Lal Kitab Upay: नौकरी नहीं मिल रही तो करें ये उपाय, करियर की रुकावट दूर करने की मान्यता

शनिवार को कौवों को मीठी रोटी और रोज सूर्य को अर्घ्य देने की मान्यता

0

Lal Kitab Upay: वर्तमान के तीव्र प्रतिस्पर्धात्मक दौर में उच्च शिक्षा और पेशेवर योग्यता के बावजूद युवाओं को मनचाहा रोजगार प्राप्त करने के लिए कड़े संघर्षों से गुजरना पड़ रहा है। कई बार निरंतर आवेदन, दर्जनों साक्षात्कारों (Interviews) और उत्कृष्ट प्रदर्शन के उपरांत भी अंतिम चयन सूची में नाम आने से चूक जाता है। ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति के भीतर हताशा, मानसिक अवसाद और आत्मविश्वास की कमी घर करने लगती है। भारतीय ज्योतिषीय वांग्मय में करियर, आजीविका और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी इन अप्रत्याशित बाधाओं को दूर करने के लिए ‘लाल किताब’ के व्यवहारपरक और सुलभ उपायों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

लाल किताब को पारंपरिक वैदिक ज्योतिष से थोड़ा भिन्न किंतु व्यावहारिक उपायों का एक समृद्ध ग्रंथ माना जाता है, जिसमें जटिल कर्मकांडों के स्थान पर दैनिक जीवन की दिनचर्या, मूक प्राणियों की सेवा और प्रकृति के पंचतत्वों के समन्वय पर आधारित उपाय दिए गए हैं। करियर में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए लाल किताब में मुख्यतः ग्रहों के राजा सूर्य, कर्म के अधिष्ठाता शनि और पराक्रम के कारक मंगल को संतुलित करने से जुड़े तीन प्रमुख विधानों का उल्लेख प्रमुखता से मिलता है।

Lal Kitab Upay: शनिवार को कौवों को मीठी रोटी खिलाने का शास्त्रीय विधान

लाल किताब और सामुद्रिक परंपरा में पक्षियों और पशुओं को ग्रहों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में देखा गया है, जिसमें कौवे को सीधे तौर पर कर्मफलदाता और न्याय के देवता शनि देव का वाहन और प्रतिनिधि माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी जातक की जन्मपत्रिका में शनि की प्रतिकूल दृष्टि, साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा दशम भाव (कर्म भाव) का दोष सक्रिय होता है, तो व्यक्ति की योग्यता के बावजूद उसकी आजीविका में निरंतर विलंब और पदोन्नति में रुकावटें आने लगती हैं।

इस बाधा के निवारण हेतु लाल किताब में प्रत्येक शनिवार को कौवों को मीठी रोटी खिलाने का विधान बताया गया है। घर की रसोई में ताजी बनी गेहूं की रोटी पर शुद्ध घी अथवा सरसों का तेल लगाकर उसके ऊपर थोड़ा सा गुड़ रख दिया जाता है। इसके पश्चात इस मीठी रोटी को किसी खुले स्थान, छत या मुंडेर पर कौवों के सम्मुख श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि मूक पक्षियों द्वारा इस नैवेद्य को ग्रहण करने से कर्म कारक ग्रह शांत होते हैं, आजीविका के मार्ग में आ रहे अदृश्य अवरोध समाप्त होते हैं और व्यक्ति के भीतर सेवा भाव व अनुशासन का संचार होता है।

संकटमोचन हनुमान जी की नियमित आराधना: पराक्रम और आत्मविश्वास की वृद्धि

करियर में निरंतर मिलने वाली असफलताएं अक्सर व्यक्ति के आत्मबल और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देती हैं। लाल किताब के अनुसार मंगल और शनि के संयुक्त संतुलन के लिए भगवान हनुमान जी की उपासना को सर्वोत्तम उपाय माना गया है। लाल किताब में यह रेखांकित किया गया है कि जो साधक निष्कपट मन से पवनपुत्र हनुमान की शरण में जाता है, उसके जीवन से दरिद्रता और भय स्वतः पलायन कर जाते हैं।

बेरोजगारी अथवा नौकरी में अस्थिरता का सामना कर रहे युवाओं को मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से समीपस्थ हनुमान मंदिर जाकर चमेली के तेल और सिंदूर का चोला अर्पित करने का परामर्श दिया जाता है। इसके साथ ही मंदिर में लाल पुष्प, गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाकर कम से कम एक अथवा सात बार ‘हनुमान चालीसा’ और ‘बजरंग बाण’ का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यह साधना जातक के मन से इंटरव्यू का डर दूर कर उसके भीतर अदम्य साहस, वाकपटुता और ओज का संचार करती है।

