Engineering Exports: अगस्त में भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 24.86% बढ़कर $12.32 अरब, अमेरिका-चीन में बढ़ी मांग
अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया समेत प्रमुख बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग सामान की मांग बढ़ी The Economic Times
Engineering Exports: वैश्विक व्यापारिक गलियारों में मंदी की आशंकाओं, अनिश्चित आर्थिक माहौल और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत के विनिर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी श्रेष्ठता का परचम लहराया है। वाणिज्य मंत्रालय और इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC India) द्वारा जारी नवीनतम व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में देश का कुल इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 24.86 प्रतिशत की शानदार छलांग लगाते हुए 12.32 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष की समान अवधि यानी अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 9.87 अरब डॉलर दर्ज किया गया था। यह उपलब्धि इसलिए भी असाधारण है क्योंकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में यह लगातार पांचवां महीना है जब इंजीनियरिंग निर्यात ने लगातार वृद्धि का सकारात्मक क्रम बनाए रखा है।
भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की इस तेज रफ्तार ने देश के संपूर्ण मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को नई गति प्रदान की है। अगस्त के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी बाजारों में ‘मेक इन इंडिया’ इंजीनियरिंग सामानों की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और औद्योगिक उपकरणों की बढ़ती स्वीकार्यता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी अब एक अनिवार्य शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है।
Engineering Exports: अमेरिका बना सबसे बड़ा खरीदार, चीन और इंडोनेशिया में बंपर उछाल
वैश्विक व्यापारिक गंतव्यों के विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है। अगस्त 2026 में अमेरिका को किए जाने वाले इंजीनियरिंग निर्यात में 31 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा बढ़कर 2.20 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी विनिर्माण और अवसंरचना क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय उपकरणों की सतत मांग ने इस व्यापारिक विस्तार को मजबूत आधार प्रदान किया।
वहीं दूसरी ओर, चीन के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू बाजार में भी भारतीय इंजीनियरिंग सामानों ने अभूतपूर्व पैठ बनाई है। अगस्त 2026 में चीन को होने वाला निर्यात लगभग 75 प्रतिशत की विशाल वृद्धि के साथ 424.65 मिलियन डॉलर के स्तर को छू गया, जो अगस्त 2025 में मात्र 242.50 मिलियन डॉलर था। इसके अतिरिक्त दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया को किए गए निर्यात में 182 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग देखी गई और यह 292.30 मिलियन डॉलर पर जा पहुंचा। खाड़ी देश ओमान को होने वाला निर्यात जून 2026 में लागू हुए भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के सकारात्मक प्रभाव से करीब चार गुना बढ़कर 198 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया।
यूरोप और सुदूर पूर्व में मांग का विस्तार: ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया में मजबूत पकड़
यूरोपीय और पूर्व एशियाई बाजारों में भी भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) को भारतीय इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में सालाना आधार पर 28.6 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई। ब्रिटिश उद्योगों में ऊर्जा कुशल मशीनरी और ऑटोमोटिव पुर्जों के लिए भारतीय आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता लगातार बढ़ती देखी जा रही है।
हाई-टेक विनिर्माण के वैश्विक केंद्र दक्षिण कोरिया में भारतीय उत्पादों की मांग दोगुनी से भी अधिक हो गई। अगस्त महीने में दक्षिण कोरिया को होने वाला निर्यात बढ़कर करीब 466 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि उन्नत औद्योगिक देशों द्वारा अपने आयात स्रोतों में विविधता लाने (China+1 Strategy) की नीति का सीधा और व्यापक लाभ भारतीय इंजीनियरिंग इकाइयों को मिल रहा है, जिससे किसी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र पर भारत की व्यापारिक निर्भरता काफी कम हुई है।
34 में से 31 उत्पाद समूहों में दर्ज हुआ विस्तार: विनिर्माण का चौतरफा विकास
