Jharkhand News: झारखंड में मेडिकल शिक्षा होगी डिजिटल, 14.40 करोड़ की लागत से बनेगा JDEMP प्लेटफॉर्म
Jharkhand News: झारखंड में मेडिकल शिक्षा होगी डिजिटल, 14.40 करोड़ की लागत से बनेगा JDEMP प्लेटफॉर्म
Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य की मेडिकल और स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा को एक डिजिटल ढांचे में लाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने झारखंड डिजिटल मेडिकल एजुकेशन प्लेटफॉर्म (JDEMP) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर 14 करोड़ 40 लाख 65 हजार 126 रुपये खर्च होंगे। धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) समेत राज्य के मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, आयुष, पैरामेडिकल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के छात्र व शिक्षक इसके दायरे में आएंगे।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से 6 अक्टूबर को जारी स्वीकृति पत्र में साफ किया गया है कि यह मंच सिर्फ ऑनलाइन क्लास तक सीमित नहीं रहेगा। छात्र के रजिस्ट्रेशन से लेकर इंटर्नशिप तक की पूरी अकादमिक यात्रा एक सिस्टम में दर्ज होगी। विभाग का कहना है कि इससे रिकॉर्ड रखने, परीक्षा प्रक्रिया और निगरानी में पारदर्शिता बढ़ेगी।
Jharkhand News: JDEMP प्लेटफॉर्म पर छात्रों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?
स्वीकृति के मुताबिक प्लेटफॉर्म पर छात्र का रजिस्ट्रेशन, काउंसलिंग, नामांकन, पाठ्यक्रम, कक्षा, उपस्थिति, मूल्यांकन, परीक्षा, रिजल्ट और प्रमाणपत्र एक जगह जुड़ेंगे। इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग की जानकारी भी डिजिटल रूप में रहेगी। SNMMCH जैसे कॉलेजों के छात्रों को ई-लाइब्रेरी, डिजिटल अध्ययन सामग्री, लाइव और रिकॉर्डेड कक्षाएं तथा विशेषज्ञ शिक्षकों के संसाधन एक ही जगह मिलने की उम्मीद है।
आगे चलकर वर्चुअल स्किल लैब और सिमुलेशन सुविधाएं भी जोड़ी जा सकती हैं। इसका मतलब यह है कि छात्र केवल अपने कॉलेज की कक्षा या पुस्तकालय पर निर्भर नहीं रहेंगे। परीक्षा और नतीजे डिजिटल होने से रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा और केंद्रीय अकादमिक प्रोफाइल तैयार होगी। दूरदराज के संस्थानों के छात्र भी विशेषज्ञ सामग्री तक पहुंच सकेंगे।
शिक्षकों और विभाग का प्रबंधन कैसे केंद्रीकृत होगा?
JDEMP के जरिये फैकल्टी, विभाग, पाठ्यक्रम और अकादमिक कैलेंडर का एकीकृत प्रबंधन होगा। राज्य के उन कॉलेजों को फायदा मिल सकता है, जहां विशेषज्ञ शिक्षक कम हैं। विभाग को रियल टाइम डैशबोर्ड और डेटा एनालिटिक्स की सुविधा मिलेगी, जिससे अलग-अलग संस्थानों की पढ़ाई और प्रदर्शन पर नजर रखी जा सकेगी। आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में भी आसानी होगी।
अधिकारियों का मानना है कि एक ही सिस्टम में जानकारी रहने से दोहराव घटेगा और छात्र के पूरे शैक्षणिक इतिहास को ट्रैक करना सरल होगा। क्लिनिकल ट्रेनिंग की निगरानी भी डिजिटल माध्यम से हो सकेगी, जो मेडिकल शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है।
परियोजना कितने चरणों में और कितने समय में पूरी होगी?
प्लेटफॉर्म को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। पहले तीन महीनों में जरूरत का आकलन, अध्ययन, डिजाइन और तकनीकी ढांचा बनाया जाएगा। अगले छह महीनों में कोर मॉड्यूल विकसित होंगे। उसके बाद के छह महीनों में बाकी मॉड्यूल पर काम होगा। इसके पश्चात 24 महीनों में रोलआउट, संचालन और रखरखाव चलेगा। पूरी परियोजना की अनुमानित अवधि पांच वर्ष रखी गई है।
इस क्रम में पहले बुनियादी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी, फिर मूल्यांकन, प्रमाणपत्र और ट्रेनिंग मॉड्यूल जुड़ेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा सर्विस प्रोवाइडर के चयन और तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगी।
Jharkhand News: सर्विस प्रोवाइडर का चयन किस प्रक्रिया से होगा?
JDEMP के लिए सर्विस प्रोवाइडर का चुनाव टेंडर या आरएफपी प्रक्रिया से होगा। यह काम संबंधित सरकारी एजेंसी के माध्यम से पूरा किया जाएगा, जो झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट से जुड़ी है। स्वीकृति पत्र में लागत और कार्यक्षेत्र दोनों तय किए गए हैं, ताकि बाद में दायरा स्पष्ट रहे।
टेंडर प्रक्रिया के बाद चुनी गई संस्था को डिजाइन, विकास, रोलआउट और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। विभाग का जोर इस बात पर है कि सिस्टम राज्य के सभी स्वास्थ्य विज्ञान संस्थानों के साथ जुड़ सके और डेटा सुरक्षित रहे।
Jharkhand News: SNMMCH और अन्य संस्थानों को इसका व्यावहारिक लाभ क्या होगा?
धनबाद के SNMMCH के छात्रों को पढ़ाई की सामग्री, कक्षा और रिकॉर्ड एक प्लेटफॉर्म पर मिलेंगे। राज्य के नर्सिंग, आयुष और पैरामेडिकल कॉलेज भी इसी व्यवस्था में शामिल होंगे। दूर के संस्थानों तक गुणवत्तापूर्ण डिजिटल कंटेंट पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। परीक्षा प्रक्रिया डिजिटल होने से नतीजे और प्रमाणपत्र जारी करने में देरी घट सकती है।
विभाग के अनुसार केंद्रीय रिकॉर्ड से छात्र को एक संस्थान से दूसरे में जानकारी स्थानांतरित करने में आसानी होगी। इंटर्नशिप की प्रगति भी ट्रैक की जा सकेगी। यह पहल मेडिकल शिक्षा को कागज आधारित प्रक्रिया से निकालकर एकीकृत डिजिटल सिस्टम में लाने की दिशा में पहला बड़ा कदम मानी जा रही है। क्रियान्वयन के बाद ही यह साफ होगा कि कॉलेजों और छात्रों को कितनी जमीनी राहत मिलती है।
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