Mahindra XEV 9S and XEV 9e: BaaS मॉडल लागू, ₹8 लाख तक सस्ती हुईं प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें, जानिए बैटरी रेंटल और नई कीमतें

बैटरी किराये के मॉडल से XEV 9S और 9e की शुरुआती कीमत में ₹8 लाख तक की कटौती

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Mahindra XEV 9S and XEV 9e: प्रमुख भारतीय वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ने घरेलू बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ाने और शुरुआती खरीद लागत को घटाने के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने अपने महत्वाकांक्षी ‘इलेक्ट्रिक ओरिजिन’ पोर्टफोलियो की दोनों फ्लैगशिप इलेक्ट्रिक एसयूवी—महिंद्रा XEV 9S और महिंद्रा XEV 9e पर बैटरी-एज-ए-सर्विस (BaaS) प्रोग्राम आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है।
इस नई वित्तपोषण संरचना के तहत ग्राहक वाहन और बैटरी की खरीद लागत को अलग-अलग कर सकते हैं, जिससे दोनों मॉडल्स की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत में सीधे 8 लाख रुपये तक की भारी कमी दर्ज की गई है। भारतीय ईवी बाजार में अधिक खरीद मूल्य (Upfront Cost) को ग्राहकों द्वारा इलेक्ट्रिक कार न चुनने की सबसे बड़ी वजह माना जाता रहा है, जिसे हल करने के लिए महिंद्रा ने अब अपनी पूरी इलेक्ट्रिक एसयूवी रेंज को बास प्रोग्राम के तहत ला खड़ा किया है।

Mahindra XEV 9S and XEV 9e: BaaS के तहत नई कीमतें, 12.65 लाख रुपये से शुरू

महिंद्रा के आधिकारिक मूल्य ढांचे के अनुसार बास स्कीम लागू होने के बाद एक्सईवी 9एस (XEV 9S) के ‘पैक वन अबव’ बेस वेरिएंट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत घटकर मात्र 12.65 लाख रुपये रह गई है। वहीं, कूपे-स्टाइल वाली प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी एक्सईवी 9ई (XEV 9e) के ‘पैक वन’ वेरिएंट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत अब 13.90 लाख रुपये हो गई है।
यदि पारंपरिक खरीद मॉडल से तुलना की जाए, तो बिना बास और बिना चार्जर के एक्सईवी 9एस का मूल एक्स-शोरूम भाव 20.65 लाख रुपये से और एक्सईवी 9ई का 21.90 लाख रुपये से शुरू होता है। इस प्रकार दोनों ही मॉडलों के प्रवेश स्तर पर ग्राहकों को सीधे ₹8,00,000 की नकद बचत का विकल्प मिल रहा है। इसके साथ ही महिंद्रा ने हाल ही में पेश की गई बीई 6 स्पोर्टेक (BE 6 Sporteq) के सभी आठों वेरिएंट्स में भी बास प्रोग्राम का विस्तार कर दिया है, जिसकी शुरुआती कीमत 11.45 लाख रुपये रखी गई है।

बैटरी इस्तेमाल का खर्च और फाइनेंसिंग का गणित

महिंद्रा द्वारा पेश किए गए बास मॉडल के तहत ग्राहकों को बैटरी के उपयोग के लिए 3.75 रुपये प्रति किलोमीटर का प्रभावी उपयोग शुल्क देना होगा। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह दर ₹6,975 की शुरुआती मासिक बैटरी ईएमआई (EMI) और रोजाना औसतन 60 किलोमीटर की ड्राइविंग दूरी के आधार पर तय की गई है।
यह योजना एक ‘डुअल लोन’ (Dual Financing) व्यवस्था पर काम करती है, जिसमें वाहन के ढांचे (बॉडी व मोटर) का लोन अलग बैंक/फाइनेंसर से होता है और बैटरी पैक का लोन अलग चलता है। बैटरी की ईएमआई बैटरी पैक के आकार (59 kWh, 70 kWh या 79 kWh), डाउनपेमेंट और लोन की अवधि के आधार पर परिवर्तित हो सकती है। खरीदारों को यह ध्यान रखना अनिवार्य होगा कि 3.75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर केवल बैटरी के वित्तीय किराए की है; कार को चार्ज करने में आने वाला वास्तविक बिजली खर्च, सर्विसिंग और मरम्मत का खर्च ग्राहक को अलग से वहन करना होगा।

बैटरी-एज-ए-सर्विस मॉडल: भारतीय बाजार में कैसे काम करता है?

