CJP Protest: सरकार और CJP के बीच डेढ़ घंटे चली बातचीत, दो मांगों पर बनी सहमति, प्रधान के इस्तीफे पर कल तक का इंतजार
CJP Protest: सरकार से डेढ़ घंटे चली बातचीत, दो मांगों पर बनी सहमति
CJP Protest: पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली में जो आंदोलन बीते कई दिनों से थमने का नाम नहीं ले रहा था, उसमें शुक्रवार को हलचल तेज हो गई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों से आमने-सामने बातचीत की। यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई और करीब डेढ़ घंटे तक चली।
CJP Protest: बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ
CJP की ओर से बैठक में पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने सरकार के सामने पार्टी की मांगों को विस्तार से रखा। इसके लिए CJP ने पहले ही पांच पैराग्राफ की लिखित मांग तैयार कर सरकार को सौंपी थी, ताकि बातचीत के दौरान कोई भ्रम की स्थिति न बने।
बातचीत की जगह को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच पहले कुछ खींचतान देखने को मिली थी। सरकार शुरू में चाहती थी कि CJP प्रतिनिधि जेपी नड्डा के घर या दफ्तर आकर चर्चा करें। लेकिन CJP का रुख साफ था कि अगर सरकार को बात करनी है तो या तो वह जंतर-मंतर आए, या फिर किसी न्यूट्रल जगह पर मुलाकात हो। अंततः सरकार इस शर्त पर राजी हुई और कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को बातचीत के लिए चुना गया।
तीन मांगें, दो पर बनी बात
CJP की मुख्य मांगें तीन थीं। पहली, छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। दूसरी, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दें। और तीसरी, पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने प्रधान के इस्तीफे वाली मांग पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि इसके लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार उन्हें जल्द ही हटा देगी।” रांका के मुताबिक बाकी दो मांगों पर सरकार ने सैद्धांतिक रूप से हामी भर दी है। इनमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई FIR व अन्य कानूनी मामलों को वापस लेना शामिल है।
वांगचुक ने खत्म किया अनशन
इस बीच एक बड़ी राहत की खबर यह रही कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। नीट सहित कई अहम मुद्दों पर सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। खुद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने वांगचुक का अनशन खुलवाया, जो इस पूरे घटनाक्रम में एक सकारात्मक मोड़ माना जा रहा है।
CJP Protest: प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी है CJP
हालांकि वांगचुक का अनशन भले खत्म हो गया हो, लेकिन CJP का रुख अब भी उतना ही सख्त बना हुआ है। पार्टी की ओर से साफ कर दिया गया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा। इससे कुछ समय पहले पार्टी नेता अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह ऐलान भी किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा।
यानी सरकार और CJP के बीच भले ही दो मुद्दों पर रास्ता निकल आया हो, लेकिन सबसे संवेदनशील मांग — यानी मंत्री का इस्तीफा — अब भी अटकी हुई है। अगले 24 घंटे इस मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि सरकार ने खुद ही शनिवार दोपहर तक जवाब देने की बात कही है।
CJP Protest: पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाने की तैयारी
इस पूरे विवाद की जड़ पेपर लीक की घटनाएं रही हैं, और सरकार इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में पेपर लीक से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया को लेकर एक मसौदे पर चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो इस मसौदे को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है, जिसके बाद सोमवार को संसद में इससे जुड़ा बिल पेश किए जाने की संभावना है।
प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जो जल्द सुनवाई कर सजा तय करेगा। दोषियों को दस साल तक की जेल हो सकती है, साथ ही दस करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि सख्त कानून बनने से भविष्य में परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहेगी और छात्रों का भरोसा कायम रहेगा।
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