Rahul Gandhi Protest: राहुल-प्रियंका आकाशवाणी भवन कैसे पहुंचे? पूरा घटनाक्रम

EC तक मार्च रोके जाने के बाद राहुल-प्रियंका आकाशवाणी भवन पहुंचे, घंटों चला धरना

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Rahul Gandhi Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को उस समय बेहद नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा निर्वाचन सदन के निकट स्थित आकाशवाणी भवन परिसर के भीतर दाखिल हो गए। संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक जाने के लिए निकले इस मार्च को पुलिस ने बीच में ही रोक दिया था। इसके बाद राहुल गांधी द्वारा अचानक रणनीति बदले जाने से आकाशवाणी भवन का परिसर दिनभर के राजनीतिक धरने और भारी सुरक्षा टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया।

Rahul Gandhi Protest: संसद के मकर द्वार से निकला विपक्षी सांसदों का मार्च

मंगलवार सुबह विपक्षी दलों के 200 से अधिक सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) की ओर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च शुरू किया। सांसदों के हाथों में तिरंगा, बैनर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लिखे तख्तियां थीं। विपक्ष का मुख्य आरोप था कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और फॉर्म-6 के प्रारूप में बदलाव करके चुनावी पारदर्शिता को खत्म कर रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग और सत्तापक्ष ने इन सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए प्रक्रिया को सर्वसम्मत और पारदर्शी बताया था।

नीति आयोग के पास पुलिस ने रोका मार्च, बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी

जैसे ही विपक्षी सांसदों का जुलूस संसद मार्ग होते हुए नीति आयोग और परिवहन भवन के नजदीक पहुंचा, दिल्ली पुलिस ने भारी लोहे के बैरिकेड्स लगाकर रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया। निर्वाचन सदन यहां से महज 200 से 250 मीटर की दूरी पर था।
पुलिस ने सांसदों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई प्रमुख नेताओं को पुलिस बसों में बैठा दिया गया। इसी खींचतान के बीच राहुल गांधी स्टील बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए और तिरंगा लहराते हुए सुरक्षा घेरे के पार जाने का प्रयास करने लगे।

रणनीति में बदलाव: कैसे हुई आकाशवाणी भवन में एंट्री?

जब विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों में भरा जा रहा था, तब प्रियंका गांधी वाड्रा को भी एक डिटेंशन बस में बैठाया गया था। राहुल गांधी ने बस की खिड़की के पास जाकर प्रियंका गांधी से संक्षिप्त बातचीत की। इसके तुरंत बाद राहुल गांधी ने अचानक आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट (गेट नंबर 3/4) की ओर दौड़ लगा दी।
मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और पुलिस बल ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे वहां तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि, अपने निजी सुरक्षा घेरे के साथ राहुल गांधी संकरे पैदल मार्ग से होते हुए परिसर के भीतर दाखिल होने में सफल रहे। इसी बीच प्रियंका गांधी भी पुलिस बस से नीचे उतरकर तेजी से गेट पार कर अपने भाई के साथ जा मिलीं। कुछ ही देर में केसी वेणुगोपाल, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, पवन खेड़ा और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई अन्य कांग्रेस नेता भी अंदर पहुंच गए।

पेड़ के नीचे बिछी चटाई: आकाशवाणी परिसर में 9 घंटे का धरना

आकाशवाणी भवन के खुले लॉन में एक पेड़ के नीचे चटाई बिछाकर राहुल और प्रियंका गांधी धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी ने घोषणा की कि वे तब तक परिसर से बाहर नहीं जाएंगे जब तक चुनाव आयोग विपक्षी सांसदों से मिलने का समय नहीं देता।
दिनभर चले इस धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए पानी, जूस और अल्पाहार की व्यवस्था की गई। शाम होते-होते इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात रहा। राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि देश के 300 सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलकर सवाल पूछना चाहते हैं, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जवाबदेही से भाग रहे हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष और प्रोटोकॉल विवाद

इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि विपक्षी सांसदों की ओर से बैठक का कोई पूर्व निर्धारित समय नहीं लिया गया था। आयोग के अनुसार, दोपहर बाद दिल्ली पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि 240 सांसद संसद एनेक्सी भवन में बैठक करना चाहते हैं।
चुनाव आयोग ने इस मांग को नियमों और प्रोटोकॉल के खिलाफ बताया, क्योंकि किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात आयोग अपने मुख्यालय परिसर (निर्वाचन सदन) के भीतर ही करता है। आयोग ने ज्ञापन स्वीकार करने के लिए अपने वरिष्ठतम अधिकारियों को भेजने की पेशकश की थी, जिसे विपक्षी नेताओं ने ठुकरा दिया और सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग पर अड़े रहे।

Rahul Gandhi Protest: रात में पुलिस की कार्रवाई और नेताओं की रिहाई

लगातार मान-मनौव्वल और परिसर खाली करने के पुलिस के अनुरोध को जब विपक्षी नेताओं ने मानने से इनकार कर दिया, तो करीब 9 घंटे के गतिरोध के बाद रात लगभग 9:30 बजे दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
महिला पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों ने घेरा बनाकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को आकाशवाणी भवन से बाहर निकाला और सरकारी वाहनों में बैठाकर न्यू पुलिस लाइंस, किंग्सवे कैंप ले जाया गया। पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति के संवेदनशील सरकारी प्रसारण परिसर पर कब्जा करने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के कारण उन्हें हटाना जरूरी था। किंग्सवे कैंप में कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद देर रात सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
आकाशवाणी भवन का यह नाटकीय धरना भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों के तेवर आने वाले दिनों में और आक्रामक होने के स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

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