Singrauli BJP MLA: भाजपा विधायक की इनोवा कार धोने पहुंची सरकारी फायर ब्रिगेड, वीडियो वायरल होने पर मचा सियासी बवाल, कांग्रेस ने साधा निशाना
सिंगरौली में वीडियो वायरल होने पर विवाद, कांग्रेस ने सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया
Singrauli BJP MLA: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सरकारी संसाधनों और आपातकालीन सेवाओं के कथित दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र (सीट क्रमांक 80) से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामनिवास शाह के शासकीय आवास के बाहर सरकारी फायर ब्रिगेड (दमकल) के हाई-प्रेशर पाइप से उनकी निजी टोयोटा इनोवा कार की धुलाई किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय स्तर से लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों तक तीखा विवाद छिड़ गया है। आम नागरिक और विपक्षी दल यह सवाल उठा रहे हैं कि आगजनी जैसी गंभीर आपदाओं के लिए आरक्षित आपातकालीन वाहन का इस्तेमाल किसी जनप्रतिनिधि की निजी गाड़ी चमकाने के लिए कैसे और किसके आदेश पर किया गया।
Singrauli BJP MLA: आवास के बाहर दमकल से कार की धुलाई का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि सिंगरौली के बिलौंजी स्थित विधायक के शासकीय आवास के बाहर नगर निगम का फायर ब्रिगेड वाहन खड़ा है। वाहन से जुड़ी हाई-प्रेशर पानी की नली (होज पाइप) से तीन कर्मचारी सड़क किनारे खड़ी सफेद रंग की इनोवा कार पर जोरदार पानी का छिड़काव कर रहे हैं और उसकी सफाई में जुटे हुए हैं।
यह वाहन भाजपा विधायक रामनिवास शाह का निजी वाहन बताया जा रहा है। वीडियो सामने आते ही लोगों ने इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में आग लगने की आपात स्थिति होती है, तो कई बार दमकल गाड़ियां पानी की कमी या तकनीकी खराबी का हवाला देकर घंटों देरी से पहुंचती हैं, किंतु रसूखदारों के निजी कार्यों के लिए ये संसाधन तुरंत उपलब्ध करा दिए जाते हैं।
विधायक ने जताई अनभिज्ञता, कहा– ‘घर पर मौजूद नहीं था, ड्राइवर से पूछूंगा’
इस मामले पर विवाद गहराने के बाद विधायक रामनिवास शाह ने पूरे घटनाक्रम से खुद को अलग करते हुए अनभिज्ञता जताई है। विधायक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना के समय वे किसी आवश्यक कार्यवश आवास पर मौजूद नहीं थे और बाहर गए हुए थे।
उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि खुद खड़े होकर गाड़ियां नहीं धुलवाता है और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि फायर ब्रिगेड का वाहन उनके आवास तक कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में अपने ड्राइवर और कर्मचारियों से पूछताछ करेंगे कि यह स्थिति कैसे निर्मित हुई। हालांकि, विधायक के इस स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
नगर निगम कमिश्नर का बयान: ‘निजी इस्तेमाल की कोई अनुमति नहीं’
सिंगरौली नगर निगम की कमिश्नर सविता प्रधान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम द्वारा किसी भी निजी कार्य या वाहन धुलाई के लिए फायर ब्रिगेड का उपयोग करने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी प्राथमिक पड़ताल की जा रही है।
प्रशासनिक और कानूनी जानकारों के अनुसार, फायर ब्रिगेड सेवा आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं (Essential Services) के अंतर्गत आती है। इन वाहनों का पानी और उपकरण केवल आगजनी, आपदा राहत या विशेष आधिकारिक कार्यों के लिए ही निर्धारित होते हैं। बिना किसी आपात स्थिति के इनका निजी इस्तेमाल सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष का तीखा हमला: ‘सत्ता के अहंकार का परिचायक’
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सत्ता के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब आम जनता के घरों और खेतों में आग लगती है तो दमकल विभाग के पास डीजल या पानी नहीं होता, लेकिन सत्ताधारी दल के विधायकों की गाड़ियां धोने के लिए पूरा प्रशासनिक अमला हाजिर हो जाता है।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भी नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले में दोषी कर्मचारियों और आदेश देने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि करदाताओं के पैसे से चलने वाली सार्वजनिक सेवाओं को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
Singrauli BJP MLA: सार्वजनिक संसाधनों की जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
सिंगरौली एक प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा उत्पादन केंद्र है, जहां ताप विद्युत संयंत्रों और कोयला खदानों के कारण आगजनी के जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहते हैं। ऐसे संवेदनशील औद्योगिक जिले में आपातकालीन वाहनों का निजी कार्यों में डायवर्ट किया जाना किसी बड़ी आपदा के समय भारी पड़ सकता है।
यह मामला केवल एक गाड़ी धुलवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम और जिला प्रशासन इस मामले में कोई औपचारिक जांच बैठाकर जिम्मेदारी तय करता है या यह मामला भी अन्य प्रशासनिक विवादों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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