India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील का पहला चरण लगभग पूरा, पीयूष गोयल बोले- सिर्फ छोटे मुद्दे बाकी, 2 से 4 जून तक होगी अहम बैठक
पीयूष गोयल बोले, अधिकांश मुद्दों पर सहमति; जल्द हो सकता है समझौता
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 जून 2026 को घोषणा की कि समझौते के पहले चरण के ज्यादातर प्रावधानों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल कुछ छोटे-छोटे मुद्दे ही बाकी रह गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इन मुद्दों को सुलझाने के लिए भारत आया हुआ है और 2 से 4 जून तक दोनों देशों के बीच अहम बैठकें होंगी।
यह विकास भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, टैरिफ बैरियर्स कम करने और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में यह समझौता एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। पीयूष गोयल ने कहा कि 99 प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और शेष छोटे बिंदुओं पर जल्द ही फैसला हो जाएगा।
पीयूष गोयल का बयान और समझौते की प्रगति
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित BTA के पहले चरण के अधिकांश हिस्से पर सहमति बन गई है। उन्होंने अमेरिकी राजदूत के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अब सिर्फ छोटे-छोटे मुद्दे बचे हैं, जिन्हें दोनों पक्ष जल्द सुलषा लेंगे।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते को अंतिम रूप देते समय अमेरिका में हुए हालिया कानूनी बदलावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। इन बदलावों को समझौते में उचित जगह देने पर विचार किया जा रहा है। गोयल ने विश्वास जताया कि इन छोटे मुद्दों के सुलझते ही दोनों देश पहले चरण पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।
बातचीत का कार्यक्रम और समयसीमा
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वर्तमान में भारत में मौजूद है। 2 जून से 4 जून 2026 तक दोनों देशों के बीच व्यापक स्तर पर चर्चा होगी। इस बैठक में बाकी बचे मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।
भारत और अमेरिका ने 3 फरवरी 2026 को इस समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तय की थी। उसके बाद से लगातार वार्ताएं चल रही थीं। ट्रंप प्रशासन के दौरान कुछ टैरिफ संबंधी विवादों के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, लेकिन अब दोनों पक्ष सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
समझौते से भारत को होने वाले मुख्य फायदे
यह ट्रेड डील भारत के निर्यात को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 200 बिलियन डॉलर के करीब है, जिसके आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है। भारत को मिलने वाले प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
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क्षेत्रवार बाजार पहुंच: भारतीय कृषि उत्पाद, आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बेहतर और आसान पहुंच मिलेगी।
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निवेश और रोजगार: अमेरिकी कंपनियों के भारत में निवेश बढ़ने से देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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जीडीपी पर सकारात्मक असर: निर्यात बढ़ने से घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सीधे तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को लाभ पहुंचेगा।
पहले चरण के बाद व्यापक समझौते की राह
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि पहले चरण के पूरा होने के बाद दोनों देश एक व्यापक और अधिक गहन व्यापार समझौते की दिशा में आगे बढ़ेंगे। यह दूसरा चरण कई अन्य क्षेत्रों जैसे डिजिटल ट्रेड, सस्टेनेबल डेवलपमेंट और सप्लाई चेन सुरक्षा को कवर करेगा। भारत सरकार का लक्ष्य है कि अमेरिका के साथ मजबूत व्यापार संबंध स्थापित करके आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएं।
India-US Trade Deal: ओमान के साथ FTA लागू होने का महत्व
इसी दौरान व्यापार जगत से एक और अच्छी खबर आई है। भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते के तहत भारत को ओमान के बाजार में 98 प्रतिशत से ज्यादा टैरिफ लाइनों पर शून्य टैरिफ पहुंच मिलेगी। इससे कपड़ा, कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, जेम्स एंड ज्वेलरी और ट्रांसपोर्ट कंपोनेंट्स के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पहले चरण की लगभग पूरी होने की खबर आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत है। पीयूष गोयल के नेतृत्व में हो रही यह बातचीत दोनों देशों के बीच केवल व्यापार ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी एक नया आयाम देगी। भारत का लक्ष्य साल 2030 तक अमेरिका के साथ 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हासिल करना है, और यह डील उस दिशा में पहली मजबूत कड़ी साबित होगी।
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