Jharkhand JPSC JSSC protest: JPSC-JSSC छात्र आंदोलन में बड़ा मोड़, 14 दिन के अनशन के बाद सरकार से डेढ़ घंटे चली वार्ता बेनतीजा, 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर संशय
14 दिन के अनशन के बाद छात्रों से डेढ़ घंटे चली बैठक, 10 अगस्त के घेराव पर संशय
Jharkhand JPSC JSSC protest: झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और व्यापक अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 14 दिनों से लगातार खुले आसमान के नीचे जारी धरना और बेमुद्दत अनशन के बाद आखिरकार राज्य सरकार और प्रदर्शनकारी छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का द्वार खुला।
प्रशासन द्वारा समिति के गठन पर दर्ज कराई गई आपत्तियों का निवारण करने के बाद शुक्रवार देर शाम दोनों पक्षों के बीच लगभग डेढ़ घंटे तक मैराथन चर्चा हुई। इस बैठक में राज्य सरकार के चार प्रमुख मंत्रियों ने भाग लिया और छात्रों का विस्तृत मांग पत्र प्राप्त किया। हालांकि, वार्ता के इस पहले चरण में परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने जैसी मुख्य मांगों पर कोई अंतिम ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन न मिलने के कारण 10 अगस्त को प्रस्तावित ‘झारखंड विधानसभा घेराव’ कार्यक्रम को लेकर संशय पूरी तरह बना हुआ है। छात्र संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
Jharkhand JPSC JSSC protest: आपत्तियों और गतिरोध के बीच शुरू हुई वार्ता, छात्र समिति से 3 गैर-छात्रों को हटाया गया
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में दो हफ्तों से जारी आंदोलन और अनशनकारियों की गिरती सेहत को देखते हुए राज्य सरकार ने छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की। इसके तहत प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की ओर से सरकार के साथ टेबल टॉक के लिए 11 सदस्यों की एक विशेष प्रतिनिधिमंडल समिति का गठन किया गया था।
वार्ता की शुरुआत में प्रशासनिक अधिकारियों और राज्य सरकार ने इस प्रतिनिधिमंडल की संरचना पर तकनीकी आपत्ति जताई। सरकार का तर्क था कि समिति में अभ्यर्थियों के अलावा तीन ऐसे व्यक्ति शामिल थे जो सीधे तौर पर छात्र या परीक्षार्थी नहीं थे। इस गतिरोध को दूर करने के लिए छात्र नेताओं ने त्वरित और परिपक्व फैसला लेते हुए तीनों गैर-छात्रों को समिति से तत्काल प्रभाव से अलग कर दिया। इसके बाद केवल 8 शुद्ध छात्र प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए अधिकृत किया गया। इस बदलाव के बाद शाम साढ़े सात बजे स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार और छात्रों के बीच बहुप्रतीक्षित औपचारिक बैठक शुरू हुई जो रात 9 बजे तक चली।
डेढ़ घंटे चली मैराथन बैठक में छात्र प्रतिनिधियों ने सौंपा मांग पत्र, कहा आदेश मिलने तक जारी रहेगा सत्याग्रह
स्टेट गेस्ट हाउस में हुई इस महत्वपूर्ण वार्ता में छात्रों के 8 सदस्यीय दल ने सरकार के मंत्रियों के समक्ष अपनी विस्तृत शिकायतें और मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में आयोग द्वारा आयोजित की जा रही कई परीक्षाओं में पारदर्शिता की भारी कमी देखी गई है, जिससे राज्य के लाखों मेधावी युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
छात्र प्रतिनिधियों ने मंत्रियों के समक्ष मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखीं। उन्होंने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित अन्य सभी संदेहास्पद परीक्षाओं को तुरंत रद्द करने की मांग की। इसके अलावा, पूरे भर्ती घोटाले की सीबीआई या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य के लिए परीक्षा आयोगों की संरचनात्मक रीमॉडलिंग करने का आग्रह किया गया। छात्र प्रतिनिधि रविंद्र पासवान ने वार्ता के बाद संवाददाताओं से कहा कि मंत्रियों ने उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनी हैं और मुख्यमंत्री को अवगत कराने का आश्वासन दिया है, लेकिन जब तक मांगों पर ठोस सरकारी आदेश जारी नहीं होता, तब तक अनशन और आंदोलन जारी रहेगा।
मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को सौंपी वार्ता की विस्तृत रिपोर्ट, दूसरे दौर की बातचीत के दिए स्पष्ट संकेत
वार्ता में सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों के पैनल शामिल था। इसमें मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री चमरा लिंडा और मंत्री संजय कुमार प्रसाद मौजूद रहे। बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद चारों मंत्री सीधे कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। मंत्रियों ने अभ्यर्थियों के साथ हुई डेढ़ घंटे की बातचीत के प्रत्येक बिंदु से मुख्यमंत्री को विस्तार से अवगत कराया।
