Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर प्रदर्शन के तीसरे दिन हिंसा, पुलिस पर पथराव और हमले में दो ACP समेत कई जवान घायल, पेपर लीक विवाद पर संसद से सड़क तक टकराव
पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
Jantar Mantar Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट (NEET) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा विरोध-प्रदर्शन अब उग्र रूप लेता जा रहा है। बुधवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन स्थल पर हिंसा की गंभीर घटना सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने मौके पर तैनात दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर अचानक पत्थरों से हमला बोल दिया और इसके बाद डंडों से जमकर मारपीट की। इस हिंसक हमले में कनॉट प्लेस के एसीपी विवेक भगत और जय प्रकाश सहित दो एसीपी, दो इंस्पेक्टर और कई अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह पूरी घटना टॉलस्टॉय मार्ग के पास घटित हुई।
घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों ने छात्रों के इस आंदोलन को हाईजैक कर लिया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मध्य दिल्ली इलाके में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात कर दिए गए हैं। सीसीटीवी फुटेज की मदद से पथराव और हिंसा करने वालों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर विपक्ष को विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव दिया है, जबकि विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
टॉलस्टॉय मार्ग के पास अचानक पथराव और पुलिस टीम पर सीधी मारपीट
दिल्ली पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जंतर मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रोजाना की तरह आरएएफ और पुलिस की विशेष टीमें तैनात थीं। इसी बीच अचानक भीड़ की ओर से पत्थरों की बारिश शुरू हो गई। जब पुलिस बल ने हिंसा फैला रहे उपद्रवियों को पीछे खदेड़ने का प्रयास किया, तो हाथों में डंडे लिए कुछ लोगों ने सीधे पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पहले बड़े और नुकीले पत्थर फेंके और फिर सीधे तौर पर मारपीट शुरू कर दी।
यह पूरी हिंसक झड़प टॉलस्टॉय मार्ग के पास हुई, जिससे आसपास के इलाकों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घायल पुलिस अधिकारियों और जवानों को तुरंत एम्बुलेंस और पुलिस वाहनों के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घायलों में कनॉट प्लेस के एसीपी विवेक भगत, एसीपी जय प्रकाश और दो वरिष्ठ इंस्पेक्टर शामिल हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि धरने में बाहर से आए उपद्रवी तत्व शामिल हो गए थे, जो आयोजकों के निर्देशों का पालन भी नहीं कर रहे थे।
असामाजिक तत्वों ने आंदोलन को किया हाईजैक: दिल्ली पुलिस का दावा
पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन को शुरू में पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से चलने दिया जा रहा था। हालांकि, बाद में कुछ असामाजिक तत्वों ने साजिश के तहत नुकीले पत्थरों और कांच की बोतलों से पुलिस बलों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने के बाद प्रदर्शनकारियों को एसएमएस और अन्य माध्यमों से एक जगह इकट्ठा होने का संदेश भेजा गया था। फिलहाल पुलिस पथराव करने वाले उपद्रवियों की पहचान में जुटी है और पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
जंतर मंतर और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ और पुलिसकर्मियों पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपद्रव मचाने वाले और हिंसा भड़काने वाले तत्वों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Jantar Mantar Protest: सुरक्षा कारणों से 16 मेट्रो स्टेशन प्रभावित, दिल्ली में कड़ा सुरक्षा घेरा
हिंसा की घटना के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) द्वारा मध्य दिल्ली के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इस दौरान राजीव चौक, पटेल चौक, आईटीओ, दिल्ली गेट, मंडी हाउस, सुप्रीम कोर्ट, खान मार्केट और केंद्रीय सचिवालय सहित करीब 16 महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशन प्रभावित रहे। स्टेशन बंद होने के कारण आम यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और उन्हें वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
पूरी केंद्रीय दिल्ली में चप्पे-चप्पे पर भारी सुरक्षा घेरा तैयार कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों की कई अतिरिक्त कंपनियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे छात्रों की जायज मांगों पर बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखना चाहते हैं, लेकिन आंदोलन की आड़ में हिंसा और उपद्रव करने वाले अराजक तत्वों से पूरी सख्ती के साथ निपटा जाएगा।
सरकार का विपक्ष को खुला ऑफर: ‘संसद में दिन और समय तय करे विपक्ष’