इलेक्ट्रिक कार निर्माण में कुल लागत का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा केवल उसके लिथियम-आयन बैटरी पैक का होता है। बास प्रोग्राम में इस बैटरी लागत को मूल इनवॉइस से हटाकर एक वित्तीय सेवा प्रदाता के हवाले कर दिया जाता है। ग्राहक गाड़ी की कम कीमत चुकाकर तुरंत डिलीवरी ले लेता है और बैटरी की लागत को पेट्रोल-डीजल के ईंधन खर्च की तरह हर महीने इस्तेमाल के आधार पर चुकाता है।
भारत में इस अवधारणा की सफल शुरुआत जेएसडब्ल्यू-एमजी मोटर इंडिया ने अपनी इलेक्ट्रिक कार एमजी विंडसर (MG Windsor) के साथ की थी। इसके बाद उद्योग जगत में मांग बढ़ने पर टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, हुंडई, टोयोटा और सिट्रोन जैसी कंपनियों ने भी इस पर विचार किया। महिंद्रा द्वारा अपने मुख्य इलेक्ट्रिक मॉडल्स पर इसे लागू किए जाने के बाद अब घरेलू बाजार में बास मॉडल मुख्यधारा का हिस्सा बन चुका है।

ग्राहकों के लिए वित्तीय लाभ और जरूरी सावधानियां

बास प्रोग्राम का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ यह है कि मध्यमवर्गीय परिवार भी अब 13 से 14 लाख रुपये के बजट में 4.8 मीटर लंबी, 7-सीटर और आधुनिक सुविधाओं वाली फुल-साइज प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी अपने घर ला सकते हैं। एकमुश्त बड़ी पूंजी न फंसने से ग्राहकों का मासिक बजट व्यवस्थित रहता है। इसके अतिरिक्त बैटरी के खराब होने या लंबी अवधि में क्षमता घटने की चिंता भी कम हो जाती है क्योंकि बैटरी वित्तीय साझेदार के अनुबंध से सुरक्षित रहती है।
हालांकि, खरीदारों को अपने दैनिक ड्राइविंग पैटर्न का गहन विश्लेषण करने के बाद ही यह विकल्प चुनना चाहिए। यदि किसी ग्राहक की दैनिक रनिंग बहुत अधिक है, तो 3.75 रुपये प्रति किलोमीटर की दर और चार्जिंग खर्च मिलकर लंबी अवधि में पारंपरिक एकमुश्त खरीद से अधिक हो सकते हैं। इसके अलावा कार को बीच में बेचने या रीसेल करने की स्थिति में दोनों लोन को एक साथ बंद कराने की प्रक्रिया को भी पहले से समझ लेना हितकर होगा।

Mahindra XEV 9S and XEV 9e: इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

महिंद्रा के इस आक्रामक कदम से भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में मूल्य प्रतिस्पर्धा और अधिक तेज होने के आसार हैं। 12 से 14 लाख रुपये के प्राइस ब्रैकेट में अब तक केवल कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक हैचबैक या सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी ही उपलब्ध थीं। महिंद्रा द्वारा इसी बजट में ट्रिपल-स्क्रीन लेआउट, पैनोरेमिक सनरूफ, लेवल-2 ADAS और 500 किमी से अधिक की रेंज देने वाले प्रीमियम मॉडल्स उतारने से प्रतिस्पर्धी ब्रांड्स पर भी अपनी कारों को किफायती बनाने का दबाव बढ़ गया है।

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