BRICS Summit 2026: PM Modi की अगुवाई में भारत के लिए खुलेंगे आर्थिक अवसर?
व्यापार, निवेश, UPI, ऊर्जा और MSME सेक्टर को ब्रिक्स मंच से मिल सकती है नई रफ्तार
BRICS Summit 2026: भारत की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाला 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन केवल एक बहुपक्षीय कूटनीतिक आयोजन भर नहीं है, बल्कि यह देश के व्यापार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और निर्यात परिदृश्य के लिए अवसरों का एक नया प्रवेश द्वार बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक सम्मेलन पर दुनिया भर के नीति निर्माताओं और उद्योगपतियों की निगाहें टिकी हैं।
वैश्विक मंदी की आहट, पश्चिम एशिया में आपूर्ति श्रृंखला के संकट, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डॉलर के बढ़ते प्रभुत्व के बीच भारत ब्रिक्स के विस्तृत मंच का उपयोग विकासशील देशों (Global South) के बीच व्यापारिक सुगमता, डिजिटल वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करने की तैयारी में है। सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई सहित सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं की प्रत्यक्ष उपस्थिति इस आर्थिक मंथन को अभूतपूर्व रणनीतिक गहराई प्रदान कर रही है।
BRICS Summit 2026: ग्लोबल साउथ का आर्थिक इंजन
ब्रिक्स का दायरा अब केवल पांच मूल देशों तक सीमित नहीं रहा है। नए ऊर्जा उत्पादक देशों और गतिशील अर्थव्यवस्थाओं के जुड़ने के बाद यह समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में पीपीपी (PPP) आधार पर लगभग 37 प्रतिशत और दुनिया की कुल आबादी के 45 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है।
वैश्विक व्यापार में समूह की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। ऐसे विशाल आर्थिक ब्लॉक की अध्यक्षता संभालते हुए भारत के पास अपने घरेलू विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, कृषि निर्यात और एमएसएमई (MSME) उत्पादों के लिए सदस्य देशों में नए और गैर-पारंपरिक बाजारों के दरवाजे खोलने का सुनहरा अवसर है।
भारतीय निर्यातकों और MSME सेक्टर के लिए व्यापक बाजार पहुंच
भारतीय वाणिज्य और उद्योग जगत के लिए ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारतीय निर्यातक लंबे समय से गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) और जटिल नियामक प्रक्रियाओं के कारण कई विदेशी बाजारों में पूरी क्षमता से कारोबार नहीं कर पा रहे थे।
लैटिन अमेरिका में ब्राजील, अफ्रीका में दक्षिण अफ्रीका व इथियोपिया, मध्य पूर्व में यूएई व ईरान तथा यूरेशिया में रूस के बाजारों में भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, ऑर्गेनिक फूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग टूल्स और आईटी सेवाओं की सीधी मांग बढ़ रही है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के लिए ब्रिक्स डिजिटल ई-कॉमर्स कॉरिडोर और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर चर्चा होने से भारतीय छोटे व्यापारियों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में खासी कमी आने की उम्मीद है।
डिजिटल वित्तीय क्रांति: UPI और ब्रिक्स पे का सीमा पार एकीकरण
इस शिखर सम्मेलन का सबसे बहुप्रतीक्षित एजेंडा अंतरराष्ट्रीय भुगतान तंत्र का आधुनिकीकरण है। भारत अपनी अत्याधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को वैश्विक पहचान दिला चुका है, और अब ब्रिक्स के बहुपक्षीय ढांचे में इसके विस्तार की संभावना तलाशी जा रही है।
सदस्य देशों के बीच स्थानीय राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स पे’ (BRICS Pay) और भारत के यूपीआई नेटवर्क के बीच अंतर-संचालनीयता विकसित करने पर गहन विमर्श चल रहा है। यदि यह वित्तीय ढांचा गति पकड़ता है, तो भारतीय व्यापारियों को अमेरिकी डॉलर जैसी मुद्राओं के विनिमय जोखिम से सुरक्षा मिलेगी, मुद्रा रूपांतरण शुल्क घटेगा और सीमा पार व्यापारिक लेनदेन कुछ ही सेकंडों में निष्पादित हो सकेंगे।
ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच भारत जैसे विशाल ऊर्जा आयातक देश के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ब्रिक्स में रूस, यूएई और ईरान जैसे दुनिया के शीर्ष तेल और गैस उत्पादक देशों की उपस्थिति भारत को स्थिर और रियायती दरों पर हाइड्रोकार्बन आयात की मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।
इसके साथ ही शंघाई स्थित ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से भारत के स्वच्छ ऊर्जा ट्रांजिशन, शहरी मेट्रो रेल परियोजनाओं, लॉजिस्टिक्स हब्स और एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए दीर्घकालिक व कम ब्याज दर वाले बुनियादी ढांचा ऋणों की गति तेज होगी। भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और बैटरी स्टोरेज विनिर्माण में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए ब्रिक्स ग्रीन इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप का भी प्रस्ताव रख सकता है।
मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग: त्रिपक्षीय कूटनीति का आर्थिक प्रभाव
सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठकें आर्थिक समीकरणों को स्थिर करने में अहम भूमिका निभाएंगी। रूस के साथ भारत का व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, लेकिन भारत के लिए विशाल व्यापार घाटा चिंता का विषय है। पीएम मोदी रूसी बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स और कृषि उत्पादों की पहुंच बढ़ाकर इस घाटे को संतुलित करने का प्रयास करेंगे।
दूसरी ओर, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच शी जिनपिंग की भारत यात्रा दोनों एशियाई महाशक्तियों के बीच विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की निरंतरता और संतुलित द्विपक्षीय व्यापार को व्यावहारिक धरातल पर लाने का मंच बन सकती है।
बहुपक्षीय वैश्विक संस्थाओं में सुधार: भारत की बुलंद आवाज
ब्रिक्स के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी संस्थाओं में अविलंब संरचनात्मक सुधारों की वकालत करेंगे।
भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि बीसवीं सदी के मध्य में बने वैश्विक नियम इक्कीसवीं सदी की विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते। भारत ब्रिक्स के जरिए एक निष्पक्ष, नियम-आधारित, पारदर्शी और बहुध्रुवीय वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की पैरवी कर रहा है, जहां विकासशील राष्ट्रों की संप्रभु प्राथमिकताओं को अनदेखा न किया जा सके।
BRICS Summit 2026: दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि की ठोस रूपरेखा
नई दिल्ली में आयोजित हो रहा ब्रिक्स समिट 2026 किसी तात्कालिक चमत्कारिक बदलाव के बजाय भारत की मध्यम और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि की एक मजबूत नींव तैयार करने वाला आयोजन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यदि भारत व्यापारिक नियमों के सरलीकरण, राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार तंत्र, यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और संयुक्त निवेश साझेदारियों पर ठोस सहमति बनाने में सफल रहता है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ आने वाले वर्षों में भारतीय उद्योग जगत, रोजगार सृजन और देश की सकल आर्थिक विकास दर (GDP) में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा।
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