Stock Market Today: चार दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक, Sensex 500 अंक से ज्यादा उछला, Nifty 23,900 के पार
फेड के नरम रुख और वैश्विक संकेतों से बाजार में खरीदारी लौटी, निवेशकों को मिली राहत
Stock Market Today: घरेलू शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी भारी बिकवाली और दबाव के सिलसिले पर शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को आखिरकार विराम लग गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक वैश्विक संकेतों के दम पर जबर्दस्त लिवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 515 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 76,668 के स्तर को पार कर गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 50 भी शुरुआती घंटी बजते ही मजबूत बढ़त के साथ 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर निकलकर 23,923 के स्तर पर पहुंच गया। इस शुरुआती तेजी ने पिछले कई दिनों से पूंजी गंवा रहे निवेशकों और ट्रेडर्स को बड़ी राहत पहुंचाई है।
बाजार में आई इस ताजा तेजी का प्राथमिक श्रेय अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदली वैश्विक धारणा को जाता है। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के ताजा नीतिगत बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सितंबर की आगामी बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी से परहेज कर सकता है। इस नरमी के संकेत से वैश्विक बॉन्ड यील्ड में ठहराव आया और एशियाई बाजारों सहित भारतीय इक्विटी सूचकांकों में नए सिरे से जोखिम उठाने का रुझान लौट आया। हालांकि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अभी भी चिंता का सबब बनी हुई हैं, जिसके चलते तेजी के बीच भी बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
Stock Market Today: चार सत्रों की मायूसी के बाद बाजार में लौटी रौनक, सूचकांकों ने भरी रफ्तार
बीते चार कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुए थे। इस दौरान वैश्विक स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल में तेजी, पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल में उछाल और अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं ने घरेलू सूचकांकों को लगातार नीचे धकेला था। गुरुवार के कारोबारी सत्र में भी निफ्टी 0.17 प्रतिशत टूटकर 23,873.45 अंक पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 417.49 अंकों के नुकसान के साथ 76,152.86 के स्तर पर आ गया था। लगातार चार दिनों की गिरावट में निफ्टी लगभग 1.3 प्रतिशत और सेंसेक्स करीब 1.4 प्रतिशत तक फिसल चुका था।
शुक्रवार की सुबह बाजार का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। बाजार खुलते ही बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में शॉर्ट कवरिंग और नई खरीदारी का दौर शुरू हुआ। सेंसेक्स ने कारोबार के पहले घंटे में ही 76,668 का आंकड़ा पार कर यह संकेत दिया कि घरेलू संस्थागत निवेशक निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। निफ्टी ने भी 23,870 के तकनीकी सपोर्ट से जोरदार उछाल लेते हुए 23,923 तक का सफर तय किया, जिससे निवेशकों की धारणा में सकारात्मक सुधार देखा गया।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से मिली राहत, ब्याज दर वृद्धि की आशंका घटी
दलाल स्ट्रीट में शुक्रवार की इस तेज छलांग का सबसे प्रमुख उत्प्रेरक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के शीर्ष नीति निर्माता क्रिस्टोफर वॉलर का बयान रहा। वॉलर ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि आगामी आर्थिक आंकड़ों में मुद्रास्फीति के दबाव में क्रमिक गिरावट दिखाई देती है, तो वह आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को यथावत बनाए रखने का समर्थन करेंगे। इस बयान से वैश्विक निवेशकों की उस गहरी आशंका को बल मिला कि दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का चक्र अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इस बयान के सामने आने के बाद वित्तीय बाजारों में सितंबर बैठक के दौरान ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह गई है, जो महज एक दिन पहले तक 63 प्रतिशत आंकी जा रही थी। वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब ब्याज दरें स्थिर रहने या घटने की उम्मीद बनती है, तो अंतरराष्ट्रीय पूंजी सुरक्षित अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड से निकलकर उभरते बाजारों की इक्विटी संपत्तियों में आने लगती है। भारतीय बाजार में भी शुक्रवार को इसी धारणा का सीधा लाभ देखने को मिला।
ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर के करीब: तेजी के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनीं चुनौती
