India Belgium Defence Deal: भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी में नया अध्याय, 10 अहम समझौतों पर बनी सहमति

रक्षा सह-विकास, सह-उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण पर 10 समझौतों से बढ़ेगा सहयोग

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India Belgium Defence Deal: भारत और बेल्जियम के बीच राजनयिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाई प्रदान करते हुए दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी को विस्तार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। बेल्जियम के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई व्यापक द्विपक्षीय एवं प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में दोनों लोकतांत्रिक राष्ट्रों ने रक्षा सहयोग को अपने द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य आधार बनाने की घोषणा की है। इस उच्चस्तरीय बैठक के उपरांत दोनों देशों के रक्षा उद्योगों और संबंधित मंत्रालयों के मध्य सह-विकास, सह-उत्पादन और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर केंद्रित 10 अहम समझौतों पर सहमति बनी है।

यह समझौता इसलिए भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अब पारंपरिक ‘क्रेता-विक्रेता’ (Buyer-Seller) के ढांचे से आगे निकलकर वैश्विक शक्तियों के साथ रक्षा सह-विनिर्माण और रणनीतिक साझेदारी का नया मॉडल स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और बेल्जियम के समकक्ष बार्ट डी वेवर ने वार्ता के बाद स्पष्ट किया कि यह साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, साइबर रक्षा, उन्नत सेंसर तकनीक, स्वायत्त मानवरहित प्रणालियों और आधुनिक रक्षा हार्डवेयर के विकास में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली साबित होगी।

India Belgium Defence Deal: पीएम मोदी और बार्ट डी वेवर की ऐतिहासिक वार्ता

बेल्जियम के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद बार्ट डी वेवर की 2 से 4 सितंबर 2026 तक की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो चुकी है। नई दिल्ली में संपन्न हुई शिखर वार्ता के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने रक्षा विनिर्माण, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), हरित ऊर्जा और व्यापार सुगमता जैसे रणनीतिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में रेखांकित किया कि भारत और बेल्जियम के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापारिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि यह सहयोग अब रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और भविष्योन्मुखी उच्च प्रौद्योगिकी के संवेदनशील क्षेत्रों में एक गहरी रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप ले चुका है। दोनों राष्ट्रों ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने का संकल्प लिया।

10 अहम समझौतों से रक्षा उद्योग को नई दिशा: बेल्जियम की तकनीक और भारत की विनिर्माण क्षमता

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, दोनों देशों की प्रमुख रक्षा विनिर्माण कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के बीच हुए समझौतों का मुख्य लक्ष्य बेल्जियम की अत्याधुनिक तकनीकी विशेषज्ञता को भारत की विशाल औद्योगिक व विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़ना है। इन समझौतों के दायरे में मुख्य रूप से उन्नत सेंसर प्रणालियां, नौसैनिक युद्धक उपकरण, पानी के नीचे संचालित होने वाली सोनार तकनीकें, साइबर सुरक्षा टूल्स और हल्के बख्तरबंद वाहनों के लिए आवश्यक उन्नत कंपोनेंट्स शामिल हैं।

भारतीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और बेल्जियम के रक्षा व विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की उपस्थिति में यह स्पष्ट किया गया कि यह सहयोग पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की प्राथमिकताओं के अनुकूल है। इसके तहत विदेशी कंपनियों को भारत में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने, संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) बनाने और भारतीय रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) तथा निजी रक्षा स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करने के लिए संस्थागत मंच प्रदान किया जाएगा।

स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक और आधुनिक रक्षा हार्डवेयर में बेल्जियम की साझेदारी

इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से भारतीय सेना के महत्वाकांक्षी हल्के लड़ाकू टैंक ‘जोरावर’ (Zorawar Light Tank) का उल्लेख किया। पर्वतीय और उच्च-तुंगता वाले क्षेत्रों (High-Altitude Areas) जैसे लद्दाख और सिक्किम की सीमाओं पर त्वरित तैनाती के लिए विकसित किए जा रहे इस स्वदेशी टैंक में आधुनिक फायर कंट्रोल, सेंसर और उच्च-क्षमता वाले तकनीकी घटकों के क्षेत्र में दोनों देशों के उद्योगों के बीच चल रहे सहयोग को एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

