ITLA को कैबिनेट की मंजूरी: सड़क, रेल, पोर्ट और एयरपोर्ट की एक साथ होगी प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर बड़ा फोकस

कैबिनेट ने ITLA को SPV के रूप में मंजूरी दी, 500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन पर रहेगा फोकस

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ITLA Cabinet Approval: देश के परिवहन और लॉजिस्टिक्स ढांचे को आधुनिक, एकीकृत और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। इसे एक विशेष प्रयोजन वाहन यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक निर्णय का मुख्य उद्देश्य सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग और शहरी परिवहन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एक मंच पर लाकर उनके बीच निर्बाध समन्वय स्थापित करना है।

ITLA Cabinet Approval: क्या है ITLA और क्यों महसूस हुई इसकी आवश्यकता?

वर्तमान व्यवस्था में भारत का परिवहन क्षेत्र विभिन्न मंत्रालयों और स्वायत्त एजेंसियों के अंतर्गत अलग-अलग काम करता है। कई बार विभागों के बीच समन्वय की कमी के चलते बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में दोहराव, अनावश्यक देरी और बजट में वृद्धि देखने को मिलती थी। ITLA इसी बिखरी हुई व्यवस्था को समाप्त कर एकीकृत योजना तैयार करने का काम करेगा। सरकार इस नई संस्था को परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए शीर्ष नीतिगत थिंक-टैंक, अनुसंधान केंद्र, परियोजना मूल्यांकनकर्ता और डेटा एनालिटिक्स हब के रूप में विकसित कर रही है, जिससे बुनियादी ढांचे का संपूर्ण विकास एक तय दिशा में हो सके।

10 वर्ष से अधिक का व्यापक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान

ITLA की प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजना तैयार करना होगी। इसके अंतर्गत 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि को ध्यान में रखते हुए नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस मास्टर प्लान में राष्ट्रीय राजमार्गों, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल, गहरे समुद्री बंदरगाहों, हवाई अड्डों, तटीय शिपिंग और अंतर्देशीय जलमार्गों को आपस में जोड़ा जाएगा। इसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसा मल्टी-मॉडल नेटवर्क तैयार करना है, जहां माल या यात्रियों का एक साधन से दूसरे साधन में ट्रांसफर बेहद सुगम और कम खर्चीला हो सके।

पांच वर्षीय और वार्षिक सेक्टोरल योजनाओं की होगी समीक्षा

यह नई अथॉरिटी केवल दीर्घकालिक योजनाओं तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके पास निरंतर निगरानी के अधिकार भी होंगे। ITLA संबंधित परिवहन मंत्रालयों की पांच-वर्षीय क्षेत्रीय योजनाओं और वार्षिक कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा करेगी। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि विभिन्न मंत्रालयों की व्यक्तिगत परियोजनाएं राष्ट्रीय मास्टर प्लान के लक्ष्यों के साथ मेल खा रही हैं या नहीं। इससे मंत्रालयों के बीच योजनाओं का टकराव रुकेगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।

500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन

केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की लागत वाली सभी प्रमुख परिवहन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का गहन तकनीकी मूल्यांकन ITLA द्वारा किया जाएगा। हालांकि, परियोजनाओं की वित्तीय मंजूरी पूर्ववत मौजूदा व्यवस्था और वित्त मंत्रालय के नियमों के तहत ही होगी। इसके अलावा, परियोजना के निर्माण चरण की वास्तविक निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और निर्माण पूरा होने के बाद उसके आर्थिक व सामाजिक प्रभाव का आकलन (पोस्ट-कंप्लीशन असेसमेंट) भी इसी प्राधिकरण के दायरे में आएगा।

GST ई-वे बिल और FASTag डेटा से लैस होगा नेशनल डेटा रिपोजिटरी

ITLA के तहत एक अत्याधुनिक नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपोजिटरी (NTDR) की स्थापना की जाएगी। यह रिपोजिटरी देश भर के डिजिटल परिवहन तंत्र से डेटा एकत्र करेगी। इसमें जीएसटी नेटवर्क (GSTN) के ई-वे बिल, टोल प्लाजा के FASTag आंकड़े, वाहन एवं सारथी पोर्टल, जीपीएस ट्रैकिंग डेटा और प्रमुख शहरों के इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का डेटा शामिल होगा। इस डेटा के गहन विश्लेषण से देश भर में माल ढुलाई के प्रवाह, बॉटलनेक (जाम वाले क्षेत्र) और भविष्य की मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा, जिससे नीतियां साक्ष्यों और वास्तविक आंकड़ों पर आधारित होंगी।

ITLA Cabinet Approval: लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और विकसित भारत@2047 का विजन

भारत में वर्तमान में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 8 से 9 प्रतिशत के बीच लाने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न परिवहन माध्यमों के एकीकरण से देश के भीतर माल ढुलाई की लागत और समय में भारी कमी आने की उम्मीद है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। ITLA राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के क्रियान्वयन, आपूर्ति श्रृंखला में नवाचार, अनुसंधान और लॉजिस्टिक्स पेशेवरों के कौशल विकास को भी गति देगा। सरकार ने इस पहल को ‘विकसित भारत@2047’ के व्यापक राष्ट्रीय संकल्प की एक मजबूत आधारशिला बताया है।

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