Commonwealth Games 2026: बिंदियारानी देवी ने महिला 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज मेडल, भारत को छठा पदक
महिला 58 किग्रा वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक, भारत के कुल पदकों की संख्या छह पहुंची
Commonwealth Games 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत की स्टार वेटलिफ्टर बिंदियारानी देवी ने महिलाओं के 58 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक (ब्रॉन्ज मेडल) जीतकर देश का नाम रोशन किया है। मणिपुर की रहने वाली इस अनुभवी खिलाड़ी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क को मिलाकर कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया और पोडियम पर अपनी जगह पक्की की। बिंदियारानी के इस मेडल के साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है, और यह सभी पदक भारत को वेटलिफ्टिंग स्पर्धाओं से ही प्राप्त हुए हैं।
प्रतियोगिता में बिंदियारानी का प्रदर्शन
बिंदियारानी देवी ने प्रतियोगिता के दौरान शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी। स्नैच दौर में उन्होंने बेहद स्थिर प्रदर्शन करते हुए 87 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क दौर में भारी दबाव के बीच उन्होंने 112 किलोग्राम वजन उठाकर कुल स्कोर 199 किलोग्राम तक पहुंचाया। यद्यपि वह अपने अंतिम प्रयास में 116 किलोग्राम भार उठाने में सफल नहीं हो सकीं, लेकिन उनका 199 किलोग्राम का कुल प्रयास भारत को कांस्य पदक दिलाने के लिए पर्याप्त साबित हुआ। इस स्पर्धा में नाइजीरिया की आरएफ लावाल ने स्वर्ण पदक और कनाडा की एएस ताशेरो ने रजत पदक अपने नाम किया।
अनुभवी खिलाड़ी का शानदार सफर
मणिपुर के इम्फाल की रहने वाली बिंदियारानी देवी भारतीय वेटलिफ्टिंग का जाना-माना चेहरा हैं। इससे पहले उन्होंने 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत के लिए रजत पदक जीता था। लंबे समय तक 55 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने के बाद उन्होंने 58 किलोग्राम वर्ग में खुद को ढालते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। ग्लासगो में मिला यह कांस्य पदक उनके वर्षों के कठिन परिश्रम, अनुशासित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प का सुखद परिणाम है।
भारोत्तोलन में भारतीय दल का दबदबा
ग्लासगो गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टिंग दल की शुरुआत बेहद शानदार रही है। दिग्गज खिलाड़ी मीराबाई चानू ने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया था, जिसके बाद ज्ञानेश्वरी यादव, ऋषिकांत सिंह और अन्य एथलीटों ने भी देश की झोली में रजत और कांस्य पदक डाले। बिंदियारानी की इस सफलता ने टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। भारतीय कोचों और सपोर्ट स्टाफ के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए एक बेहतरीन आधार तैयार कर रहा है।
मणिपुर के खेल जगत में खुशी का माहौल
बिंदियारानी देवी (Commonwealth Games 2026) की इस उपलब्धि से उनके गृह राज्य मणिपुर समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। मणिपुर से लगातार कई विश्व स्तरीय एथलीटों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है, और बिंदियारानी ने उस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनकी जीत की खबर के बाद स्थानीय स्तर पर उनके प्रशंसकों और परिजनों ने उत्सव मनाया। खेल प्रेमियों का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनों से देश की युवा प्रतिभाओं, विशेषकर युवा लड़कियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहन मिलता है।
Commonwealth Games 2026: भविष्य की चुनौतियां और लक्ष्य
कांस्य पदक जीतने के बाद बिंदियारानी देवी का ध्यान अब आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और एशियाई स्तर की स्पर्धाओं पर केंद्रित होगा। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने के लिए तकनीकी सुधारों और फिटनेस पर निरंतर काम करना आवश्यक होगा। भारतीय खेल प्राधिकरण और राष्ट्रीय महासंघ के सहयोग से बिंदियारानी जैसी एथलीटों का लक्ष्य अब एशियाई और ओलंपिक खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत का तिरंगा फहराना होगा।
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