जोरावर टैंक जैसी संवेदनशील परियोजना में बेल्जियम के तकनीकी इनपुट का उल्लेख इस बात का प्रमाण है कि पश्चिमी देश अब भारत की रक्षा आवश्यकताओं में रणनीतिक साझेदार के रूप में गहरी भूमिका निभाने के इच्छुक हैं। इससे भारतीय रक्षा विनिर्माण तंत्र को न केवल अपनी सेना की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने में गति मिलेगी, बल्कि भविष्य में इन संयुक्त रक्षा उत्पादों को तीसरे मित्र देशों को निर्यात करने का वैश्विक मार्ग भी प्रशस्त होगा।

राजनाथ सिंह और थियो फ्रांकेन की बैठक: हिंद-प्रशांत समुद्री सुरक्षा पर साझा रणनीति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन के साथ साउथ ब्लॉक में द्विपक्षीय रक्षा वार्ता की, जिसमें दोनों देशों के बीच सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त सामरिक अभ्यास और क्षमता निर्माण के वार्षिक कैलेंडर को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

वैश्विक व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा हिंद महासागर और उससे जुड़े समुद्री चोकपॉइंट्स से होकर गुजरता है। यूरोपीय संघ के एक प्रमुख तटीय और बंदरगाह-केंद्रित राष्ट्र के रूप में बेल्जियम ने भारत के साथ मिलकर समुद्री डकैती रोधी अभियानों, समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।

रक्षा से परे विस्तार: सेमीकंडक्टर चिप्स, आईमैक (IMEC) और क्रिटिकल मिनरल्स

शिखर वार्ता में रक्षा समझौतों के समानांतर भविष्य की तकनीकों पर भी बड़े फैसले लिए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि वैश्विक सेमीकंडक्टर अनुसंधान में बेल्जियम का प्रमुख संस्थान ‘आईमैक’ (IMEC) विश्व प्रसिद्ध है। भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर मिशन और इंडिया सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आईमैक की उन्नत अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं से सीधे जोड़ने पर सहमति बनी है।

इसके साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग तकनीक में भी द्विपक्षीय सहयोग का मार्ग प्रशस्त हुआ है। चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और लचीली आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए संयुक्त निवेश करेंगे। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में ग्रीन अमोनिया से जुड़ी विशाल परियोजना का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं ने स्वच्छ हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की घोषणा की।

आर्थिक लक्ष्य: पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का खाका

आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों के भीतर अपने मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत में बेल्जियम के निवेशकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए ‘इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म’ (Investment Fast-Track Mechanism) को सक्रिय रूप से लागू किया गया है।

इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों के बीच निरंतर संवाद के लिए ‘इंडिया-बेल्जियम बिजनेस फोरम’ को एक नियमित और संस्थागत व्यवस्था का रूप दे दिया गया है। फिनटेक, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और बैंकिंग नियामकों के बीच समन्वय बढ़ाकर सीमा पार निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। दोनों नेताओं ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष से इस साझेदारी को और अधिक संस्थागत मजबूती मिलेगी।

India Belgium Defence Deal: आतंकवाद पर साझा प्रहार और फ्लैंडर्स फील्ड्स के ऐतिहासिक बलिदान का स्मरण

सुरक्षा के व्यापक आयामों पर चर्चा करते हुए दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ का साझा संकल्प दोहराया। सीमा पार आतंकवाद, कट्टरपंथ और आतंकी वित्तपोषण (Terror Financing) के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए खुफिया सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान करने और कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सीधे संपर्क तंत्र को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

वार्ता के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने साझा इतिहास के भावनात्मक पन्नों को भी याद किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम के फ्लैंडर्स फील्ड्स (Flanders Fields) में लगभग 9,000 से अधिक जांबाज भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। वर्ष 2027 में भारत और बेल्जियम के औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना के 80 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। दोनों देशों ने कहा कि फ्लैंडर्स में बहा भारतीय सैनिकों का रक्त आज दोनों राष्ट्रों के बीच अटूट विश्वास, सम्मान और रणनीतिक साझेदारी की सबसे मजबूत भावनात्मक नींव है, जो आने वाली पीढ़ियों के साझा भविष्य को सुरक्षित करेगी।

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