दूसरी तरफ, संसद के भीतर भी इस मुद्दे पर घमासान जारी है। मोदी सरकार ने पेपर लीक विवाद पर विपक्ष को एक बार फिर संसद में विस्तृत चर्चा कराने का खुला प्रस्ताव दिया है। सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि चर्चा किस दिन हो, कितने घंटे चले और उसकी रूपरेखा क्या हो, यह खुद विपक्षी दल तय कर लें। सरकार परीक्षा प्रणाली और सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रही है और विपक्ष द्वारा दिए जाने वाले हर सकारात्मक सुझाव को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में सरकार का पक्ष रखते हुए भरोसा दिलाया कि इस राष्ट्रीय विषय पर पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा होगी। उन्होंने विपक्ष को समय और दिन चुनने का अधिकार देते हुए राहुल गांधी पर भी हमला बोला। नड्डा ने सवाल उठाया कि विपक्ष केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में होने वाले पेपर लीक के मामलों पर चुप्पी क्यों साध लेता है? उन्होंने कहा कि यह करोड़ों छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए इस पर राजनीति करने से बचना चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष और सीजेपी
सरकार के चर्चा वाले प्रस्ताव के बावजूद विपक्षी दल अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पूरा विपक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक इस बड़े घोटाले की सीधी जिम्मेदारी तय नहीं होती और जिम्मेदार मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन जारी रहेगा। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर लगातार हंगामा और नारेबाजी हो रही है।
वहीं, आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी स्पष्ट कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर मंतर पर उनका धरना-प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा। सरकार को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी होगी और व्यवस्था में बुनियादी सुधार करने होंगे।
अस्पताल से सोनम वांगचुक का वीडियो संदेश: अनशन खत्म करने का दिया संकेत
पेपर लीक मामले और छात्रों के समर्थन में कई दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के बिस्तर से जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं। हालांकि, उन्होंने इसके लिए सरकार के समक्ष एक मुख्य शर्त रखी है कि सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग तुरंत बंद करे और दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने का लिखित भरोसा दे।
सोनम वांगचुक लंबे समय से छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन कर रहे थे। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश के युवाओं और छात्रों के साथ हर हाल में न्याय होना चाहिए। पुलिस प्रशासन द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज और मुकदमों का सिलसिला बंद होना चाहिए ताकि बातचीत के जरिए किसी शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तक पहुंचा जा सके।
क्या है पूरे पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि?
इस देशव्यापी आक्रोश की शुरुआत राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में बड़े पैमाने पर पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद हुई थी। बड़े स्तर पर हुए बवाल के बाद परीक्षा में गड़बड़ियों की बात सामने आई, जिससे पूरे देश में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके अलावा, सीबीएसई, सीयूईटी (CUET) और एसएससी (SSC) जैसी अन्य प्रमुख प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में भी समय-समय पर अनियमितताओं और पेपर लीक की शिकायतें सामने आती रही हैं।
परीक्षाओं में लगातार हो रही इन धांधलियों के खिलाफ सीजेपी जैसे संगठनों ने छात्रों और अभिभावकों के गुस्से को एक मंच दिया और जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरने की शुरुआत की। इस आंदोलन को तब और अधिक बल मिला जब सोनम वांगचुक जैसे बड़े सामाजिक चेहरे ने इसमें शामिल होकर अनशन शुरू कर दिया। उनकी मुख्य मांगें परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन, जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हैं।
तनावपूर्ण हालात और आगे की चुनौतियां
फिलहाल जंतर मंतर और आसपास के पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस उपद्रव फैलाने वाले असामाजिक तत्वों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार संसद में वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। हालांकि, विपक्ष, सीजेपी और प्रदर्शनकारी छात्रों के इस्तीफे पर अड़े रहने के कारण गतिरोध बरकरार है। सोनम वांगचुक द्वारा रखी गई शर्तों के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है।
राजधानी दिल्ली में शांति और कानून-व्यवस्था (Jantar Mantar Protest) बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारों का मानना है कि छात्रों की मांगें और उनकी चिंताएं पूरी तरह जायज हैं, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ से किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। ऐसे में दोनों पक्षों को संयम बरतने की सख्त जरूरत है। यदि संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा होती है और सरकार ठोस कदम उठाने का आश्वासन देती है, तभी इस बढ़ते तनाव को कम किया जा सकता है।
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