प्रातःकाल भगवान सूर्य को अर्घ्य: पद-प्रतिष्ठा और प्रशासनिक कृपा की प्राप्ति

वैदिक और लाल किताब दोनों ही परंपराओं में सूर्य देव को नवग्रहों का अधिपति और साक्षात आत्मा का कारक माना गया है। सरकारी नौकरी, उच्च प्रशासनिक पद, सामाजिक प्रतिष्ठा और साक्षात्कार में सकारात्मक प्रभाव छोड़ने के लिए जन्मकुंडली में सूर्य का बलवान होना अनिवार्य शर्त माना जाता है। यदि सूर्य कमजोर हो तो व्यक्ति को अपनी ही मेहनत का श्रेय नहीं मिलता और उच्चाधिकारियों से निरंतर तनाव बना रहता है।

सूर्य की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय स्नानादि से निवृत्त होकर तांबे के पात्र में शुद्ध जल लेना चाहिए। उस जल में एक चुटकी कुमकुम अथवा रोली, अखंडित अक्षत (चावल) और लाल पुष्प डालकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े होना चाहिए। इसके बाद तांबे के पात्र को सिर के समानांतर उठाकर पतली धार के साथ “ॐ घृणि सूर्याय नमः” अथवा गायत्री मंत्र का जप करते हुए जल अर्पित किया जाता है। लाल किताब के अनुसार नियमित रूप से उगते सूर्य को नमन करने से व्यक्ति की ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहता है और करियर के क्षेत्र में नए व प्रतिष्ठित अवसरों का सृजन होता है।

पक्षियों को सप्तधान्य और चींटियों को दाना: लाल किताब के अन्य अनुभूत उपाय

लाल किताब में केवल व्यक्तिगत पूजा-अर्चना तक ही सीमित उपाय नहीं हैं, बल्कि इसमें संपूर्ण सृष्टि के साथ तादात्म्य स्थापित करने पर बल दिया गया है। करियर और व्यापार में अटके हुए कार्यों को गति देने के लिए प्रतिदिन पक्षियों को ‘सप्तधान्य’ यानी सात प्रकार के मिले-जुले अनाज (गेहूं, जौ, चना, बाजरा, मक्का, चावल और मूंग) डालने की परंपरा भी अत्यंत प्रचलित है। ऐसा करने से कुंडली के सातों मुख्य ग्रहों के अनिष्ट प्रभाव क्षीण होते हैं।

इसके अतिरिक्त किसी शांत वृक्ष, विशेषकर पीपल अथवा वटवृक्ष की जड़ के समीप काली चींटियों के लिए थोड़ा सा सूखा आटा और पिसी हुई चीनी (कसार) डालना भी अत्यंत शुभकारी माना जाता है। शास्त्रों में मान्यता है कि भूमि पर रेंगने वाले सूक्ष्म जीवों को भोजन उपलब्ध कराने से जातक के पूर्व जन्मों के ऋण और प्रारब्ध जनित दोष समाप्त होते हैं, जिससे रोजगार के नवीन द्वार खुलते हैं। घर से किसी महत्वपूर्ण परीक्षा या इंटरव्यू के लिए प्रस्थान करते समय मस्तक पर केसर अथवा श्वेत चंदन का तिलक लगाना भी मानसिक शांति और अनुकूलता प्रदान करता है।

Lal Kitab Upay: उपायों में निरंतरता का महत्व और व्यावहारिक तैयारी का संतुलन

लाल किताब के विधानों में किसी भी उपाय को पूर्ण निष्ठा, शुचिता और निरंतरता के साथ करने पर विशेष बल दिया गया है। आमतौर पर लाल किताब के उपाय लगातार 40 से 43 दिनों तक बिना किसी नागा (खंडन) के करने की परंपरा बताई जाती है। यदि किसी कारणवश बीच में क्रम टूट जाए, तो उसे नए सिरे से प्रारंभ करने का नियम है। इन उपायों को करते समय मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष अथवा छल-कपट का भाव नहीं होना चाहिए।

हालांकि, ज्योतिष मनीषी और आधुनिक करियर परामर्शदाता इस तथ्य पर एकमत हैं कि इन उपायों को कभी भी व्यक्तिगत परिश्रम और व्यावहारिक प्रयासों का विकल्प नहीं माना जा सकता। नौकरी पाने के लिए अपने विषय का गहन ज्ञान, अद्यतन रिज्यूमे तैयार करना, संचार कौशल (Communication Skills) को निखारना और लगातार नए अवसरों की खोज करना ही मूल आधार है। लाल किताब के ये उपाय साधक को मानसिक संबल, सकारात्मक दृष्टिकोण और आंतरिक एकाग्रता प्रदान करने में सहायक हो सकते हैं, किंतु इन आध्यात्मिक प्रयासों के साथ कर्मक्षेत्र में अपनी संपूर्ण ऊर्जा झोंकना ही स्थायी सफलता का एकमात्र सुनिश्चित मार्ग है।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.