Manoj Jarange News: ₹500 करोड़ की कथित ऑडियो क्लिप पर विवाद, मुंबई पुलिस की SIT जांच शुरू
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में लगाए गए ₹500 करोड़ के दावे को लेकर महाराष्ट्र में सियासी विवाद, जरांगे ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
Manoj Jarange News: महाराष्ट्र की सियासत में मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल द्वारा सार्वजनिक की गई कथित 500 करोड़ रुपये की ऑडियो क्लिप को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया है। राजनीतिक रणनीतियों और भारी-भरकम वित्तीय लेनदेन के दावों वाली इस 35 मिनट की रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है। इसी बीच मनोज जरांगे ने पूरे मामले पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए सत्तापक्ष को दो टूक चेतावनी दी है कि वे अपने लोगों को बचाने या राजनीतिक फायदे के लिए मराठा समुदाय और उन्हें ‘बलि का बकरा’ बनाने की कोशिश न करें। उन्होंने दावा किया है कि यह पूरी साजिश मराठा आरक्षण आंदोलन को दबाने और उनकी छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से रची गई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
Manoj Jarange News: कथित ऑडियो क्लिप में क्या है 500 करोड़ रुपये के लेनदेन का पूरा मामला?
इस बड़े राजनीतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब मनोज जरांगे ने बीड जिले में आयोजित पारंपरिक दशहरा रैली के दौरान पहली बार 500 करोड़ रुपये के लेनदेन का जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने जालना जिले के अपने पैतृक गांव अंतरवाली सराटी में एक प्रेस वार्ता बुलाकर कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के कुछ अंश सार्वजनिक कर दिए। उस ऑडियो रिकॉर्डिंग में कुछ अज्ञात व्यक्तियों, जिसमें एक महिला की आवाज भी शामिल है, को यह दावा करते सुना गया कि शिवसेना सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के जरिए मनोज जरांगे को मराठा आरक्षण आंदोलन वापस लेने के लिए 500 करोड़ रुपये पहुंचाए गए थे।
रिकॉर्डिंग में अज्ञात वक्ता यह भी चर्चा करते सुनाई दिए कि 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले मराठवाड़ा क्षेत्र में मनोज जरांगे के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को कैसे बेअसर किया जाए। जरांगे ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल से एक रुपया भी नहीं लिया है। उनका तर्क है कि चूंकि वे किसानों और मराठा समाज के हक की आवाज उठा रहे हैं, इसलिए सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ लोग उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर आंदोलन की विश्वसनीयता पर चोट पहुंचाना चाहते हैं।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बेटे श्रीकांत शिंदे ने आरोपों को सिरे से नकारा
ऑडियो क्लिप में नाम घसीटे जाने के बाद शिवसेना के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उनके सांसद पुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे ने इन दावों को पूरी तरह खारिज और बेबुनियाद करार दिया है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने किसी को कोई धनराशि दी है और न ही इस तरह के किसी लेनदेन से उनका कोई दूर-दूर तक वास्ता है।
सत्तारूढ़ महायुति की ओर से भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के नेताओं ने इस ऑडियो के समय और मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं। कुछ नेताओं ने आशंका जताई कि यह ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अथवा वॉयस क्लोनिंग तकनीक के जरिए तैयार किया गया हो सकता है, जिसका मकसद गठबंधन के भीतर अविश्वास पैदा करना है। इसके विपरीत मनोज जरांगे का कहना है कि 35 मिनट की विस्तृत बातचीत को एआई से तैयार करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है और यह क्लिप पूरी तरह वास्तविक है।
मुंबई पुलिस ने गठित की तीन सदस्यीय एसआईटी, जांच अधिकारी पर भी उठे सवाल
मामले की गंभीरता और राजनीतिक गर्माहट को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर मुंबई पुलिस कमिश्नर ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। तीन सदस्यीय इस एसआईटी का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण क्षेत्र) शैलेश बलकवड़े कर रहे हैं, जबकि पुलिस उपायुक्त विजयकांत सागर और साइबर सेल के डीसीपी बजरंग बनसोडे को इसका सदस्य नियुक्त किया गया है। इस विशेष जांच दल को ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक लैब से प्रामाणिकता जांच कराने, रिकॉर्डिंग में शामिल महिला व पुरुषों की शिनाख्त करने और कथित लेनदेन से जुड़े दावों की तह तक जाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, जांच टीम के गठन के बाद मनोज जरांगे ने एसआईटी प्रमुख की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अधिकारी को सत्तापक्ष के करीबी माना जाता है, इसलिए जांच किसी भी दबाव के बिना पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि ऑडियो में 500 करोड़ रुपये का दावा करने वाली महिला से पूछताछ हो ताकि यह साफ हो सके कि उसके पीछे कौन सी अदृश्य राजनीतिक शक्ति काम कर रही थी।
Manoj Jarange News: मराठा आरक्षण आंदोलन और महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर?
महाराष्ट्र में लंबे समय से कुनबी प्रमाणपत्र और सरकारी नौकरियों व शिक्षा में मराठा समाज को आरक्षण दिलाने के लिए मनोज जरांगे का आंदोलन केंद्र बिंदु बना हुआ है। विधानसभा चुनावों के बाद भी यह मुद्दा राज्य के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने को सीधे प्रभावित कर रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने भी इस पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) से जांच कराने की मांग करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है, जिससे यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
दूसरी ओर, मनोज जरांगे ने साफ कर दिया है कि वे फॉरेंसिक जांच की प्रगति पर लगातार नजर रखेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मामले को दबाने या झूठी रिपोर्ट बनाकर इसे फर्जी साबित करने की कोशिश की गई, तो मराठा समुदाय चुप नहीं बैठेगा। अब पूरी निगाहें मुंबई पुलिस की फॉरेंसिक रिपोर्ट और एसआईटी की प्राथमिक जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद ही इस कथित 500 करोड़ रुपये की ऑडियो क्लिप की तकनीकी और वास्तविक सच्चाई सामने आ सकेगी।
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