BRICS Summit 2026: पीएम मोदी ने गिनाईं BRICS की 10 बड़ी ताकतें, बताया वैश्विक आर्थिक शक्ति
मोदी बोले- BRICS दुनिया की 40% GDP और 25% से ज्यादा वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है
BRICS Summit 2026: देश की राजधानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पूर्व आयोजित ‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार, सीमा पार व्यापार और भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति पर एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर रेखांकित किया कि विस्तारित ब्रिक्स समूह आज दुनिया की आधी आबादी, लगभग 40 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और 25 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सशक्त प्रतिनिधित्व करता है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रहे व्यवधानों, बढ़ते संरक्षणवाद और भू-राजनीतिक टकरावों के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां एक ओर दुनिया में व्यापारिक दीवारें खड़ी की जा रही हैं, वहीं भारत विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को आपस में जोड़ने के लिए मजबूत आर्थिक सेतु (Economic Bridges) का निर्माण कर रहा है।
BRICS Summit 2026: 21 देशों का सशक्त परिवार
प्रधानमंत्री ने समूह की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए स्मरण कराया कि वर्ष 2006 में जब ब्रिक्स की नींव रखी गई थी, तब इसमें मात्र चार देश शामिल थे। पिछले दो दशकों में निरंतर विस्तार के बाद अब मुख्य सदस्यों और साझेदार देशों को मिलाकर यह 21 देशों का एक विशाल आर्थिक परिवार बन चुका है।
आर्थिक आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विगत दो दशकों में जहां संपूर्ण विश्व की जीडीपी में लगभग ढाई गुना की वृद्धि दर्ज की गई, वहीं ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था में साढ़े चार गुना का असाधारण उछाल आया है। यह आंकड़ा सिद्ध करता है कि ब्रिक्स देशों की आर्थिक विकास दर शेष विश्व की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से आगे बढ़ी है, जिसने इसे वैश्विक विकास का निर्विवाद इंजन बना दिया है।
भारत का विजन: रेजिलिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी
वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते हुए भारत ने समूह के लिए एक व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी रोडमैप तैयार किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता का मूल मंत्र ‘बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ (RICS) है। भारत का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स को केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित रखने के बजाय इसे कृषि, स्वास्थ्य सुरक्षा, कौशल विकास, हरित ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारियों का केंद्र बनाना है।
महामारी के बाद के दौर और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच भारत का स्पष्ट मत है कि किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या देश पर अति-निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरी है। इसीलिए भारत ब्रिक्स के माध्यम से एक बहु-ध्रुवीय, विकेंद्रीकृत और अधिक पारदर्शी आपूर्ति तंत्र की स्थापना की वकालत कर रहा है।
संरक्षणवाद के दौर में भारत बना रहा है नए व्यापारिक गलियारे
दुनिया भर में बढ़ते टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत खुले, नियम-आधारित और निष्पक्ष व्यापार का पक्षधर है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्ष 2014 के बाद से भारत ने वैश्विक स्तर पर लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार और व्यापक आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप दिया है।
भारत का लक्ष्य ब्रिक्स देशों के बीच गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करना और व्यापार लागत में उल्लेखनीय कटौती करना है। इसके साथ ही ब्रिक्स वित्त प्रमुखों की बैठकों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार और स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को गति देने के लिए कुशल सीमा पार भुगतान तंत्र विकसित करने पर गहन विमर्श चल रहा है।
ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का नया केंद्र बनता भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए भारत में विनिर्माण और अनुसंधान के अभूतपूर्व अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया एंड स्केल फॉर द वर्ल्ड’ का मंत्र देते हुए रेखांकित किया कि भारत आज सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, जहाज निर्माण (Shipbuilding) और बायो-टेक्नोलॉजी जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में भारी पूंजीगत निवेश कर रहा है।
देश भर में आधुनिक एक्सप्रेसवे, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और विश्वस्तरीय बंदरगाहों का जो सघन नेटवर्क तैयार हुआ है, उसने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए चीन के विकल्प के रूप में सबसे विश्वसनीय विनिर्माण गंतव्य बना दिया है।
भारतीय स्टार्टअप्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक धमक
भारत के जीवंत नवाचार तंत्र की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने साझा किया कि आज देश में 2 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स और 120 से अधिक यूनिकॉर्न कार्यरत हैं। यह विशाल तंत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक, ग्रीन हाइड्रोजन, एड-टेक और स्पेस-टेक के क्षेत्र में क्रांतिकारी समाधान विकसित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव दिया कि भारतीय तकनीकी समाधानों को ब्रिक्स देशों के साझा बाजारों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि विकासशील देशों को किफायती तकनीक मिल सके।
डिजिटल क्रांति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज दुनिया भर के कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों के लगभग आधे हिस्से का संचालन करता है। भारत इस सुरक्षित और कम लागत वाली डिजिटल भुगतान प्रणाली को ब्रिक्स साझेदारों के साथ साझा करने को तत्पर है, जिससे देशों के बीच सीमा पार वित्तीय लेन-देन सुगम, तीव्र और पारदर्शी बन सकेगा।
ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व और सुरक्षित समुद्री मार्ग
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि ब्रिक्स को ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील और अल्पविकसित देशों) की प्राथमिकताओं और चिंताओं को उठाने वाला सबसे मुखर मंच बनना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं की प्रशासनिक संरचना में तत्काल सुधार की आवश्यकता बताई, ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सके।
इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया और अन्य संवेदनशील जलक्षेत्रों में जारी अस्थिरता का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने सुरक्षित समुद्री व्यापारिक मार्गों की अनिवार्यता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समुद्रों में सुरक्षित नौवहन की गारंटी ही वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति को सुरक्षित रख सकती है।
BRICS Summit 2026: निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स अब वैश्विक आर्थिक विमर्श की दिशा तय करने वाला प्रमुख संगठन बन चुका है। दुनिया की 40 प्रतिशत जीडीपी और 25 प्रतिशत व्यापार का प्रतिनिधित्व करने वाला यह समूह अब केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय सुधारों के जरिए एक अधिक समावेशी और संतुलित विश्व व्यवस्था की नींव रख रहा है।
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