ब्रिटेन में मेयर बने रोहतक के मां-बेटे, हिंदी और भारतीय संस्कृति को देंगे बढ़ावा
तुषार दहिया और परवीन रानी ब्रिटेन की अलग-अलग काउंसिल में मेयर, भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प
Britain Mayor News: हरियाणा की माटी के हुनर और जज्बे का डंका अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजनीति में भी बज रहा है। रोहतक के रहने वाले तुषार दहिया और उनकी मां परवीन रानी ने ब्रिटेन के स्थानीय प्रशासनिक ढांचे में एक अनोखा और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। मां और बेटे दोनों ब्रिटेन की अलग-अलग स्थानीय परिषदों में शीर्ष संवैधानिक पद यानी मेयर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस गौरवमयी उपलब्धि को हासिल करने के बाद जब दोनों हाल ही में पहली बार अपने पैतृक निवास रोहतक पहुंचे, तो परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय नागरिकों ने उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की थाप, फूल-मालाओं की बारिश और केक काटकर इस दोहरी खुशी का जश्न मनाया गया। मां-बेटे की इस जोड़ी का कहना है कि ब्रिटेन के नागरिकों की स्थानीय समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ अपनी मातृभाषा हिंदी, समृद्ध भारतीय संस्कृति और पारंपरिक संस्कारों को प्रवासी पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
Britain Mayor News: महज 23 साल की उम्र में तुषार दहिया बने मेयर, युवाओं के लिए बने प्रेरणा
तुषार दहिया का राजनीतिक और सामाजिक सफर समूचे युवा वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने महज 23 वर्ष की अल्पायु में ब्रिटेन की स्थानीय प्रशासनिक राजनीति में यह शीर्ष पद हासिल कर इतिहास रच दिया है। तुषार वर्तमान में एल्स्ट्री और बोरहमवुड टाउन काउंसिल (Elstree and Borehamwood Town Council) के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं उनकी माता परवीन रानी हर्ट्समेयर बरो काउंसिल (Hertsmere Borough Council) की मेयर निर्वाचित हुई हैं। ब्रिटेन के लोकतांत्रिक इतिहास में एक ही समय पर एक ही परिवार के मां-बेटे का दो अलग-अलग परिषदों में मेयर चुना जाना अत्यंत दुर्लभ और सम्मानजनक माना जा रहा है।
तुषार ने बेहद कम उम्र से ही सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। लगभग 16 वर्ष की आयु से ही वे अपने क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों की कठिनाइयों को समझने और स्वैच्छिक सामुदायिक सेवाओं में सक्रिय हो गए थे। इसी जमीनी अनुभव ने उन्हें औपचारिक राजनीति की दिशा दिखाई। 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार स्थानीय पार्षद का चुनाव जीता। इसके बाद वर्ष 2025 में उनके उत्कृष्ट कार्यों और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें उपमेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई और अंततः वे पूर्णकालिक मेयर के पद पर आसीन हुए।
मां परवीन रानी का जमीनी समाजसेवा से मेयर बनने तक का सफर
परवीन रानी का राजनीतिक सफर भी निरंतर जनसेवा और समर्पण की मिसाल है। उनका परिवार वर्ष 2013 में रोहतक से ब्रिटेन स्थानांतरित हुआ था। विदेश में बसने के बाद भी उन्होंने खुद को चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय ब्रिटिश नागरिकों और प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच सामंजस्य बिठाने का कार्य शुरू किया। वर्ष 2023 में वे भारी जनसमर्थन के साथ पहली बार स्थानीय पार्षद चुनी गईं, जिसके बाद उन्हें नगर प्रशासन में विभिन्न विभागों की अहम जिम्मेदारियां दी गईं।
उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रीट सीन, सार्वजनिक पार्कों का सौंदर्यीकरण, मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े महकमों में उल्लेखनीय सुधार किए। जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता और कार्यकुशलता के चलते पहले उन्हें हर्ट्समेयर बरो काउंसिल का उपमेयर बनाया गया और बाद में वे बरो की मेयर चुनी गईं। परवीन रानी का मानना है कि राजनीति में सफलता का कोई गुप्त मार्ग नहीं होता; आम लोगों के बीच उपस्थित रहना, उनकी रोजमर्रा की दिक्कतों को संवेदनशीलता से समझना और स्थानीय समुदाय का अटूट भरोसा जीतना ही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी है।
ब्रिटेन में भारतीय संस्कृति, त्योहारों और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार का संकल्प
तुषार दहिया और परवीन रानी का दृष्टिकोण केवल नियमित प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विदेशों में भारतीय पहचान को नई ऊंचाई देने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। परवीन रानी ने बताया कि ब्रिटेन में पली-बढ़ी प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ी अक्सर अपनी मातृभाषा हिंदी बोलने और समझने में असहज महसूस करती है। इसके परिणामस्वरूप कई बच्चे अपने भारत में रहने वाले दादा-दादी और बुजुर्गों से भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं पाते।
इसी भाषाई और सांस्कृतिक अंतर को पाटने के लिए मां-बेटे ने स्थानीय स्तर पर बच्चों को हिंदी सिखाने की विशेष कक्षाएं और कार्यशालाएं शुरू करने की अनूठी पहल की है। उनका दृढ़ विश्वास है कि भाषा केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, गौरवशाली इतिहास और परिवार को जोड़ने वाला जीवन सेतु है। इतना ही नहीं, उनकी सक्रियता के चलते स्थानीय काउंसिल के औपचारिक कैलेंडर में दीवाली, होली और हिंदी दिवस जैसे भारतीय आयोजनों को आधिकारिक रूप से शामिल कराया गया है, ताकि विदेशी नागरिक भी भारत की समृद्ध और विविधतापूर्ण विरासत से परिचित हो सकें।
स्थानीय जनसमस्याओं का स्थायी समाधान और युवाओं से समाजसेवा का आह्वान
काउंसिल के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में तुषार दहिया की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में जीवनयापन की बढ़ती लागत, आवास संकट और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण शामिल हैं। तुषार का कहना है कि किसी भी संवैधानिक पद की असली गरिमा तब है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। वे लगातार वार्ड स्तर पर नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी शिकायतों का त्वरित निपटारा करने में जुटे हैं।
इसके साथ ही तुषार ब्रिटिश और भारतीय दोनों समाजों के युवाओं से बड़े पैमाने पर सामुदायिक सेवा से जुड़ने की अपील करते हैं। उनका कहना है कि समाज और व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए किसी निश्चित उम्र की सीमा का इंतजार करने की जरूरत नहीं होती। यदि मन में सेवा का सच्चा भाव हो, तो किसी भी पड़ाव पर छोटे-छोटे रचनात्मक कदमों से बड़े सामाजिक बदलाव की नींव रखी जा सकती है।
Britain Mayor News: पैतृक घर रोहतक पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत
ब्रिटेन में शीर्ष पदों पर आसीन होने के उपरांत जब दोनों मां-बेटे अपनी जन्मभूमि रोहतक पहुंचे, तो वहां का माहौल अत्यंत भावुक और उत्सवमय बन गया। गृह प्रवेश के दौरान परिजनों और शहरवासियों ने पूरे रास्ते फूल बरसाए और ढोल बजाकर उनका अभिनंदन किया। परिवार के बुजुर्गों ने दोनों को गले लगाकर आशीर्वाद दिया।
तुषार और परवीन रानी ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने पूर्वजों के संस्कारों और रोहतक की माटी से मिले नैतिक मूल्यों को दिया। उन्होंने कहा कि वे दुनिया के किसी भी कोने में कार्य करें, लेकिन भारत की संस्कृति और अपने गृहनगर के साथ उनका यह भावनात्मक जुड़ाव सदैव अटूट बना रहेगा।
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