10 हजार रुपये के फेल एटीएम ट्रांजैक्शन पर 9 साल की कानूनी लड़ाई, बैंक ऑफ बड़ौदा को चुकाने पड़े 3 लाख से ज्यादा, उपभोक्ता अधिकार की बड़ी जीत बनी सूरत के जतिन पटेल की कहानी
फेल ट्रांजैक्शन पर बैंक को भारी जुर्माना, उपभोक्ता की बड़ी जीत
ATM transaction failure: नौ साल पुराने एक एटीएम ट्रांजैक्शन विवाद ने सूरत के जतिन पटेल को 3 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा दिलाया। 2017 में 10000 रुपये निकालने गए जतिन को एटीएम से कैश नहीं मिला, लेकिन उनके अकाउंट से पैसे कट गए थे। बैंक ऑफ बड़ौदा ने शुरू में उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया था, लेकिन 9 साल बाद उन्होंने बैंक को सबक सिखा दिया।
ATM transaction failure: नौ साल बाद न्याय मिला
20 मार्च 2026 को सूरत के उधना इलाके में रहने वाले जतिन पटेल को 9 साल बाद अपना हक मिला। 18 फरवरी 2017 को जतिन SBI के एटीएम में 10000 रुपये निकालने गए थे। पिन डालने के बाद भी एटीएम से कैश नहीं निकला, लेकिन उनके बैंक ऑफ बड़ौदा के अकाउंट से पूरे 10000 रुपये कट गए।
जब जतिन ने बैंक में शिकायत की, तो बैंक ने लेनदेन सफल होने का दावा करते हुए पैसे देने से मना कर दिया। बैंक के इस रवैये से परेशान होकर जतिन ने सूचना का अधिकार (RTI) का सहारा लिया और एटीएम का सीसीटीवी फुटेज मंगाया। फुटेज में साफ हो गया कि जतिन को कोई कैश नहीं मिला था।
ATM transaction failure: कानूनी लड़ाई की शुरुआत
बैंक के इनकार के बाद जतिन ने सूरत के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (CDRC) में मामला दर्ज कराया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बैंक ने न केवल ग्राहक की अनसुनी की, बल्कि सबूत मिलने के बावजूद पैसे वापस नहीं किए।
उपभोक्ता अदालत ने बैंक को मूल 10000 रुपये के साथ-साथ 9 परसेंट सालाना ब्याज देने का आदेश दिया। चूंकि मामला 9 साल (3288 दिन) पुराना था इसलिए बैंक पर प्रतिदिन के हिसाब से 100 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
ATM transaction failure: बैंक को पड़ा जुर्माना
RBI के नियमों के अनुसार, ट्रांजैक्शन फेल होने पर बैंक को 5 दिनों के भीतर पैसे लौटाने होते हैं। पैसे वापस न करने पर बैंक को प्रतिदिन 100 रुपये जुर्माना भरना पड़ता है। जतिन के मामले में बैंक को 3288*100= 3,28,000 रुपये का जुर्माना देना पड़ा।
इसके अलावा मूल 10000 रुपये पर ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 3000 रुपये और कानूनी खर्च के 2000 रुपये भी देने पड़े। इस तरह बैंक को जतिन को कुल 3 लाख रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ा।
ATM transaction failure: उपभोक्ता अधिकार
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला उपभोक्ता जागरूकता के लिए एक मिसाल है। वरिष्ठ उपभोक्ता अधिवक्ता विजय सिंह कहते हैं, “यह फैसला साबित करता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहे तो न्याय अवश्य मिलता है। बैंक के तकनीकी कारणों से उपभोक्ताओं को परेशान नहीं किया जा सकता।”
बैंक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले के बाद बैंकों को अपनी शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक मजबूत करना होगा।
ATM transaction failure: उपभोक्ताओं के लिए सबक
जतिन की इस कानूनी लड़ाई ने अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी रास्ता दिखाया है। बैंक फेल ट्रांजैक्शन के मामले में उपभोक्ता निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
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ट्रांजैक्शन स्लिप सुरक्षित रखें।
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5 दिनों के भीतर बैंक में लिखित शिकायत करें।
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बैंक के जवाब से संतुष्ट न होने पर उपभोक्ता फोरम जाएं।
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5 दिनों के भीतर समाधान न मिलने पर आरबीआइ के लोकपाल से संपर्क करें।
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कानूनी कार्रवाई के लिए उपभोक्ता अदालत में मामला दर्ज करें।
निष्कर्ष
जतिन पटेल की यह लड़ाई साबित करती है कि धैर्य और दृढ़ निश्चय से न्याय अवश्य मिलता है। बैंक की छोटी सी गलती ने उन्हें 3 लाख रुपये का मुआवजा दिलाया। यह फैसला सभी उपभोक्ताओं के लिए एक सीख है कि वे अपने अधिकारों के प्रति सतर्क रहें।
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