Child Born In Adhik Maas: अधिक मास में बच्चे का जन्म होना शुभ है या अशुभ? जानिए मलमास में पैदा हुए बच्चों का स्वभाव और भविष्य
Child Born In Adhik Maas: अधिक मास में जन्मे बच्चे शुभ या अशुभ? जानें स्वभाव
Child Born In Adhik Maas: हिंदू कैलेंडर में अधिक मास का एक विशेष स्थान है। जब भी अधिक मास यानी मलमास का समय आता है, तो लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। इस महीने में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है, जिसके कारण अधिकांश लोग इसे एक अशुभ महीना मानने की भूल कर बैठते हैं। इसी धारणा के चलते जब अधिक मास में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो माता-पिता और परिवार के मन में यह चिंता सताने लगती है कि इस महीने में बच्चे का पैदा होना शुभ है या अशुभ।
ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास को लेकर समाज में फैले ये भ्रम पूरी तरह से निराधार हैं। भले ही इस महीने में शादी-ब्याह, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से यह महीना सबसे पवित्र माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अधिक मास में जन्मे बच्चों का स्वभाव कैसा होता है और उनका भविष्य किस तरह का रहता है।
Child Born In Adhik Maas: अधिक मास को क्यों माना जाता है भगवान विष्णु का प्रिय महीना?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अधिक मास को ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है। यह नाम स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इस महीने को दिया था। जब इस महीने को कोई स्वामी नहीं मिला, तब भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) ने इसे अपना नाम दिया और इसे अपना सबसे प्रिय महीना घोषित किया। यही कारण है कि इस महीने को बेहद पावन माना जाता है।
इस दौरान किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल अन्य सामान्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। भगवान विष्णु और श्री कृष्ण का प्रिय महीना होने के कारण, इस अवधि में जन्म लेने वाले बच्चों पर ईश्वरीय कृपा हमेशा बनी रहती है।
Child Born In Adhik Maas: अधिक मास या मलमास में जन्मे बच्चों का स्वभाव कैसा होता है?

धार्मिक और लोक मान्यताओं के आधार पर, अधिक मास में पैदा होने वाले बच्चों के अंदर कई विशेष गुण पाए जाते हैं। इन बच्चों का व्यक्तित्व अन्य बच्चों से काफी अलग और प्रभावशाली होता है।
1. धार्मिक और आध्यात्मिक स्वभाव
चूंकि अधिक मास पूरी तरह से भगवान की भक्ति और धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है, इसलिए इस माहौल का असर इस महीने में जन्मे बच्चों पर भी दिखाई देता है। ऐसे बच्चे बचपन से ही धार्मिक स्वभाव के होते हैं। ईश्वर के प्रति उनकी गहरी आस्था होती है और वे नैतिक मूल्यों का पालन करने वाले बनते हैं।
2. तीव्र बुद्धि और सीखने की क्षमता
मलमास में जन्म लेने वाले बच्चों का दिमाग बहुत तेज होता है। उनकी याददाश्त और समझने की क्षमता बेहतरीन होती है। वे किसी भी नई चीज या हुनर को बहुत जल्दी सीख लेते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे बच्चे हमेशा आगे रहते हैं और अपनी क्लास व स्कूल में अपनी बुद्धिमानी का लोहा मनवाते हैं।
3. शांत और सुलझा हुआ व्यक्तित्व
इन बच्चों का स्वभाव आमतौर पर बहुत गंभीर, शांत और सुलझा हुआ होता है। वे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करते और न ही बेवजह के विवादों या लड़ाइयों में पड़ते हैं। वे हमेशा शांत रहकर अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने और अपने काम से काम रखने में विश्वास करते हैं।
परिवार के लिए भाग्यशाली साबित होते हैं ये बच्चे
अधिक मास में जन्मे बच्चे न केवल अपने लिए बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए बेहद भाग्यशाली माने जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, इन बच्चों के कदम घर में पड़ते ही परिवार के दिन बदलने लगते हैं।
आर्थिक स्थिति में सुधार: ऐसा देखा गया है कि अधिक मास में जन्मे बच्चे के जन्म के बाद से ही उसके माता-पिता और परिवार की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार होने लगता है। घर में दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। इन्हें अपने परिवार के लिए एक ‘लकी चार्म’ के रूप में देखा जाता है।
अपनी तेज बुद्धि, एकाग्रता और कड़ी मेहनत के बल पर ये बच्चे जीवन के हर क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करते हैं। कार्यक्षेत्र में इन्हें खूब मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और पैसा मिलता है। ये समाज में अपने परिवार का नाम रोशन करते हैं।
समाज में बनाते हैं अपनी एक अलग पहचान
इन बच्चों के भीतर दया और करुणा की भावना कूट-कूट कर भरी होती है। दूसरों की मदद करने के लिए ये हमेशा तैयार रहते हैं। परोपकार की भावना के कारण लोग इनसे बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
अपनी नेतृत्व क्षमता और दयालु स्वभाव के कारण ये समाज में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहते हैं। लोग इनकी सलाह का सम्मान करते हैं और इनके बताए रास्ते पर चलना पसंद करते हैं।
अधिक मास को लेकर फैला भ्रम और उसकी सच्चाई
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि जिस महीने में विवाह या अन्य शुभ कार्य वर्जित हैं, वह महीना ही बुरा है। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। मांगलिक कार्यों की मनाही इसलिए होती है क्योंकि यह महीना पूरी तरह से भगवान की साधना और आत्मिक शुद्धि के लिए आरक्षित होता है।
इसलिए, यदि आपके घर में भी अधिक मास या मलमास के दौरान किसी बच्चे ने जन्म लिया है, तो किसी भी प्रकार की दुविधा या असमंजस में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। भगवान पुरुषोत्तम के इस पवित्र महीने में जन्मे बच्चे ईश्वर के विशेष आशीर्वाद के पात्र होते हैं और उनका भविष्य उज्ज्वल होता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हमारा उद्देश्य केवल आप तक सूचना पहुंचाना है, किसी भी बात की पूर्ण सत्यता का दावा हम नहीं करते हैं।
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