आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED की कार्रवाई, ₹426 करोड़ की संपत्तियां अटैच

रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों पर ED की अस्थायी कुर्की, बाजार मूल्य करीब ₹1,170 करोड़ आंका गया

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Azam Khan News: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के कड़े प्रावधानों के तहत यूनिवर्सिटी परिसर की विस्तृत जमीन और भव्य इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) करने का औपचारिक आदेश जारी किया है। जांच एजेंसी के आधिकारिक मूल्यांकन के अनुसार, कुर्क की गई इन अचल संपत्तियों की खाता लागत (बुक वैल्यू) 426.46 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि वर्तमान समय में इनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह बड़ी कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति आजम खान और उनके करीबी सहयोगियों के खिलाफ चल रही व्यापक वित्तीय जांच के आधार पर की गई है।

Azam Khan News: निर्माण व्यय और घोषित पूंजीगत लागत में मिला 426 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई वित्तीय जांच में जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के भौतिक निर्माण पर हुए वास्तविक खर्च और ट्रस्ट द्वारा आयकर विभाग के समक्ष घोषित पूंजीगत व्यय के बीच भारी विसंगति उजागर हुई है। जिला मूल्यांकन अधिकारी की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, परिसर में निर्मित 59 शैक्षणिक व प्रशासनिक इमारतों की कुल निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसके साथ ही 114 पंजीकृत बैनामों के जरिए खरीदी गई जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये दर्ज था, जिससे जमीन और इमारतों की कुल आकलित लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है। इसके विपरीत, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक आयकर विवरण (ITR) में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दर्शाया था।

जांच एजेंसी ने जब ट्रस्ट के खातों, उपलब्ध वैध स्रोतों और मिले चंदे का गहन फोरेंसिक ऑडिट किया, तो पता चला कि ट्रस्ट द्वारा दिखाए गए 12.29 करोड़ रुपये के दान फर्जी और गैर-वास्तविक थे। सभी कानूनी व मान्य स्रोतों को मिलाकर केवल 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का ही संतोषजनक और पारदर्शी हिसाब ट्रस्ट के पदाधिकारी दे सके। शेष बची 426.46 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि के किसी भी वैध स्रोत की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसे ईडी ने आपराधिक गतिविधियों से अर्जित अवैध धन (Proceeds of Crime) करार दिया है और इसी आधार पर संपत्तियों को कुर्क किया गया है।

किसानों की कृषि भूमि और शत्रु संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे की पड़ताल

जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जमीन के कथित जबरन और अवैध अधिग्रहण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। रामपुर जिले के अजीमनगर पुलिस थाने में स्थानीय किसानों द्वारा दर्ज कराई गई 26 अलग-अलग प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का दायरा बढ़ाया था। इन प्राथमिकियों में आरोप लगाया गया था कि सत्ता और राजनीतिक रसूख के दम पर यूनिवर्सिटी परिसर के विस्तार के लिए निर्धन किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पर बलपूर्वक कब्जा किया गया था।

इसके अतिरिक्त, रामपुर जिला प्रशासन की जांच में सिंहनखेड़ा गांव में स्थित शत्रु संपत्ति (Enemy Property) के लगभग 34 एकड़ में फैले 45 भूखंडों पर भी अवैध कब्जे की बात सामने आई थी। नियमों के विपरीत इस जमीन का पट्टा ट्रस्ट को दिया गया था, जिसे बाद में अनियमितताएं पाए जाने पर शासन द्वारा निरस्त कर दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस सरकारी जमीन को अपने संरक्षण में वापस ले लिया है, जिससे जुड़े दस्तावेजों की जांच भी इस कुर्की आदेश का प्रमुख हिस्सा बनी है।

सरकारी ठेकों की रकम की हेराफेरी और कैंपस में सार्वजनिक धन का इस्तेमाल

ईडी की जांच में यह अत्यंत गंभीर तथ्य भी रेखांकित हुआ है कि राज्य में सत्ता में रहते हुए सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धन और निर्माण सामग्री को कथित रूप से निजी यूनिवर्सिटी परिसर के विकास में खपाया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) से लगभग 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके हासिल करने वाली एक निर्माण कंपनी के प्रबंध निदेशक ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि ठेका राशि का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा जौहर यूनिवर्सिटी के लिए सामग्री खरीदने में लगाया गया था। इसके साथ ही एक अन्य ठेकेदार फर्म द्वारा ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा दिए जाने का तथ्य भी सामने आया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, उस दौर में जब आजम खान नगर विकास मंत्री और उत्तर प्रदेश जल निगम के पदेन अध्यक्ष थे, तब विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (विधायक-एमएलसी निधि) से करीब 6.60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए निजी यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर कराए गए थे। इतना ही नहीं, राज्य सरकार के खजाने से यूनिवर्सिटी परिसर में एक विशाल पंडाल, ओबीसी बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए गए थे। वर्ष 2015 में पंडाल के लिए 12.16 करोड़ रुपये जारी करते समय यह शर्त रखी गई थी कि इसका स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहेगा और राज्य सरकार इसका निःशुल्क उपयोग कर सकेगी, लेकिन वर्ष 2016 में कैबिनेट के प्रभाव का इस्तेमाल कर शर्तों को बदलते हुए पंडाल का पूर्ण मालिकाना हक सीधे जौहर यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित कर दिया गया था।

Azam Khan News: तलाशी अभियान और कानूनी प्रक्रिया के तहत भावी कदम

इस संपूर्ण प्रकरण में साक्ष्य जुटाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय की विशेष टीमों ने 19 अगस्त 2026 को जौहर यूनिवर्सिटी, ट्रस्ट के कार्यालयों और संबंधित पदाधिकारियों के विभिन्न ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान संचालित किया था। उस दौरान जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, वित्तीय बही-खातों और निर्माण अनुबंधों की विस्तृत जांच के बाद ही 426.46 करोड़ रुपये के अवैध धन के अंतरण का यह निष्कर्ष निकाला गया। जांच के ताजा नतीजों को उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ भी साझा किया गया है, जिसके आधार पर अजीमनगर थाने में 13 अक्टूबर 2026 को एक नई प्राथमिकी भी पंजीकृत कराई गई है।

वर्तमान में संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत ‘प्रोविजनल अटैचमेंट’ यानी अस्थायी कुर्की के रूप में की गई है। नियमानुसार इस कुर्की आदेश को अब नई दिल्ली स्थित पीएमएलए निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) के समक्ष पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाएगा, जहां ट्रस्ट और आजम खान के कानूनी प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने का वैधानिक अवसर मिलेगा। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने एक बार फिर रामपुर के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है और निजी शैक्षणिक संस्थानों में सरकारी मशीनरी व धन के कथित दुरुपयोग को लेकर नए कानूनी विमर्श को जन्म दे दिया है।

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