NMCH Ragging Case: नालंदा मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर बड़ा एक्शन, MBBS 2025 बैच पर कार्रवाई
पटना के NMCH में कथित रैगिंग के आरोपों के बाद कार्रवाई, जांच और हॉस्टल खाली कराने के आदेश की चर्चा
NMCH Ragging Case: बिहार की राजधानी पटना स्थित प्रतिष्ठित नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) में जूनियर छात्र-छात्राओं के साथ कथित रैगिंग का बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं द्वारा लगाए गए मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के आरोपों के बाद कॉलेज प्रशासन ने कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है। प्रशासन ने एमबीबीएस 2025 बैच के सभी विद्यार्थियों को आगामी तीन महीने के लिए शैक्षणिक कक्षाओं से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही आरोपी बैच के सभी छात्र-छात्राओं को अगले 24 घंटे के भीतर कॉलेज का छात्रावास खाली करने का सख्त फरमान सुनाया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और केंद्रीय एंटी रैगिंग सेल ने भी संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
NMCH Ragging Case: विवाद की जड़ बनी कथित ‘रूलबुक-2026’, सीनियर्स को ‘बॉस’ कहने का था फरमान
इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित की गई ‘रूलबुक-2026’ नामक एक अनधिकृत पीडीएफ दस्तावेज है। प्राप्त शिकायतों के अनुसार, एमबीबीएस के नए बैच में दाखिला लेने वाले नवागंतुक विद्यार्थियों के मोबाइल पर यह दस्तावेज भेजा गया था और इसे कॉलेज के आधिकारिक अनुशासन नियमों की तरह मानने के लिए विवश किया जा रहा था। इस विवादित पीडीएफ दस्तावेज में कॉलेज की प्राचार्या और तीन प्रमुख विभागों के वरिष्ठ शिक्षकों की तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया था, साथ ही 2025 बैच के छात्रों के नाम भी इसमें दर्ज थे।
दस्तावेज में जूनियर्स के लिए कई आपत्तिजनक और मनमाने दिशा-निर्देश तय किए गए थे। इनमें जूनियर छात्रों को निर्देश दिया गया था कि वे अपने सीनियर्स को केवल ‘बॉस’ या ‘मैम’ कहकर ही संबोधित करेंगे और परिसर में सीनियर्स के सामने आने पर सिर झुकाकर एक खास शारीरिक मुद्रा में खड़े रहेंगे। इसके अलावा सीनियर्स की आंखों में सीधे न देखने, किसी भी बात पर उनसे तर्क-वितर्क न करने तथा परिचय देने के लिए एक अपमानजनक तरीका अपनाने का दबाव बनाया जा रहा था। इन अवांछित नियमों से मानसिक रूप से परेशान नवागंतुक छात्रों ने अंततः इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
जूनियर छात्राओं को देर रात छत पर बुलाने का आरोप, सीनियर छात्राओं पर भी गिरी गाज
रैगिंग का यह कथित प्रकरण केवल डिजिटल संदेशों और नियमों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि भौतिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। लिखित शिकायतों में उल्लेख किया गया है कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को देर रात गर्ल्स हॉस्टल की छत पर एकत्रित किया गया, जहां कई घंटों तक उनके साथ रैगिंग की गई। कई जूनियर विद्यार्थियों को रास्ते में रोककर अनाधिकारिक पूछताछ करने, व्यक्तिगत जानकारियां मांगने और भय का माहौल पैदा करने की बातें भी उजागर हुई हैं।
छात्रावास में हुई इस घटना की जांच के दौरान वर्ष 2023 और 2024 बैच की कुछ छात्राओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। मामले में तत्परता दिखाते हुए कॉलेज प्रबंधन ने संलिप्तता के दायरे में आने वाली छात्राओं के विरुद्ध भी त्वरित कार्रवाई की है और उन्हें तत्काल प्रभाव से हॉस्टल का कमरा खाली करने का निर्देश दिया है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, हालांकि जांच प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकता है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और एंटी रैगिंग सेल ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
यह मामला अब केवल कॉलेज की आंतरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया एंटी रैगिंग कमेटी और बिहार राज्य लोक शिकायत निवारण कोषांग के पास जब छात्रों की औपचारिक शिकायतें पहुंचीं, तो वहां से एनएमसीएच प्रशासन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। आयोग ने पूछा है कि यह तथाकथित रूलबुक किस सिस्टम से तैयार हुई, इसके प्रसार में कौन-कौन से छात्र शामिल थे और यह किन माध्यमों से नए विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई।
इसके अतिरिक्त आयोग ने कॉलेज के आंतरिक सुरक्षा तंत्र पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। एनएमसी ने पूछा है कि संस्थान का आधिकारिक एंटी रैगिंग स्क्वाड इस दौरान क्या कर रहा था और कैंपस में नए छात्रों की सुरक्षा के लिए तय दिशा-निर्देशों का पालन क्यों नहीं सुनिश्चित हुआ। आयोग ने पीड़ित छात्रों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने और उन्हें किसी भी प्रकार के दबाव, धमकियों या शैक्षणिक नुकसान से बचाने के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
NMCH Ragging Case: प्राचार्या ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा, निर्दोष छात्रों को राहत की उम्मीद
नालंदा मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या प्रो. डॉ. उषा कुमारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि संस्थान में रैगिंग को लेकर शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति लागू है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की आंतरिक जांच समिति पूरे मामले की बिंदुवार समीक्षा कर रही है और आरोपित बैच के विद्यार्थियों तथा पीड़ित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनका पक्ष सुना जाएगा। निष्पक्ष सुनवाई के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
प्राचार्या ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि केवल सामूहिक आधार पर किसी भी निर्दोष छात्र का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। वास्तविक दोषियों की पहचान कर उन पर कानून सम्मत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल शिक्षण संस्थानों में नवागंतुक विद्यार्थियों का आत्मसम्मान, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित माहौल बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस घटना के बाद कैंपस में सुरक्षा ऑडिट और निगरानी व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा कर दिया गया है।
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