Bihar Smart Meter: बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने की बदली रणनीति, अब गांवों और BPL घरों के बजाय बाजारों पर फोकस

बिहार में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्राथमिकताएं बदलने की खबर है। अब शहरी बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

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Bihar Smart Meter: बिहार में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने के महत्वाकांक्षी अभियान को लेकर राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने अपनी कार्ययोजना और प्राथमिकताओं में व्यापक फेरबदल किया है। अब बिजली विभाग का मुख्य ध्यान उन इलाकों और उपभोक्ता श्रेणियों पर केंद्रित हो गया है, जहां बिजली की खपत अधिक है और बिलों के माध्यम से ठोस राजस्व संग्रह की संभावना मजबूत है। इस नई नीति के तहत ग्रामीण अंचलों और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले परिवारों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने की गति धीमी की जा सकती है। इसके विपरीत, शहरी बाजारों, शॉपिंग परिसरों, औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। वितरण कंपनियों की इस रणनीतिक तब्दीली के पीछे वित्तीय व्यवहार्यता के साथ-साथ राज्य में लागू 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के जमीनी असर को सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है।

Bihar Smart Meter: राजस्व संग्रह और वित्तीय संतुलन साधने के लिए बदली नीति

शुरुआती दौर में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी और उसकी वितरण कंपनियों (नॉर्थ और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन) ने पूरे राज्य में एक समान गति से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक मीटरों को हटाकर प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य तय किया था। इस वृहद अभियान का मूल उद्देश्य बिजली चोरी रोकना, लाइन लॉस कम करना और शत-प्रतिशत बिलिंग सुनिश्चित करना था। हालांकि, जमीनी समीक्षा के दौरान कंपनियों ने पाया कि ग्रामीण इलाकों के एक बड़े हिस्से में स्मार्ट मीटर लगाने के बावजूद कंपनी की परिचालन लागत के अनुपात में अपेक्षित राजस्व की प्राप्ति नहीं हो पा रही है।

बिजली अधिकारियों के आंतरिक विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों ऐसे वैध बिजली कनेक्शन हैं जहां केवल नाममात्र की खपत दर्ज होती है। ऐसे कई परिवारों के कामकाजी सदस्य रोजी-रोटी के सिलसिले में शहरों या अन्य राज्यों में निवास करते हैं और उनके पैतृक घरों में ताला लटका रहता है। वे केवल छठ, दीवाली या वैवाहिक आयोजनों के दौरान ही कुछ दिनों के लिए गांव लौटते हैं। ऐसे बंद या अर्ध-उपयोग वाले परिसरों में महंगे स्मार्ट मीटर और संबंधित संचार उपकरण लगाने से कंपनियों की पूंजीगत लागत तो बढ़ रही है, किंतु मासिक राजस्व प्रवाह लगभग शून्य बना हुआ है।

125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का वितरण रणनीति पर सीधा प्रभाव

राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लागू की गई 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की व्यवस्था ने भी बिजली कंपनियों को अपनी प्राथमिकताओं की पुनर्समीक्षा करने पर विवश किया है। ग्रामीण परिवेश में रहने वाले अधिकांश मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मासिक विद्युत खपत आमतौर पर इस निर्धारित मुफ्त सीमा के भीतर ही सिमट जाती है। ऐसे घरों में बिजली का उपयोग मूल रूप से कुछ एलईडी बल्बों, सीलिंग फैन और मोबाइल चार्जिंग तक ही सीमित रहता है।

परिणामस्वरूप, इन उपभोक्ताओं के बिल 125 यूनिट के दायरे में रहने के कारण सरकारी सब्सिडी तंत्र के तहत समायोजित हो जाते हैं और वितरण कंपनियों को उपभोक्ता के स्तर से अतिरिक्त प्रत्यक्ष नकदी प्रवाह नहीं मिल पाता। कई क्षेत्रों में यह भी देखा गया कि पूरे माह के दौरान मीटर का उपयोग बहुत कम रहा। ऐसे में सीमित संख्या में उपलब्ध स्मार्ट मीटरों और इंस्टॉलेशन टीमों को कम खपत वाले ग्रामीण घरों में लगाने के बजाय उन क्षेत्रों में तैनात करना अधिक व्यावहारिक समझा गया जहां मीटरिंग से तत्काल बिलिंग और राजस्व प्राप्ति संभव हो सके।

90 लाख बीपीएल परिवारों के घरों में धीमी होगी मीटरिंग की रफ्तार

वितरण कंपनियों की बदली हुई रणनीति का सीधा असर राज्य के लगभग 90 लाख बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ना तय माना जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों में बिजली की खपत काफी सीमित होती है और अधिकांश परिवारों की मासिक खपत 100 से 125 यूनिट के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाती।

इस स्थिति को देखते हुए कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि बीपीएल और अत्यंत निम्न खपत वाले ग्रामीण घरों में तत्काल स्मार्ट मीटर लगाने का दबाव अब नहीं रहेगा। हालांकि, इसका यह तात्पर्य बिल्कुल नहीं है कि इन परिवारों को बिजली आपूर्ति में कोई बाधा आएगी या उनके कनेक्शन काटे जाएंगे। वे अपनी पूर्ववत व्यवस्था के अनुसार सामान्य मीटर या निर्धारित नियमों के तहत निर्बाध बिजली का उपभोग करते रहेंगे, किंतु नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रशासनिक प्राथमिकता अब इस वर्ग से हट गई है।

वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, बाजारों और हाई-वैल्यू उपभोक्ताओं पर पैनी नजर

नई नीति के तहत विद्युत वितरण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संसाधनों का रुख बाजारों, थोक मंडियों, व्यावसायिक परिसरों, मॉल, निजी दफ्तरों और नए आवासीय अपार्टमेंट्स की ओर मोड़ें। इन क्षेत्रों में दिन-रात एयर कंडीशनर, भारी मशीनरी, लाइटिंग और व्यावसायिक उपकरणों का संचालन होता है, जिसके चलते बिजली की खपत काफी ऊंची रहती है।

इसके साथ ही शहरी और कस्बाई इलाकों में खुलने वाले नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को केवल स्मार्ट मीटर के साथ ही नया विद्युत कनेक्शन प्रदान करने की नीति पर सख्ती से अमल किया जा रहा है। मीटरिंग एजेंसियों को दैनिक लक्ष्य भी इसी आधार पर दिए जा रहे हैं ताकि बिजली की आपूर्ति और वास्तविक राजस्व के बीच के अंतर को पाटा जा सके और वितरण कंपनियों की आर्थिक सेहत में सुधार लाया जा सके।

Bihar Smart Meter: उपभोक्ताओं पर इस रणनीतिक बदलाव का क्या पड़ेगा असर?

बिजली कंपनियों द्वारा अपनाई गई इस व्यावहारिक रणनीति से आम उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। जिन शहरी और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर पहले लगेंगे, उन्हें ऐप के माध्यम से दैनिक खपत की निगरानी, ऑनलाइन रीचार्ज और बैलेंस अलर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। वहीं ग्रामीण और कम खपत वाले उपभोक्ताओं को किसी नई मीटरिंग प्रक्रिया के लिए हड़बड़ी करने की आवश्यकता नहीं होगी।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं को किसी भी अफवाह या अनाधिकृत सूचना पर विश्वास करने के बजाय केवल बिजली वितरण कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर ही ध्यान देना चाहिए। राज्य में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बनाए रखने के साथ-साथ राजस्व बढ़ाने का यह नया मॉडल आने वाले समय में बिजली सुधारों को किस दिशा में ले जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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