपक्षीय बैठक को असाधारण महत्व दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह दूसरी आमने-सामने की बैठक है। इससे पूर्व 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं ने विस्तृत चर्चा की थी।
यह बैठक ऐसे संवेदनशील समय में हुई है जब वैश्विक व्यवस्था तीव्र ध्रुवीकरण, आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की विभीषिकाओं से जूझ रही है। इसके बावजूद नई दिल्ली और मॉस्को के बीच संवाद की यह निरंतरता दर्शाती है कि बाहरी भू-राजनीतिक दबावों के परे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक स्वायत्तता और आपसी विश्वास का धरातल कितना मजबूत है।
द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का संकल्प
आर्थिक मोर्चे पर दोनों नेताओं ने ‘प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030’ के क्रियान्वयन को तीव्र गति देने पर सहमति जताई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों का आपसी व्यापार रिकॉर्ड लगभग 70 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है। अब दोनों पक्षों ने इस आंकड़े को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचाने का खाका तैयार किया है।
व्यापारिक असंतुलन को पाटने और सहयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित न रखने के उद्देश्य से नई दिल्ली में 9 से 11 सितंबर 2026 तक पहली बार आयोजित ऐतिहासिक औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रॉम इंडिया’ (INNOPROM India) का प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने संयुक्त रूप से दौरा किया। इस प्रदर्शनी के जरिए मशीन टूल्स, रोबोटिक्स, उन्नत विनिर्माण और हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक उपक्रमों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा की धुरी: सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और क्रूड आयात
वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की निरंतर आर्थिक वृद्धि के लिए ऊर्जा सुरक्षा सबसे अहम स्तंभ बनी हुई है। वार्ता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों के चरम दौर में भी भारत के कुल कच्चा तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत के शिखर तक पहुंची थी।
दोनों पक्षों ने न केवल कच्चे तेल की सुगम और रियायती आपूर्ति बनाए रखने पर चर्चा की, बल्कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की भावी इकाइयों के त्वरित निर्माण, एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के दीर्घकालिक अनुबंधों और आर्कटिक क्षेत्र में ऊर्जा अन्वेषण के संयुक्त उपक्रमों पर भी रणनीतिक सहमति व्यक्त की।
रक्षा साझेदारी: खरीददार-विक्रेता मॉडल से संयुक्त विकास की ओर
दशकों पुराने भारत-रूस रक्षा संबंधों की समीक्षा करते हुए दोनों नेताओं ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत सह-विकास और सह-उत्पादन (Co-development & Co-production) पर जोर दिया। बैठक में किसी नए प्रत्यक्ष हथियार सौदे की घोषणा किए बिना मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की निरंतरता, स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध आपूर्ति और रखरखाव प्रणालियों को मजबूत बनाने पर सहमति बनी।
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया कि आधुनिक रक्षा तकनीक का हस्तांतरण और भारत के भीतर सैन्य हार्डवेयर का स्थानीय विनिर्माण ही इस साझेदारी का भविष्य तय करेगा। दोनों देशों ने रणनीतिक सैन्य प्लेटफॉर्म्स के आधुनिकीकरण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों की गति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पश्चिम एशिया, काला सागर और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता
द्विपक्षीय मामलों से इतर दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर स्पष्ट विचार साझा किए। पश्चिम एशिया (लाल सागर व स्वेज नहर) और काला सागर क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों और बाधित हो रहे समुद्री परिवहन मार्गों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
भारत ने विशेष रूप से इन संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में तैनात व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हजारों भारतीय नाविकों (Indian Seafarers) की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत के सैद्धांतिक रुख को दोहराते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है; स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही हासिल की जा सकती है। भारत ने शांति स्थापना के किसी भी गंभीर कूटनीतिक प्रयास में रचनात्मक सहयोग देने की अपनी तत्परता पुनः व्यक्त की।
विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग और राष्ट्रपति पुतिन का निमंत्रण
11 सदस्यीय विस्तारित ब्रिक्स समूह के पहले पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करते हुए भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील व अल्पविकसित देशों) की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय पटल पर रखने का संकल्प दोहराया है। राष्ट्रपति पुतिन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सराहना करते हुए वैश्विक वित्तीय सुधारों और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में नई दिल्ली की केंद्रीय भूमिका का पुरजोर समर्थन किया।
बैठक के समापन पर राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को मॉस्को में आयोजित होने वाले 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इस शिखर वार्ता की तिथियां राजनयिक माध्यमों से शीघ्र तय की जाएंगी। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक कूटनीति के तहत राष्ट्रपति पुतिन को प्राचीन तमिल नीति ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवादित संस्करण भेंट किया, जो संत तिरुवल्लुवर के सार्वभौमिक मानवतावादी विचारों का प्रतीक है।
Modi-Putin Meeting: निष्कर्ष
नई दिल्ली में हुई मोदी-पुतिन शिखर वार्ता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तेजी से बदलते वैश्विक गठबंधनों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत और रूस के रिश्ते समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा और शांति वार्ता पर दोनों देशों की यह सहमति आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समग्र विमर्श को एक संतुलित और सकारात्मक दिशा प्रदान करेगी।
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