Health Tips: पानी पीने के बाद भी बार-बार लग रही है प्यास? जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें और डॉक्टरी सलाह

Health Tips: पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगना डिहाइड्रेशन, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी समस्या हो सकती है। जानिए इसके कारण और कब डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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Health Tips: सामान्य तौर पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के बाद शरीर की प्यास शांत हो जाती है और व्यक्ति तरोताजा महसूस करने लगता है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को पानी पीने के तुरंत बाद भी बार-बार प्यास लगने की समस्या बनी रहती है और गला सूखा महसूस होता है, तो इसे एक साधारण शारीरिक प्रतिक्रिया समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि यह लक्षण स्वयं में कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, लेकिन यह शरीर के भीतर पनप रही किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। अधिकांश परिस्थितियों में अत्यधिक पसीना निकलने, तेज धूप में रहने, शारीरिक परिश्रम करने या अत्यधिक नमकीन चीजों के सेवन से शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है, जिसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है। इसके अलावा कैफीन और शराब का अत्यधिक सेवन भी शरीर से पानी को बाहर निकालता है, जिससे बार-बार प्यास लगने की समस्या अधिक बढ़ जाती है।

Health Tips: डायबिटीज और ब्लड शुगर का असंतुलन हो सकता है कारण

अगर आपको पर्याप्त पानी पीने के बावजूद लगातार प्यास महसूस होती है, तो यह डायबिटीज मेलिटस का एक शुरुआती और प्रमुख लक्षण हो सकता है। जब मानव शरीर में ब्लड शुगर का स्तर आवश्यकता से अधिक बढ़ जाता है, तो गुर्दे यानी किडनी उस अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने का प्रयास करते हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया में शरीर से अधिक मात्रा में पानी पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाता है।
शरीर में पानी की इस निरंतर कमी के कारण मस्तिष्क बार-बार प्यास का संकेत भेजता है। इसके अलावा डायबिटीज इन्सिपिडस नामक एक अन्य स्थिति भी होती है, जो सामान्य डायबिटीज से बिल्कुल अलग है। इसमें शरीर में एक विशेष हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसके कारण व्यक्ति को अत्यधिक प्यास लगती है और बार-बार पेशाब आने की शिकायत बनी रहती है।

किडनी की कार्यप्रणाली और इलेक्ट्रोलाइट्स का बिगड़ता संतुलन

मानव शरीर में गुर्दे यानी किडनी पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सही संतुलन बनाए रखने में एक अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब किसी कारणवश किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो शरीर का यह प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को बार-बार प्यास महसूस होने लगती है।
ऐसी स्थिति में लगातार प्यास का लगना किडनी से जुड़ी किसी गंभीर समस्या की ओर इशारा हो सकता है। समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या शरीर में अन्य शारीरिक जटिलताओं को जन्म दे सकती है, इसलिए इस लक्षण की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।

ड्राई माउथ और दवाओं का दुष्प्रभाव भी है एक वजह

कई बार लोगों को केवल शारीरिक बीमारी के कारण ही नहीं, बल्कि मुंह में पर्याप्त लार न बनने की वजह से भी बार-बार प्यास महसूस होती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ड्राई माउथ कहा जाता है। जब मुंह में लार का उत्पादन कम हो जाता है, तो मुंह, गला और जीभ पूरी तरह रूखे हो जाते हैं तथा कई बार होंठ फटने की समस्या भी सामने आने लगती है।
इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष प्रकार की दवाओं के नियमित सेवन और उनके साइड इफेक्ट्स के कारण भी ड्राई माउथ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसके चलते व्यक्ति को ऐसा प्रतीत होता है कि उसका शरीर लगातार पानी मांग रहा है, जबकि समस्या केवल मुंह के सूखेपन से जुड़ी हो सकती है।

Health Tips: कब और क्यों जरूरी है योग्य डॉक्टर से संपर्क करना

यदि पानी पीने के बाद भी लगातार प्यास लगने की समस्या बिना किसी स्पष्ट कारण के कई दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहद आवश्यक हो जाता है। विशेष रूप से उन व्यक्तियों को अधिक सतर्क रहना चाहिए जो पहले से ही डायबिटीज, किडनी विकार या हार्मोनल असंतुलन जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं।
बच्चों और बुजुर्गों में यह लक्षण अधिक गंभीर रूप ले सकता है क्योंकि उनका शरीर डिहाइड्रेशन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। समय पर डॉक्टरी जांच कराने से समस्या के मूल कारण का पता लगाकर सही इलाज शुरू किया जा सकता है।
बार-बार प्यास लगना केवल मौसम या खान-पान का परिणाम नहीं होता, बल्कि यह शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि यह लक्षण नियमित रूप से दिखाई दे रहा है, तो स्वास्थ्य परीक्षण कराना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते सही उपचार प्राप्त हो सके।

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