Aaj Ka Mausam 21 August 2026: मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-NCR, यूपी, उत्तराखंड और हिमाचल में भी बरसेंगे बादल
मध्य प्रदेश, यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश, दिल्ली-NCR में भी अलर्ट
Aaj Ka Mausam 21 August 2026: देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता पूरी तरह से बनी हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र (Well-Marked Low Pressure Area) बना हुआ है। इस मौसमी प्रणाली के असर से देश के कई राज्यों में मानसूनी हवाएं तेज गति से सक्रिय हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप मध्य भारत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी राज्यों में व्यापक स्तर पर वर्षा दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए नागरिकों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मानसून की इस नई सक्रियता से एक तरफ जहां कृषि कार्यों को संजीवनी मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और मैदानी इलाकों में जलभराव की गंभीर आशंका उत्पन्न हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसूनी ट्रफ लाइन और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक बारिश की यह तीव्रता कई क्षेत्रों में बनी रहेगी। प्रशासन द्वारा संवेदनशील और निचले इलाकों में आपदा प्रबंधन दलों को पहले से ही तैनात कर दिया गया है।
Aaj Ka Mausam 21 August 2026: मध्य भारत में भारी बारिश की चेतावनी, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अलर्ट
मध्य भारत इस समय सक्रिय मौसमी प्रणालियों के केंद्र में स्थित है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 21 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके अतिरिक्त पश्चिमी मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से में भी गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। बादलों की तेज गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए मध्य प्रदेश के कई संभागों में अलर्ट लागू किया गया है।
पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में भी मानसून का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा होने का अनुमान है। विदर्भ के क्षेत्रों में भी बादलों की मौजूदगी के साथ मध्यम दर्जे की वर्षा होगी। लगातार हो रही बारिश के कारण नर्मदा, बेतवा और चंबल जैसी प्रमुख नदियों और उनकी सहायक धाराओं के जलस्तर में तेज वृद्धि की संभावना जताई गई है, जिससे तटीय बस्तियों में जलभराव का संकट खड़ा हो सकता है।
उत्तर भारत और पहाड़ी राज्यों का हाल: उत्तराखंड और हिमाचल में सतर्कता
उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की तेज गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अधिकांश स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। विशेष रूप से उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में भारी बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय इलाकों में भी नदियों के जलस्तर में उछाल आ सकता है, जिसके चलते प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को नदी तटों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं।
मैदानी इलाकों की बात करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में 21 अगस्त को भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश का दौर जारी रहेगा।
दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में बादलों का डेरा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में आसमान में सामान्यतः घने बादल छाए रहेंगे। दिन के समय रुक-रुक कर हल्की से मध्यम वर्षा होने की पूरी संभावना है। बारिश और लगातार चलने वाली हवाओं के चलते दिल्ली-एनसीआर में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा कम 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है।
पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) का स्तर ऊंचा बना रहेगा, जिसके कारण बारिश के अंतराल में उमस का अहसास हो सकता है। मौसम विभाग ने आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में न जाने की चेतावनी दी है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां
पूर्वी भारत में भी मानसूनी तंत्र पूरी तरह गतिशील बना हुआ है। ओडिशा में 21 अगस्त को काफी स्थानों पर अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में व्यापक रूप से बारिश दर्ज की जाएगी, जबकि बिहार और झारखंड के कुछ हिस्सों में बादलों की गरज के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी तेज हवाओं के साथ बारिश की सक्रियता बनी रहेगी।
पूर्वोत्तर के राज्यों जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में घने बादलों के साथ भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तटीय और नदी किनारे स्थित इलाकों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिससे मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने का परामर्श जारी किया गया है।
पश्चिमी और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत का मौसम
पश्चिमी भारत के तटीय क्षेत्र यानी कोंकण और गोवा में व्यापक मानसूनी बारिश का दौर चलेगा। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बौछारें गिर सकती हैं। राजस्थान के मौसम में भिन्नता देखने को मिलेगी; जहां पश्चिमी राजस्थान में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा, वहीं पूर्वी राजस्थान के कुछ सीमावर्ती इलाकों में हल्की बारिश दर्ज हो सकती है।
दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में तेज मानसूनी हवाओं का प्रभाव देखा जाएगा। तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से तेज वर्षा होने का अनुमान है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आंतरिक हिस्सों में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहेंगे। तटीय क्षेत्रों में हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसके मद्देनजर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
Aaj Ka Mausam 21 August 2026: तापमान का रुझान और नागरिकों व किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
देश के अधिकांश मैदानी राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा कम बना रहेगा, जिससे भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, हवा में नमी की अधिकता के कारण उमस की स्थिति रह सकती है। पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी।
मौसम विज्ञान विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने किसानों को खेतों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जल निकासी के उचित प्रबंध करने की सलाह दी है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले मार्गों पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें, पुराने व जर्जर ढांचों से दूर रहें और भारी बारिश के समय पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें। पहाड़ी राज्यों की यात्रा करने वाले पर्यटक मौसम की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के बाद ही अपनी यात्रा प्रारंभ करें।
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