Delhi Amritsar Katra Expressway: थर्मोकोल विवाद पर NHAI की सफाई, वायरल वीडियो के दावे को बताया भ्रामक, जानें पूरा मामला

दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के वायरल वीडियो पर NHAI ने बताया तकनीकी तथ्य

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Delhi Amritsar Katra Expressway: दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया था कि एक्सप्रेसवे के पैरापेट और क्रैश बैरियर के निर्माण में कंक्रीट व सीमेंट जैसी मजबूत निर्माण सामग्री की जगह सस्ते थर्मोकोल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस दावे ने देश की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए आधिकारिक सफाई जारी की है और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को पूरी तरह भ्रामक, आधा-अधूरा और तकनीकी रूप से गलत करार दिया है।

वायरल वीडियो में क्या दिखाया गया और कैसे फैला भ्रम

सोशल मीडिया पर फैले वायरल वीडियो में एक्सप्रेसवे के किनारे बनी कंक्रीट की दीवारों के बीच सफेद रंग की सामग्री लगी हुई दिखाई गई थी। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसे साधारण थर्मोकोल बताते हुए घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और शेयर किया, जिसके बाद इंटरनेट पर बुनियादी ढांचे के मानकों और सरकारी परियोजनाओं को लेकर बहस छिड़ गई। तकनीकी जानकारी के अभाव में कई लोगों ने इस दावे को सच मानकर निर्माण की गुणवत्ता पर चिंता जताई।

एनएचएआई (NHAI) की आधिकारिक सफाई और तकनीकी तथ्य

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचएआई ने तुरंत स्थिति स्पष्ट की। प्राधिकरण ने साफ तौर पर कहा कि वीडियो में दिखाई दे रही सफेद रंग की सामग्री साधारण थर्मोकोल नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार का कंप्रेसिबल फिलर बोर्ड है। इसका उपयोग एक्सप्रेसवे के पैरापेट, क्रैश बैरियर और फ्रिक्शन स्लैब के पास बनाए जाने वाले एक्सपेंशन जॉइंट्स (विस्तार जोड़ों) को भरने के लिए किया जाता है। एनएचएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि यह हिस्सा किसी भी तरह से भार वहन करने वाली मुख्य संरचना का भाग नहीं होता है।

Delhi Amritsar Katra Expressway: एक्सपेंशन जॉइंट क्यों जरूरी हैं और यह कैसे काम करते हैं

इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से लंबे पैरापेट और भारी कंक्रीट संरचनाओं में एक्सपेंशन जॉइंट्स देना अनिवार्य होता है। कंक्रीट और सीमेंट का यह प्राकृतिक गुण होता है कि वे अत्यधिक गर्मी के मौसम में फैलते हैं और सर्दियों में सिकुड़ते हैं। यदि दो बड़े कंक्रीट ब्लॉक्स के बीच इस फैलाव और संकुचन के लिए जगह न छोड़ी जाए, तो संरचना पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे कंक्रीट में दरारें आ सकती हैं और पूरी संरचना समय से पहले क्षतिग्रस्त हो सकती है। इसी समस्या से बचने के लिए एक्सपेंशन जॉइंट्स में लचीली फिलर सामग्री लगाई जाती है जो इस दबाव को सोख लेती है।

इंजीनियरिंग मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन

प्राधिकरण के अनुसार, एक्सप्रेसवे निर्माण में इस सामग्री का प्रयोग भारतीय सड़क कांग्रेस यानी आईआरसी (Indian Roads Congress) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा निर्धारित कड़े मानकों के अनुसार ही किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल तापमान में होने वाले बदलावों के कारण पैदा होने वाले फैलाव और संकुचन के लिए जगह उपलब्ध कराना है। यह पूरी दुनिया में हाईवे और ब्रिज इंजीनियरिंग की स्वीकृत मानक प्रक्रिया है और इससे एक्सप्रेसवे की संरचनात्मक सुरक्षा या मजबूती पर रत्ती भर भी विपरीत असर नहीं पड़ता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने भी इस वायरल वीडियो का खंडन करते हुए कहा कि जिस सामग्री को सोशल मीडिया पर गलती से थर्मोकोल बताया जा रहा है, वह वास्तव में एक्सपेंडेड पॉलीस्टाइरीन (EPS) या कंप्रेसिबल फिलर है। यह हाईवे निर्माण की स्थापित और वैज्ञानिक तकनीक का हिस्सा है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी कंक्रीट फ्लाईओवर या एक्सप्रेसवे के एक्सपेंशन जॉइंट में इस तरह की लचीली सामग्री का प्रयोग वैश्विक स्तर पर किया जाता है। इसे थर्मोकोल समझकर दुष्प्रचार करना केवल तकनीकी अज्ञानता को दर्शाता है।

उत्तर भारत के लिए दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का महत्व

दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे उत्तर भारत की सबसे महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से शुरू होकर पंजाब के प्रमुख शहरों से गुजरते हुए जम्मू-कश्मीर के पवित्र धार्मिक स्थल कटरा तक जाएगा, जिससे माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का समय आधा रह जाएगा। एनएचएआई ने आश्वासन दिया है कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का पालन किया जा रहा है ताकि यह ढांचा दशकों तक सुरक्षित रहे।

Delhi Amritsar Katra Expressway: सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से बचने की अपील

एनएचएआई और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली बिना जांच-परख की सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। अधूरी और भ्रामक जानकारी से समाज में गलत धारणाएं बनती हैं। प्राधिकरण ने आग्रह किया है कि किसी भी परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और जिम्मेदार नागरिक बनकर बिना पुष्टि के ऐसी भ्रामक खबरों को आगे शेयर करने से बचें।

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