CJP Protest: जंतर मंतर पर देर रात हिंसा के बीच अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, कहा- CJP का आंदोलन शांति और अहिंसा के रास्ते पर ही चलेगा
जंतर मंतर तनाव के बीच CJP संस्थापक का बयान, पुलिस से संयम बरतने की अपील
CJP Protest: नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। बुधवार देर रात प्रदर्शन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में हुई हिंसक घटनाओं और पथराव के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि छात्रों का यह आंदोलन पूरी तरह शांति, संयम और अहिंसा के रास्ते पर ही आगे बढ़ेगा।
प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के आरोपों और पुलिस बल प्रयोग की आशंका के बीच दीपके ने सुरक्षाबलों से अपील की है कि वे निर्दोष और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग न करें। यह बयान ऐसे समय आया है जब 20 जुलाई को निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च और बुधवार को टॉलस्टॉय मार्ग पर हुई हिंसक झड़प के बाद लगातार तीसरे दिन जंतर मंतर पर भारी सुरक्षा घेरा बना हुआ है।
अभिजीत दीपके ने दोहराया शांतिपूर्ण आंदोलन का संकल्प
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि जंतर मंतर पर चल रहा यह आंदोलन केवल अहिंसा और लोकतांत्रिक तरीकों से ही चलाया जाएगा। उन्होंने जंतर मंतर पर तैनात दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों से सीधे संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्दोष युवाओं पर लाठीचार्ज या अनुचित बल प्रयोग न करें।
दीपके ने जोर देकर कहा कि सीजेपी (CJP) और आंदोलन से जुड़े छात्र महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के बताए सिद्धांतों पर चलते हुए अपनी मांगें रखेंगे। उनका कहना था कि कुछ तत्व आंदोलन को उग्र बनाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन संगठन किसी भी हिंसक कृत्य का समर्थन नहीं करता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करेगा।
इंटरनेट सेवा बंद होने का आरोप और सरकार से सवाल
बुधवार देर रात सीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि जंतर मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी गई हैं। अभिजीत दीपके ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इंटरनेट बंद करके सरकार सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकना चाहती है और आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इंटरनेट बंद होने के कारण उन्हें एक-दूसरे से संपर्क साधने और अपनी बात जनता तक पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इंटरनेट निलंबन के आरोपों पर पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च और पुलिस कार्रवाई का असर
इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी के आह्वान पर हजारों छात्रों ने जंतर मंतर से संसद भवन की ओर ‘संसद चलो’ मार्च शुरू किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पुलिस का दावा था कि बैरिकेड्स तोड़ने और हाई-सिक्योरिटी जोन में घुसने की वजह से कार्रवाई करनी पड़ी, जबकि सीजेपी ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया।
उस घटना के बाद से ही जंतर मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक कड़ी कर दी गई है। बुधवार शाम को भी टॉलस्टॉय मार्ग पर पथराव और उपद्रव के बाद हालात बिगड़े, जिसमें कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी चोटिल हुए। इसके बावजूद सीजेपी नेतृत्व का कहना है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और शांतिपूर्ण धरना जारी रखेंगे।
सोनम वांगचुक की अनशन समाप्ति की शर्त
आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे प्रसिद्ध कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्हें स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उन्होंने अस्पताल से एक वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है। वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार यह ठोस आश्वासन देती है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई नया बल प्रयोग नहीं होगा और दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे, तो वे अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
वांगचुक ने बताया कि लंबे अनशन के कारण उनका वजन लगभग 11 किलो तक गिर चुका है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ी हैं। हालांकि, उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और न्याय प्रणाली में पारदर्शिता उनके लिए प्राथमिक शर्त है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और प्रमुख मांगें
जून के तीसरे सप्ताह में शुरू हुए इस आंदोलन की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट-यूजी (NEET-UG) तथा अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में की थी। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: परीक्षा प्रणाली में विफलता की सीधी नैतिक जिम्मेदारी तय की जाए।
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परीक्षा प्रणाली में सुधार: राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सख्त कानून बने।
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पीड़ित परिवारों को मुआवजा: पेपर लीक के तनाव से जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित सहायता मिले।
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मुकदमों की वापसी: प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज प्राथमिकियां (FIR) रद्द की जाएं।
जंतर मंतर पर पुलिस की कड़ी चौकसी
बुधवार की रात हुई घटनाओं के बाद केंद्रीय दिल्ली (CJP Protest) में सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है। जंतर मंतर, कनॉट प्लेस और टॉलस्टॉय मार्ग पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन कानून-व्यवस्था हाथ में लेने या हिंसा फैलाने की किसी भी कोशिश पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अभिजीत दीपके के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सीजेपी अपने रुख पर कायम है और वह अहिंसक तरीके से अपनी मांगें उठाती रहेगी। आने वाले दिन इस पूरे घटनाक्रम और सरकार के रुख को लेकर काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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