Motor Insurance पर IRDAI का बड़ा प्रस्ताव! अब डीलर के अलावा मिलेंगे विकल्प, कमीशन और कैशलेस क्लेम में बदलाव संभव

Motor Insurance पर IRDAI का बड़ा प्रस्ताव! अब डीलर के अलावा मिलेंगे विकल्प, कमीशन और कैशलेस क्लेम में बदलाव संभव

0

IRDAI के मोटर इंश्योरेंस प्रस्ताव से वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को बीमा चुनने के ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री व्यवस्था और कमीशन मॉडल में बदलाव को लेकर कई प्रस्ताव रखे हैं। इनका मकसद ग्राहकों को खरीदारी के समय ज्यादा विकल्प और कीमतों की साफ जानकारी देना है। अभी नई कार या बाइक खरीदते समय ज्यादातर ग्राहक उसी डीलर से बीमा ले लेते हैं, जहां से वाहन खरीदा जाता है। प्रस्ताव में डिजिटल प्लेटफॉर्म, कैशलेस रिपेयर और कमीशन की सीमा से जुड़े अहम बदलावों की बात है। हालांकि ये अंतिम नियम नहीं हैं। सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं।

IRDAI: मौजूदा व्यवस्था पर नियामक की चिंता

मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसियों और उनकी कीमतों की तुलना करना हर ग्राहक के लिए आसान नहीं होता। इसी वजह से डीलर के जरिए बीमा लेना कई बार सबसे आसान रास्ता बन जाता है।

नियामक ने इसी व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मोटर इंश्योरेंस के वितरण और कमीशन से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया है। प्रस्तावों का केंद्र ग्राहक के पास ज्यादा विकल्प और पारदर्शिता पहुंचाना है।

कमीशन के आंकड़े: 13 से 50 प्रतिशत तक

प्रस्ताव में मोटर इंश्योरेंस की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन को लेकर चिंता जताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अलग-अलग मामलों में कमीशन 13 से 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि औसत करीब 24 प्रतिशत बताया गया है। नए और पुराने वाहनों से जुड़े कुछ वितरण माध्यमों में यह करीब 24 प्रतिशत और कुछ मामलों में 31 प्रतिशत तक है।

वित्त वर्ष 2025 में इन माध्यमों से करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया गया। इसमें से करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में गए। प्रस्ताव में सवाल उठाया गया है कि अपेक्षाकृत सरल मोटर इंश्योरेंस उत्पादों में इतनी ऊंची कमीशन लागत उचित है या नहीं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्यूआर कोड का प्रस्ताव

ग्राहकों को डीलर के अलावा दूसरे माध्यम देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मोटर इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसमें मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशन आधारित प्लेटफॉर्म और बीमा से जुड़े डिजिटल माध्यमों की भूमिका हो सकती है। इससे ग्राहक अलग-अलग पॉलिसियों तक सीधे पहुंच बना सकेगा।

प्रस्ताव के अनुसार डीलरों को ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकल्प और क्यूआर कोड साफ तौर पर दिखाना पड़ सकता है। इससे ग्राहक को पता चलेगा कि बीमा सिर्फ डीलर के जरिए लेना जरूरी नहीं है।

वाहन लोन और पुरानी गाड़ियों के बीमा पर फोकस

वाहन लोन के साथ बीमा बेचने के मामलों में भी पारदर्शिता पर जोर है। बैंकों और एनबीएफसी से जुड़े मामलों में करीब 16 प्रतिशत कमीशन देखा गया है। ऐसे मामलों में ग्राहक को बीमा के स्रोत और कीमत की स्पष्ट जानकारी देने की बात कही गई है।

पुरानी गाड़ियों के बीमा में भी कमीशन व्यवस्था की समीक्षा प्रस्तावित है। कई डीलरों के पास सर्विस और रिपेयर की सुविधा होने के बावजूद पुराने वाहनों के बीमा पर मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स को औसतन करीब 12 प्रतिशत कमीशन मिलने की बात कही गई है।

कैशलेस रिपेयर में क्या बदल सकता है

कैशलेस रिपेयर को लेकर भी अहम बदलाव प्रस्तावित है। सिर्फ इसलिए कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं किया जा सकेगा कि ग्राहक ने बीमा उसी डीलर से नहीं खरीदा है। पॉलिसी में सुविधा होने पर दूसरे इंश्योरर से ली गई पॉलिसी के आधार पर भी इसका लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर और बीमा वितरण संस्थाओं के बीच अतिरिक्त इंसेंटिव वाले समझौतों पर रोक का प्रस्ताव है। वहीं थर्ड-पार्टी बीमा और सरल मोटर बीमा उत्पादों के लिए कम कमीशन व्यवस्था पर विचार किया गया है।

अभी लागू नहीं, 25 अक्टूबर तक सुझाव

ये बदलाव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। उसके बाद प्राप्त सुझावों पर विचार कर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

इसलिए मौजूदा मोटर इंश्योरेंस व्यवस्था में तत्काल बदलाव नहीं माना जा सकता। अंतिम नियम कब आएंगे और किस रूप में लागू होंगे, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

IRDAI ने मोटर इंश्योरेंस की बिक्री और कमीशन ढांचे में बदलाव के जो प्रस्ताव रखे हैं, उनका उद्देश्य ग्राहकों को डीलर के अलावा विकल्प और कीमतों में पारदर्शिता देना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, डीलरों द्वारा क्यूआर कोड का प्रदर्शन, कैशलेस रिपेयर में भेदभाव पर रोक और कमीशन की समीक्षा इसके प्रमुख हिस्से हैं। कमीशन 13 से 50 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सामने आई है। प्रस्ताव पर 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव लिए जा रहे हैं, इसलिए मौजूदा व्यवस्था फिलहाल बनी रहेगी।

Read More Here:- 

Illegal Construction Complaint: घर के सामने अवैध निर्माण हो तो कहां करें शिकायत? जानें RTI से हाईकोर्ट तक पूरा तरीका

PCI ASO Recruitment 2026: ग्रेजुएट युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का मौका, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

UPI 0.4% MDR Supreme Court का अंतरिम रोक से इनकार, केंद्र, RBI और NPCI को नोटिस

EPFO का ‘निधि आपके निकट 2.0’ कैंप आज, PF क्लेम और पेंशन की समस्याओं का मौके पर समाधान

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.