Gold-Silver Price 12 September 2026: सोने-चांदी के भाव में बड़ा उतार-चढ़ाव
24 कैरेट सोना ₹1.53 लाख के करीब, चांदी ₹2.55 लाख प्रति किलो; MCX में भी तेज हलचल
Gold-Silver Price 12 September 2026: घरेलू और वैश्विक सराफा बाजार में सितंबर के दूसरे पखवाड़े में कीमती धातुओं की कीमतों में अभूतपूर्व अस्थिरता और तेज उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीतियों को लेकर अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोने और चांदी के भाव लगातार हिचकोले खा रहे हैं। 11 सितंबर के कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों से आई रिकवरी के चलते शनिवार, 12 सितंबर 2026 को सराफा बाजारों में निवेशकों और खुदरा खरीदारों की नजरें टिकी हुई हैं।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा बेंचमार्क आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट शुद्ध सोने का खुदरा भाव 1,53,018 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया, जबकि आभूषण निर्माण में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,40,164 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। इसके अतिरिक्त 18 कैरेट सोने की दर 1,14,764 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं औद्योगिक मांग और निवेश के दोहरे दबाव के बीच चांदी का राष्ट्रीय बेंचमार्क भाव 2,55,100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बना हुआ है।
Gold-Silver Price 12 September 2026: शुद्धता के आधार पर सोने और चांदी की ताजा दरें
देश के बुलियन बाजार में विभिन्न कैरेट की शुद्धता के अनुसार कीमतें तय की जाती हैं। यह भाव बिना जीएसटी और मेकिंग चार्ज के जारी किए गए हैं।
| धातु / शुद्धता | शुद्धता प्रतिशत | ताजा भाव (IBJA दरें) |
| सोना 24 कैरेट | 99.9% शुद्ध | ₹1,53,018 प्रति 10 ग्राम |
| सोना 22 कैरेट | 91.6% शुद्ध | ₹1,40,164 प्रति 10 ग्राम |
| सोना 18 कैरेट | 75.0% शुद्ध | ₹1,14,764 प्रति 10 ग्राम |
| चांदी 999 | 99.9% शुद्ध | ₹2,55,100 प्रति किलोग्राम |
सराफा विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा आभूषणों की खरीदारी करते समय ग्राहकों के अंतिम बिल में 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) और ज्वैलर्स द्वारा लिया जाने वाला मेकिंग चार्ज अलग से जोड़ा जाता है, जिसके कारण विभिन्न शहरों और शोरूमों में अंतिम मूल्य में अंतर देखने को मिलता है।
वायदा बाजार बनाम हाजिर बाजार: MCX पर दिखा उतार-चढ़ाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कारोबारी सत्र में जबरदस्त उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में भारी मुनाफावसूली के चलते 24 कैरेट सोना 1,224 रुपये टूटकर 1,51,117 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक फिसल गया था, किंतु देर शाम निचले भावों पर घरेलू संस्थागत लिवाली लौटने से कीमतों में मजबूत सुधार देखा गया।
इसी प्रकार दिसंबर वायदा चांदी में भी तीव्र हलचल दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी एक समय 3,186 रुपये लुढ़ककर 2,30,913 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गई थी, जिसके बाद औद्योगिक मांग के सहारे इसमें वापसी हुई और यह 2.34 लाख रुपये के स्तर को पुनः छूने में सफल रही। वायदा बाजार में सौदों की अवधि और हाजिर बाजार में भौतिक धातु की डिलीवरी लागत के चलते दोनों बाजारों के भावों में स्वाभाविक अंतर बना रहता है।
वैश्विक बाजार का रुख: डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व का पेच
वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,339.46 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा, जबकि हाजिर चांदी 63.80 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज की गई। हालांकि, दैनिक स्तर पर मामूली उछाल के बावजूद साप्ताहिक आधार पर सोना और चांदी दोनों ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 3 प्रतिशत के घाटे में बंद हुए हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार बने हुए मुद्रास्फीति दबावों के कारण वित्तीय बाजार इस बात की 67 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रख सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती और डॉलर के मजबूत रुख के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने-चांदी में संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली देखने को मिली है।
पश्चिम एशिया का संकट और कच्चे तेल के उछाल का दोहरा असर
पारंपरिक रूप से युद्ध, भू-राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय सोने को सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य टकराव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरों ने सोने को निचले स्तरों पर ठोस सहारा दिया है।
दूसरी ओर कच्चे तेल के 104 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाने से दुनिया भर में ईंधन आधारित महंगाई बढ़ने का जोखिम गहरा गया है। यदि ऊर्जा की लागत बढ़ने से वैश्विक मुद्रास्फीति अनियंत्रित होती है, तो केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक नीतियां जारी रखनी पड़ेंगी। यही कारण है कि सुरक्षित निवेश की मांग और सख्त ब्याज दरों की आशंका के बीच सोना दोनों तरफ से खिंच रहा है, जिससे कीमतों में कोई एकतरफा दिशा नहीं बन पा रही है।
रुपये में कमजोरी से भारत में सोने की कीमतों को मिला सहारा
भारत अपनी कुल सोने की मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी बाजारों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब सोने के दाम गिरते हैं, तब घरेलू बाजार में भी राहत मिलनी चाहिए, किंतु विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये के 95.46 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड कमजोर स्तर पर रहने से स्थिति बदल गई है।
डॉलर महंगा होने के कारण भारतीय आयातकों को सोना मंगाने के लिए अधिक घरेलू मुद्रा चुकानी पड़ रही है। इस आयातित लागत के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट का पूरा लाभ भारतीय खुदरा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है और घरेलू बाजार में कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब टिकी हुई हैं।
खरीदारी से पूर्व बीआईएस हॉलमार्क और मेकिंग चार्ज का रखें ध्यान
त्योहारी और वैवाहिक सीजन की शुरुआत से पहले आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। किसी भी आभूषण को खरीदते समय उस पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का 6 अंकों वाला एचयूआईडी (HUID) हॉलमार्क कोड अवश्य जांचें। 22 कैरेट आभूषण पर ‘916’ का अंक शुद्धता का वैधानिक प्रमाण होता है।
इसके अतिरिक्त बिलिंग के समय सोने का शुद्ध वजन, उस दिन का प्रति ग्राम बेस रेट, मेकिंग चार्ज और 3 प्रतिशत जीएसटी अलग-अलग मदों में अंकित होना चाहिए। चूंकि अलग-अलग ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज में 8 से 25 प्रतिशत तक का अंतर हो सकता है, इसलिए खरीदारी से पहले दो से तीन प्रतिष्ठित दुकानों के मेकिंग चार्ज और री-सेल पॉलिसी की तुलना करना ग्राहकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद रहता है।
Gold-Silver Price 12 September 2026: निष्कर्ष
12 सितंबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू मुद्रा के दबाव के बीच संवेदनशील मोड़ पर बनी हुई हैं। अल्पावधि में बाजार के किसी एक निश्चित स्तर पर स्थिर होने के संकेत नहीं हैं क्योंकि अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और मध्य पूर्व का तनाव लगातार बाजार की दिशा बदल रहे हैं। आभूषण खरीदारों और निवेशकों दोनों के लिए यही उचित रणनीति होगी कि वे एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से अपनी जरूरत पूरी करें और स्थानीय सराफा संघ द्वारा प्रमाणित दैनिक दरों की पुष्टि करने के बाद ही कोई निर्णय लें।
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