ईईपीसी इंडिया की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग क्षेत्र की सबसे बड़ी मजबूती यह रही कि यह वृद्धि किसी एक या दो उत्पादों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे सेक्टर में चौतरफा विस्तार देखा गया। काउंसिल द्वारा ट्रैक किए जाने वाले कुल 34 प्रमुख इंजीनियरिंग उत्पाद समूहों में से 31 समूहों ने अगस्त महीने में सकारात्मक वार्षिक वृद्धि दर्ज की।
भारी औद्योगिक मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, मेडिकल डिवाइसेज, लौह एवं इस्पात से निर्मित उत्पादों तथा एयरोस्पेस से जुड़े उपकरणों की वैश्विक मांग में एक साथ तेजी दर्ज की गई। विनिर्माण के इतने व्यापक आधार पर निर्यात में आई यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत का औद्योगिक तंत्र अब मूल्य-संवर्धित (Value-Added) उत्पादों के निर्माण में वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरा उतर रहा है।
अप्रैल से अगस्त के बीच $58.70 अरब का संचयी निर्यात: 19.5% की वार्षिक वृद्धि
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त) के संचयी आंकड़ों पर नजर डालें तो इंजीनियरिंग क्षेत्र का प्रदर्शन निरंतर प्रभावशाली बना हुआ है। इस पांच महीने की अवधि के दौरान भारत का कुल इंजीनियरिंग निर्यात 58.70 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह आंकड़ा 49.10 अरब डॉलर था। इस प्रकार चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में कुल इंजीनियरिंग निर्यात में 19.55 प्रतिशत की ठोस वृद्धि दर्ज की गई है।
यह निरंतर प्रदर्शन इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भारतीय निर्यातक वैश्विक लॉजिस्टिक्स बाधाओं के बीच भी अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बुक को समय पर पूरा करने में सफल रहे हैं। अगस्त में भारत का कुल माल निर्यात (Merchandise Export) भी 26.1 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर रहा, जिसमें अकेले इंजीनियरिंग सामानों की 12.32 अरब डॉलर की हिस्सेदारी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की 5.55 अरब डॉलर की भागीदारी ने भारतीय व्यापार संतुलन को ऐतिहासिक संबल प्रदान किया।
पश्चिम एशिया की लॉजिस्टिक्स बाधाएं और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां
यद्यपि शीर्ष 25 वैश्विक इंजीनियरिंग बाजारों में से अधिकांश में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा, किंतु पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट और लाल सागर मार्ग में उत्पन्न व्यवधानों का असर कुछ चुनिंदा बाजारों पर स्पष्ट दिखाई दिया। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत बाजारों में लॉजिस्टिक्स चुनौतियों और बढ़े हुए समुद्री मालभाड़े (Freight Charges) के कारण निर्यात वृद्धि की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही।
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने रेखांकित किया कि वैश्विक शिपिंग मार्गों में अनिश्चितता, बीमा लागतों में वृद्धि और कंटेनरों की उपलब्धता जैसी जटिलताओं के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने असाधारण जुझारूपन दिखाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गति को बनाए रखने के लिए निर्यातकों को वैकल्पिक व्यापार मार्गों की पहचान करनी होगी, नए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाना होगा और अपनी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला (Domestic Supply Chain) को वैश्विक झटकों से सुरक्षित रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाने होंगे।
Engineering Exports: वैश्विक विनिर्माण महाशक्ति बनने की दिशा में भारत के ठोस कदम
अगस्त 2026 में 12.32 अरब डॉलर का इंजीनियरिंग निर्यात केवल एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत के विनिर्माण क्षेत्र के तकनीकी उन्नयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का सशक्त दस्तावेज है। इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग का संयुक्त प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि भारत अब केवल कच्चे माल का निर्यातक न रहकर उन्नत तकनीकी व औद्योगिक उत्पादों का प्रमुख वैश्विक केंद्र बन चुका है।
आगे की राह में पश्चिमी देशों की ब्याज दरों की दिशा, वैश्विक मुद्रास्फीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिबंधों जैसी चुनौतियां विद्यमान रहेंगी। किंतु यदि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और लागत दक्षता पर अपना ध्यान केंद्रित रखता है, तो चालू वित्त वर्ष में इंजीनियरिंग निर्यात अपने समस्त पूर्ववर्ती वार्षिक रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर रहेगा।
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