बैठक के संबंध में जानकारी देते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि छात्रों के साथ बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई है। उन्होंने कहा कि छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ तकनीकी, कानूनी और प्रक्रियात्मक विषय उठा रहे हैं। सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इन तकनीकी पहलुओं पर अगले दिन अपना बिंदुवार लिखित दस्तावेज और सुझाव प्रस्तुत करें। मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि छात्रों की सभी जिज्ञासाओं का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता आयोजित की जा सकती है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तोड़ी चुप्पी, कहा युवाओं के सुझाव से लाएंगे परीक्षा प्रणाली में व्यापक और ऐतिहासिक सुधार
राज्य में गहराते छात्र असंतोष के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार राज्य के युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और छात्रों के हित में काम करने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के दरवाजे आंदोलनरत युवाओं के लिए हमेशा खुले हैं और उनकी हर वास्तविक समस्या को पूरी गंभीरता से समझा जा रहा है।
मुख्यमंत्री सोरेन ने घोषणा की कि सरकार केवल वर्तमान मांगों के तात्कालिक समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्य की पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू करेगी। इसके लिए केवल रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी 24 जिलों के परीक्षार्थियों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर एक समयबद्ध और फूलप्रूफ भर्ती नीति तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में कभी भी किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता पर उंगलियां न उठ सकें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूर्व में हुई अनियमितताओं की सीआईडी जांच जारी है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
10 अगस्त को प्रस्तावित झारखंड विधानसभा घेराव कार्यक्रम पर सस्पेंस, 750 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू
सरकार द्वारा दिए जा रहे मौखिक आश्वासनों और संवाद के प्रयासों के बावजूद, आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का रुख अभी भी काफी कड़ा बना हुआ है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्रों का कहना है कि वे पिछले 14 दिनों से शारीरिक और मानसिक कष्ट सह रहे हैं, इसलिए वे केवल खोखले आश्वासनों के आधार पर अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे। यदि 10 अगस्त से पहले सरकार की ओर से कोई ठोस नीतिगत फैसला या अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो वे पूर्व घोषित रणनीति के तहत झारखंड विधानसभा का ऐतिहासिक घेराव करेंगे।
गौरतलब है कि 6 अगस्त से झारखंड विधानसभा का मानसूनी सत्र शुरू हो चुका है, जो 12 अगस्त तक चलना निर्धारित है। सत्र के दौरान छात्रों के घेराव प्रदर्शन और संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए रांची जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त के आदेश पर विधानसभा परिसर के 750 मीटर के दायरे में 6 अगस्त से 12 अगस्त तक के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की प्रासंगिक धाराओं (पूर्व में धारा 144) के तहत सख्त निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इसके तहत किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, जुलूस और हथियार लेकर चलने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
Jharkhand JPSC JSSC protest: अनशन स्थल पर गहराने लगा स्वास्थ्य संकट, राजनीतिक दलों के बढ़ते दबाव से सरकार के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ जहां प्रशासनिक स्तर पर बैठकों और निषेधाज्ञा का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ 14 दिनों से खुले आसमान के नीचे जारी इस सत्याग्रह के कारण अनशनकारी छात्रों का स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है। बारिश, धूप और उमस भरे मौसम के बीच अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो और राहुल क्रांति सहित कई अभ्यर्थियों की शारीरिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, लेकिन लगातार अनशन के कारण शरीर में पानी की कमी और कमजोरी बढ़ती जा रही है।
इस बीच, विधानसभा के जारी मानसून सत्र में विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। विपक्ष परीक्षा में धांधली को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सदन के भीतर और बाहर सरकार पर हमलावर है। ऐसे में हेमंत सोरेन सरकार के सामने एक तरफ तो अनशनकारी छात्रों की सेहत की रक्षा करते हुए कूटनीतिक समाधान निकालने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ सड़क से लेकर सदन तक बन रहे राजनीतिक दबाव से निपटने की बड़ी जिम्मेदारी है। अब सभी की निगाहें सरकार और छात्रों के बीच होने वाले दूसरे दौर की बातचीत पर टिकी हैं।
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