सूचकांकों में लौटी इस शुरुआती हरियाली के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल का उच्च स्तर सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन कटौती जारी रखने के निर्णयों ने तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा रखा है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड एक समय 96.6 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया था।
भारत अपनी कुल पेट्रोलियम जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का महंगा होना देश के चालू खाता घाटे (CAD), व्यापार घाटे और आयात बिल पर सीधा विपरीत असर डालता है। तेल के दाम ऊंचे रहने से घरेलू परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे खुदरा खाद्य महंगाई और थोक मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चा तेल 95 डॉलर से नीचे नहीं आता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भविष्य में ब्याज दरों में कटौती करना कठिन हो सकता है, जो शेयर बाजार की दीर्घकालिक तेजी की राह में रोड़ा बन सकता है।
सेक्टोरल रुझान: स्मॉलकैप में तेजी, 16 में से 7 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में
सप्ताह के अंतिम दिन बाजार में आई मजबूती का दायरा व्यापक होने के साथ-साथ चुनिंदा सेक्टरों पर केंद्रित रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से सात सेक्टर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। खुदरा निवेशकों के पसंदीदा माने जाने वाले बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक में लगभग 0.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि मिडकैप इंडेक्स सीमित दायरे में लगभग स्थिर बना रहा। यह दर्शाता है कि निवेशक अभी भी आक्रामक होकर हर शेयर में पूंजी लगाने के बजाय वित्तीय रूप से मजबूत और बेहतर मूल्यांकन वाले लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बैंकिंग और आईटी सेक्टर ने शुक्रवार की सुबह बाजार को खींचने में सबसे अग्रणी भूमिका निभाई। पिछले दिनों भारी बिकवाली का शिकार हुए निजी बैंकों में निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की। दूसरी तरफ, तेल शोधन और ऊर्जा से जुड़े शेयरों पर कच्चे तेल की ऊंची लागत का दबाव देखा गया। फार्मा और एफएमसीजी जैसे रक्षात्मक (Defensive) सेक्टरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार पूरी तरह एकतरफा नहीं है बल्कि निवेशक आंकड़ों के आधार पर स्टॉक-स्पेसिफिक रणनीति अपना रहे हैं।
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) और रुपये की विनिमय दर पर टिकी निगाहें
भारतीय बाजार की मध्यम अवधि की दिशा काफी हद तक विदेशी संस्थागत निवेशकों की चाल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य पर निर्भर करेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल में तेजी और डॉलर इंडेक्स की मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से लगातार शुद्ध निकासी की थी, जिससे रुपये पर भी दबाव बना हुआ था।
शुक्रवार को अमेरिकी ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद बनने से डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी आई है, जिसने एशियाई मुद्राओं को सहारा दिया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आज के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार बनकर लौटते हैं, तो निफ्टी को 24,000 के पार निकलने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसके विपरीत, यदि विदेशी निवेशक केवल शुरुआती उछाल का उपयोग मुनाफावसूली के लिए करते हैं, तो सूचकांकों को ऊपरी स्तरों पर टिके रहने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।
Stock Market Today: क्या 23,900 के ऊपर टिक पाएगा निफ्टी? विश्लेषकों का नजरिया
बाजार के तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,850 से 23,870 का स्तर एक बेहद अहम सपोर्ट बेस बन चुका है। शुक्रवार को इस स्तर से आई रिकवरी यह साबित करती है कि बाजार में निचले स्तरों पर खरीदार मौजूद हैं। अब आगे की तेजी को बनाए रखने के लिए निफ्टी को 23,950 और उसके बाद 24,050 के कड़े रेजिस्टेंस जोन को पार करना होगा।
विशेषज्ञों की राय में शुक्रवार की इस बढ़त को एक सकारात्मक तकनीकी पुलबैक माना जाना चाहिए, किंतु इसे किसी स्थायी बुल रन का आगाज़ मान लेना जल्दबाजी होगी। आगामी हफ्तों में अमेरिका में जारी होने वाले गैर-कृषि पेरोल आंकड़े, महंगाई के आंकड़े, ओपेक प्लस की उत्पादन नीतियां और मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक परिदृश्य बाजार की वास्तविक दिशा तय करेंगे। खुदरा निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अत्यधिक लीवरेज्ड ट्रेडिंग से बचें और उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में गिरावट के समय चरणबद्ध तरीके से निवेश की रणनीति जारी रखें।
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