Abhijeet Dipke: छात्रों को परेशान करना बंद करें, वरना होगा बड़ा शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन; CJP संस्थापक अभिजीत दिपके की चेतावनी
अभिजीत दिपके बोले- छात्रों को परेशान करना बंद करें, नहीं तो होगा बड़ा विरोध प्रदर्शन
Abhijeet Dipke: नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ आंदोलित छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और दर्ज एफआईआर (FIR) को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बार फिर केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर चेतावनी जारी की है कि यदि पुलिस और प्रशासन की ओर से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को परेशान करने का सिलसिला तुरंत नहीं रोका गया, तो सीजेपी जल्द ही एक राष्ट्रव्यापी और विशाल शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का आयोजन करेगी। दिपके ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकार को अपनी दमनकारी नीतियां छोड़कर छात्रों को निशाना बनाना बंद करना चाहिए।
अभिजीत दिपके का स्पष्ट संदेश और आंदोलन तेज करने का संकल्प
अभिजीत दिपके ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि देश का युवा और छात्र अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तथा शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतर रहे हैं। यदि पुलिस द्वारा जांच के नाम पर छात्रों को बेवजह समन भेजने, पूछताछ करने और परेशान करने की कार्रवाई जारी रहती है, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी हिंसा के सख्त खिलाफ है और अगला प्रदर्शन भी पूरी तरह अनुशासित व शांतिपूर्ण रहेगा। यह तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर चिंताएं गहराती जा रही हैं।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास की प्रतिक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सवाल
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर कर सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश के कुछ पहलुओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दास ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनहित याचिकाओं पर दिए गए अंतरिम आदेश से पूरे देश के छात्रों और न्यायप्रिय नागरिकों के बीच चिंता की घंटी बजनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से आदेश के निर्देश नंबर चार का हवाला दिया, जो राज्य सरकारों और पुलिस जांच एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मौजूदा एफआईआर (FIR) के तहत आगे की जांच जारी रखने की अनुमति देता है। सौरव दास ने इसे एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय करार दिया है।
केंद्र सरकार द्वारा दी गई लिखित गारंटी का जिक्र
प्रवक्ता सौरव दास ने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश भारत सरकार द्वारा 25 जुलाई 2026 को देश के युवाओं और छात्र संगठनों को दिए गए उस आधिकारिक आश्वासन के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें सरकार ने सभी एफआईआर वापस लेने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र ने देश के युवाओं को स्पष्ट गारंटी दी थी कि शांतिपूर्ण आंदोलन में हिस्सा लेने वाले किसी भी अभ्यर्थी या नागरिक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। अब अदालत के आदेश की आड़ लेकर पुरानी एफआईआर पर पुलिस कार्रवाई जारी रहने से छात्र संगठनों और पीड़ित अभ्यर्थियों के मन में खौफ का माहौल है।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एक अंतरिम आदेश जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि बिना किसी पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई भी कड़ा दंडात्मक कदम न उठाया जाए। इसके अलावा, हिरासत में लिए गए नाबालिगों को रिहा करने और घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज व साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, कोर्ट ने जांच एजेंसियों को दर्ज एफआईआर पर अपनी सामान्य जांच प्रक्रिया जारी रखने की छूट दी थी, जिसे लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
पुलिसिया पूछताछ और छात्रों पर मनोवैज्ञानिक दबाव का आरोप
सीजेपी नेतृत्व का आरोप है कि विभिन्न राज्यों में स्थानीय पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दुरुपयोग कर छात्रों को डरा-धमका रही है। कई स्थानों पर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को थानों में बुलाकर पूछताछ की जा रही है और उनके घरों पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। संगठन का कहना है कि भविष्य संवारने की उम्र में युवाओं पर आपराधिक मामले थोपना उनके करियर और मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। दिपके ने सरकार से अपील की है कि वह युवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाए और पुलिस बल के प्रयोग के बजाय उनसे सीधे बातचीत का रास्ता चुने।
नीट पेपर लीक आंदोलन और सीजेपी की भूमिका
कॉकरोच जनता पार्टी नीट यूजी 2026 पेपर लीक और परीक्षा में हुई बड़ी धांधली के खिलाफ पहले दिन से ही मोर्चा संभाले हुए है। संगठन पूरे देश में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हुए बड़े मार्च के बाद यह आंदोलन देशव्यापी हो चुका है। यद्यपि 20 जुलाई की हिंसा में कई पुलिसकर्मी और छात्र घायल हुए थे, सीजेपी का दावा है कि हिंसा में कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों का हाथ था, जिसके लिए बेकसूर छात्रों को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।
शांतिपूर्ण विरोध और लोकतांत्रिक अधिकारों पर जोर
अभिजीत दिपके ने बार-बार इस बात को दोहराया है कि उनका संगठन हमेशा कानून और संविधान का पालन करने में विश्वास रखता है। उन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि हिंसा की घटनाओं को देखते हुए अब दोबारा संसद की ओर कोई उग्र मार्च नहीं निकाला जाएगा। नए बयान में भी उन्होंने प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को पूर्णतः अहिंसक और शांतिपूर्ण रखने का वादा किया है। संगठन का मानना है कि अपनी मांगों को शांतिपूर्वक रखना भारतीय संविधान द्वारा हर नागरिक को दिया गया मौलिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता।
Abhijeet Dipke: सरकार और पुलिस प्रशासन से प्रमुख मांगें
सीजेपी ने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि आंदोलन के दौरान दर्ज की गई सभी एफआईआर को तुरंत और बिना शर्त रद्द किया जाए। दूसरी मांग है कि किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को पुलिसिया कार्रवाई या नोटिस के जरिए प्रताड़ित न किया जाए। तीसरी मांग यह है कि पुलिस थानों को सख्त हिदायत दी जाए कि वे छात्रों और उनके परिवारों पर अनुचित दबाव न बनाएं। दिपके का कहना है कि यदि प्रशासन ने इन मांगों को अनसुना किया, तो सीजेपी देश के युवाओं को एकजुट कर फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगी।
युवाओं में बढ़ता रोष और आगे की रणनीति
नीट पेपर लीक (Abhijeet Dipke) की घटना और उसके बाद कानूनी दांव-पेच में उलझे युवाओं के बीच असंतोष का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। लाखों अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता के भंवर में फंसे हुए हैं। अभिजीत दिपके के इस ताजा बयान से साफ जाहिर होता है कि सीजेपी सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखेगी। संगठन सोशल मीडिया अभियानों के साथ-साथ राज्य स्तर पर छात्र बैठकों का आयोजन कर रहा है ताकि अगले बड़े शांतिपूर्ण प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा सके।
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