PM Fasal Bima Yojana: भारी बारिश से धान की फसल को नुकसान, जल निकासी से बीमा क्लेम तक, किसान तुरंत करें ये काम

PM Fasal Bima Yojana: भारी बारिश से धान की फसल को नुकसान, जल निकासी से बीमा क्लेम तक, किसान तुरंत करें ये काम

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PM Fasal Bima Yojana: भारी बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की चिंता देश के कई हिस्सों में किसानों को सता रही है। पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में पककर तैयार खड़ी धान को जमीन पर बिछा दिया है। खेतों में पानी भरने से बालियां डूब रही हैं, जिससे दाने सड़ने और गुणवत्ता बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि किसान घबराने के बजाय तुरंत कदम उठाएं। सबसे पहले खेत से पानी निकालें, गिरी बालियों को संभालें और कटी फसल को धूप में सुखाएं। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है, वे नुकसान के 72 घंटे के भीतर सूचना जरूर दें।

बारिश और तेज हवा से खेतों में क्या हालात हैं

देश के कई हिस्सों में लगातार हुई बारिश के साथ चली तेज हवाओं का असर सीधे खड़ी फसल पर पड़ा है। इस समय धान पककर कटाई के लिए तैयार है, इसलिए मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए ज्यादा भारी साबित हो रहा है।

कई खेतों में पानी भरने से बालियां डूब गई हैं। इससे दानों के सड़ने का जोखिम पैदा हुआ है। प्रभावित इलाकों की सटीक संख्या और कुल नुकसान का आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

सबसे पहले खेत से निकालें अतिरिक्त पानी

बारिश रुकते ही किसानों को सबसे पहले खेत में जमा अतिरिक्त पानी बाहर निकालना चाहिए। इसके लिए मेड़ के पास जरूरत के हिसाब से छोटी नालियां बनाई जा सकती हैं, ताकि पानी आसानी से बह जाए।

धान के खेत में 24 से 48 घंटे से ज्यादा पानी भरा रहे, तो पौधों की जड़ें गलने लगती हैं। साथ ही फंगस का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। इसलिए जल निकासी में देरी नहीं करनी चाहिए।

गिरी हुई बालियों को ऐसे संभालें

तेज हवा से जिन खेतों में फसल गिर गई है, वहां खास सावधानी जरूरी है। पानी निकलने के बाद जमीन पर पड़ी बालियों को कीचड़ और पानी से बचाने के लिए मजदूरों की मदद से सीधा करें या सूखी जगह पर रखें।

अगर फसल पूरी तरह पक चुकी है, तो पानी वाले खेत में कंबाइन हार्वेस्टर ले जाने के बजाय मजदूरों से कटाई कराना बेहतर है। कटी हुई बालियों को ऊंचे और सूखे स्थान पर इकट्ठा करें, ताकि वे दोबारा गीली न हों।

दानों को धूप में अच्छी तरह सुखाएं

गीली या नमी वाली धान को सीधे बोरियों में भरकर रखना बड़ी गलती हो सकती है। पानी के संपर्क में आने से दानों में नमी बढ़ जाती है, जिससे वे काले पड़ सकते हैं या उनमें अंकुरण शुरू हो सकता है।

कटाई या मड़ाई के बाद धान को साफ फर्श या तिरपाल पर फैलाकर कम से कम दो से तीन दिन तेज धूप में सुखाएं। जब नमी पूरी तरह खत्म हो जाए, तभी भंडारण करें या मंडी में बेचने की तैयारी करें।

फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया और 72 घंटे का नियम

जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान का बीमा कराया है, वे नुकसान की भरपाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियम के मुताबिक प्राकृतिक आपदा या बेमौसम बारिश से फसल खराब होने के 72 घंटे के भीतर सूचना देना जरूरी है।

यह सूचना बीमा कंपनी, स्थानीय कृषि अधिकारी या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के जरिए दी जा सकती है। समय पर जानकारी मिलने पर कृषि विभाग की टीम खेत का सर्वे करेगी और उचित मुआवजा बैंक खाते में मिल सकेगा। मुआवजे की राशि और भुगतान की समयसीमा का ब्योरा उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

PM Fasal Bima Yojana: किसानों के लिए आगे की राह

मौसम की मार से जूझ रहे किसानों के लिए अगले कुछ दिन अहम हैं। जल्दी जल निकासी, सावधानी से कटाई और सही सुखाई से नुकसान काफी हद तक सीमित किया जा सकता है। साथ ही बीमा क्लेम में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि 72 घंटे की समयसीमा निकलने पर दावा प्रभावित हो सकता है।

किसान अपने स्थानीय कृषि अधिकारी से संपर्क में रहें और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें। इससे कटाई और सुखाई का समय बेहतर तरीके से तय किया जा सकेगा।

भारी बारिश और तेज हवा से खेतों में पकी धान की फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया है, लेकिन सही समय पर उठाए गए कदम राहत दे सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश रुकते ही पानी निकालें, गिरी बालियों को कीचड़ से बचाएं और कटी फसल को दो से तीन दिन धूप में सुखाकर ही भंडारित करें। फसल बीमा कराने वाले किसान नुकसान के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, कृषि अधिकारी या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप पर सूचना दें। इससे सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सकेगी।

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