ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर तीन हफ्ते बढ़ाया, नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई
1948 के बाद पहली बार हुई सीधी कूटनीतिक वार्ता; वाशिंगटन में होगी नेतन्याहू और औन की मुलाकात।
Israel Lebanon ceasefire: वाशिंगटन में 24 अप्रैल 2026 को हुई घोषणा ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस से यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में ‘स्थायी शांति’ की स्थापना के लिए पूरी तरह सक्रिय है।
Israel Lebanon ceasefire: सीजफायर बढ़ाने का फैसला कैसे हुआ?
व्हाइट हाउस में गुरुवार को इजरायली और लेबनानी राजदूतों के बीच एक सघन बैठक हुई।
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बैठक का परिणाम: ट्रंप ने इस वार्ता को “अत्यंत सकारात्मक” बताया।
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विस्तार: शुरुआती 10 दिनों का सीजफायर, जो शुक्रवार को समाप्त होने वाला था, उसे अब 3 सप्ताह (21 दिन) के लिए और बढ़ा दिया गया है। यह समय दोनों पक्षों को जटिल मुद्दों पर आगे बात करने का अवसर देगा।
ऐतिहासिक क्षण: 1948 के बाद पहली बार सीधी बातचीत
यह कूटनीतिक सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 1948 में इजरायल के गठन के बाद से दोनों पड़ोसी देश औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति में रहे हैं।
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78 वर्षों की शत्रुता: दशकों तक एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले रखने के बाद, पहली बार दोनों देशों के राजनयिक एक मेज पर बैठे।
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स्थिरता की नींव: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो यह मध्यपूर्व के लिए दशकों का सबसे बड़ा शांति समझौता होगा।
Israel Lebanon ceasefire: हिजबुल्लाह का मुद्दा और लेबनान की संप्रभुता
ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस पूरी प्रक्रिया में हिजबुल्लाह एक प्रमुख कारक है।
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संतुलित भूमिका: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका लेबनान की सरकार के साथ मिलकर काम करेगा ताकि वह हिजबुल्लाह के प्रभाव से खुद को सुरक्षित और मजबूत कर सके।
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अमेरिकी मंशा: अमेरिका चाहता है कि लेबनान एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में उभरे, न कि किसी बाहरी या चरमपंथी संगठन के नियंत्रण में रहे।
Israel Lebanon ceasefire: क्या कहा दोनों देशों के राजदूतों ने?
दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने शांति की दिशा में ट्रंप के प्रयासों की सराहना की:
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इजरायली राजदूत येचियल लाइटर: उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रंप के नेतृत्व में इजरायल और लेबनान बहुत जल्द स्थायी शांति की औपचारिक स्थापना करेंगे।
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लेबनानी राजदूत नादा हमादेह मोवाद: उन्होंने लेबनान को समर्थन देने के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया और विश्वास जताया कि अमेरिकी मदद से “लेबनान फिर से महान बनेगा।”
नेतन्याहू और जोसेफ औन के साथ उच्च स्तरीय मुलाकात
शांति प्रक्रिया को ठोस रूप देने के लिए आगामी दो हफ्तों में वाशिंगटन में दो महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं:
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बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायली पीएम): वे ट्रंप के साथ सुरक्षा और शांति के रोडमैप पर चर्चा करेंगे।
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जोसेफ औन (लेबनानी राष्ट्रपति): वे लेबनान की संप्रभुता और पुनर्निर्माण की मांगों को ट्रंप के समक्ष रखेंगे।
लेबनान की शर्तें और इजरायल का ‘हिजबुल्लाह’ पर रुख
भले ही बातचीत चल रही है, लेकिन दोनों पक्षों की अपनी-अपनी सख्त शर्तें हैं:
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लेबनान की मांग: इजरायल द्वारा घरों को तोड़ना तुरंत बंद हो, इजरायली सेना की वापसी हो, और लेबनानी कैदियों को रिहा किया जाए।
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इजरायल का रुख: विदेश मंत्री गिदोन सार ने साफ कहा कि शांति की राह में केवल एक बाधा है—हिजबुल्लाह। इजरायल चाहता है कि लेबनान हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने के लिए उनके साथ सहयोग करे।
निष्कर्ष: कूटनीति के कठिन रास्ते पर शांति की उम्मीद
इजरायल और लेबनान के बीच शुरू हुआ यह कूटनीतिक संवाद एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। सीजफायर के छोटे-मोटे उल्लंघनों के बावजूद, राजदूतों का संवाद जारी रहना सकारात्मक संकेत है। अब पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की आगामी उच्च स्तरीय मुलाकातों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि क्या 78 सालों की दुश्मनी हमेशा के लिए खत्म होगी या नहीं।
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