Mission ShaktiSAT: 108 देशों की 12 हजार छात्राओं ने बनाया 12-यू क्यूबसैट, वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च
Mission ShaktiSAT: 108 देशों की 12 हजार छात्राओं ने बनाया 12-यू क्यूबसैट, वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च
Mission ShaktiSAT: मिशन शक्तिसैट ने अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। चेन्नई के एयरोस्पेस स्टार्टअप ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ के नेतृत्व में चल रहे इस मिशन को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन ने किसी महिला अंतरिक्ष शिक्षा कार्यक्रम में सबसे अधिक राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधित्व के तौर पर प्रमाणित किया है। इस मिशन के तहत 108 देशों की करीब 12,000 छात्राओं ने मिलकर एक 12-यू क्यूबसैट तैयार किया है। सैटेलाइट को 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर श्रीहरिकोटा लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। मिशन का मकसद लड़कियों को कक्षा से आगे बढ़कर अंतरिक्ष विज्ञान का व्यावहारिक अनुभव देना है।
Mission ShaktiSAT: वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन से मिली मान्यता
वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन ने मिशन शक्तिसैट को महिला अंतरिक्ष शिक्षा कार्यक्रम में सबसे ज्यादा राष्ट्रीयताओं के प्रतिनिधित्व के रूप में प्रमाणित किया है। यह उपलब्धि इसलिए खास है कि इसमें दुनिया के 108 देशों की भागीदारी रही।
मिशन का संचालन स्पेस किड्ज इंडिया कर रही है। यह चेन्नई स्थित एयरोस्पेस स्टार्टअप है, जो छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जोड़ने के लिए काम करता है।
12 हजार छात्राओं ने बनाया 12-यू क्यूबसैट
इस मिशन में दुनियाभर की लगभग 12,000 छात्राओं को एक साथ जोड़कर 12-यू क्यूबसैट का निर्माण किया गया है। मिशन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ किताबी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना है। इसके जरिए लड़कियों को अंतरिक्ष विज्ञान में हाथों-हाथ काम करने का मौका दिया गया।
उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि सैटेलाइट किस विशिष्ट काम या पेलोड के लिए बनाया गया है।
120 घंटे से ज्यादा की मुफ्त ट्रेनिंग
14 से 18 वर्ष की छात्राओं को इस मिशन के तहत 120 घंटे से अधिक की मुफ्त ऑनलाइन और व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण में अंतरिक्ष प्रणालियां, सैटेलाइट इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल फैब्रिकेशन और पेलोड इंटीग्रेशन जैसी जटिल तकनीकें शामिल रहीं।
आमतौर पर ऐसे विषय उच्च शिक्षा या विशेष संस्थानों तक सीमित माने जाते हैं। स्कूली उम्र की छात्राओं को इनसे जोड़ना इस मिशन की खास पहचान है।
108 देशों की टीमों का साझा प्रयास
सैटेलाइट के निर्माण में भारत के साथ अमेरिका, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैंड, मिस्र, लातविया और फिलीपींस जैसे 108 देशों की छात्र टीमों और संस्थानों ने मिलकर काम किया। अलग-अलग देशों के प्रतिभागियों का एक ही परियोजना पर काम करना इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देता है।
150 करोड़ रुपये का बजट और संस्थानों का समर्थन
स्पेस किड्ज इंडिया की संस्थापक डॉ. शकेसन ने बताया कि 150 करोड़ रुपये के बजट वाले इस मिशन को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), इन-स्पेस और यूके के मेरिडियन स्पेस कमांड का समर्थन मिला है। बजट का स्रोत और खर्च का ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण
सैटेलाइट को 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन श्रीहरिकोटा लॉन्च सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसे लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। किस रॉकेट से प्रक्षेपण होगा, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
आगे की योजना भी तय है। इस सैटेलाइट का एक मॉडल भविष्य में चांद की कक्षा में भी भेजा जाएगा। हालांकि इसके लिए समयसीमा अभी साफ नहीं है।
मिशन शक्तिसैट ने साबित किया है कि अंतरिक्ष विज्ञान में छात्राओं की भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है। 108 देशों की करीब 12,000 छात्राओं ने 12-यू क्यूबसैट बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन से मान्यता हासिल की है। 120 घंटे से ज्यादा की मुफ्त ट्रेनिंग, 150 करोड़ रुपये का बजट और इसरो, इन-स्पेस व मेरिडियन स्पेस कमांड का समर्थन इस मिशन की ताकत हैं। अब 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से होने वाले प्रक्षेपण पर सबकी नजर रहेगी। भविष्य में इसका मॉडल चांद की कक्षा तक भी जाएगा।
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