Delhi Traffic Rules: दक्षिणी दिल्ली के दो चौराहों पर हर घंटे 34 हजार से अधिक उल्लंघन

गोविंदपुरी और कोटला मुबारकपुर में रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट और रॉन्ग साइड ड्राइविंग के मामले सामने आए

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Delhi Traffic Rules: देश की राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और आक्रामक ड्राइविंग सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बनती जा रही है। दक्षिणी दिल्ली के दो प्रमुख और व्यस्त जंक्शनों—कोटला मुबारकपुर और गोविंदपुरी चौक—पर किए गए एक ताजा वैज्ञानिक अध्ययन ने शहर के ट्रैफिक अनुशासन की चिंताजनक तस्वीर पेश की है। इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों चौराहों पर मिलाकर हर एक घंटे में 34,700 से अधिक ट्रैफिक उल्लंघनों की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं। इनमें रेड लाइट जंप करने से लेकर बिना हेलमेट दोपहिया चलाने, लेन अनुशासन तोड़ने और खुलेआम रॉन्ग साइड (उल्टी दिशा) में गाड़ी दौड़ाने जैसे जानलेवा कृत्य शामिल हैं।

गोविंदपुरी और कोटला मुबारकपुर: हर घंटे हजारों उल्लंघनों का खौफनाक गणित

आईआरटीई (IRTE) द्वारा दोनों चौराहों पर हाई-डेफिनिशन कैमरों और ट्रैफिक सेंसर्स के जरिए किए गए अध्ययन के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। गोविंदपुरी चौक से प्रति घंटे लगभग 26,000 वाहन गुजरते हैं, जहां एक ही घंटे के भीतर औसतन 16,791 नियमों के उल्लंघन दर्ज किए गए। वहीं दूसरी ओर, कोटला मुबारकपुर चौराहे से प्रति घंटे करीब 24,000 वाहनों की आवाजाही होती है और यहां हर घंटे 17,931 बार ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
दोनों जंक्शनों को मिलाकर यह आंकड़ा प्रति घंटे 34,722 उल्लंघनों तक पहुंच जाता है। हालांकि ये आंकड़े पूरी दिल्ली की समग्र तस्वीर का प्रतिनिधित्व नहीं करते और केवल इन दो व्यस्ततम चौराहों के अध्ययन पर आधारित हैं, फिर भी यह साबित करते हैं कि राजधानी के व्यस्त जंक्शनों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी या कैमरों के डर के बावजूद वाहन चालक किस हद तक नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

रेड लाइट जंप और बिना हेलमेट ड्राइविंग: सबसे जानलेवा प्रवृत्तियां

अध्ययन में उल्लंघनों को विभिन्न श्रेणियों में बांटकर विश्लेषित किया गया, जिसमें सबसे अधिक मामले रेड लाइट जंप करने और बिना हेलमेट गाड़ी चलाने के पाए गए। कोटला मुबारकपुर जंक्शन पर प्रति घंटे 4,808 वाहन चालकों ने सीधे तौर पर लाल बत्ती पार की, जबकि गोविंदपुरी में यह संख्या 1,731 रही। लाल बत्ती की अनदेखी सीधे तौर पर गंभीर और जानलेवा दुर्घटनाओं (टी-बोन कोलिजन) का सबसे बड़ा कारण बनती है।
इसके साथ ही, दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट न लगाने की खतरनाक आदत भी बड़े पैमाने पर दर्ज की गई। गोविंदपुरी चौक पर प्रति घंटे करीब 3,725 और कोटला मुबारकपुर में 3,068 चालकों या पीछे बैठे सवारियों को बिना हेलमेट पाया गया। लेन अनुशासन की बात करें तो कोटला मुबारकपुर में 1,840 और गोविंदपुरी में 1,632 चालकों ने बिना किसी इंडिकेटर के अचानक लेन बदलकर या गलत लेन में घुसकर पीछे आ रहे ट्रैफिक के लिए गंभीर बाधा उत्पन्न की।

रॉन्ग साइड ड्राइविंग और खतरनाक यू-टर्न: पैदल यात्रियों पर भारी संकट

सड़क पर सबसे बड़ा तात्कालिक खतरा पैदा करने वाली उल्टी दिशा में ड्राइविंग (रॉन्ग साइड ड्राइविंग) के मामले भी भारी संख्या में सामने आए। कोटला मुबारकपुर चौराहे पर महज एक घंटे के भीतर 782 वाहन चालकों को उल्टी दिशा में वाहन चलाते हुए पकड़ा गया।
गोविंदपुरी चौक पर भी संकरी जगहों से अवैध यू-टर्न लेने और ट्रैफिक सिग्नल के पास वाहनों की गति को नियंत्रित न करने जैसी लापरवाहियां आम पाई गईं। ऐसी हरकतें न केवल दूसरे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पर मजबूर करती हैं, बल्कि सड़क पार कर रहे पैदल यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों की जान को सीधे जोखिम में डालती हैं।

खराब रोड इंजीनियरिंग और सिग्नलिंग व्यवस्था भी उतनी ही जिम्मेदार

आईआरटीई की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि इन भारी उल्लंघनों के लिए केवल वाहन चालकों की लापरवाही ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि सड़कों का खराब बुनियादी ढांचा और दोषपूर्ण ट्रैफिक इंजीनियरिंग भी भ्रम की स्थिति पैदा करती है।
अध्ययन में पाया गया कि इन चौराहों पर स्पष्ट और दिखाई देने वाले दिशा-सूचक बोर्ड नदारद हैं, लेन मार्किंग्स पूरी तरह मिट चुकी हैं और जेब्रा क्रॉसिंग इतनी धुंधली हो चुकी हैं कि चालकों को स्टॉप लाइन का अंदाजा ही नहीं लगता। इसके अलावा, कई जगहों पर ट्रैफिक सिग्नलों की लाइट टाइमिंग वास्तविक ट्रैफिक दबाव से मेल नहीं खाती और ‘गिव-वे’ (रास्ता दें) जैसे जरूरी रोड साइन गायब हैं। ढांचागत खामियों के चलते चालक असमंजस में पड़कर अनजाने में भी नियमों का उल्लंघन कर बैठते हैं।

Delhi Traffic Rules: हादसे से पहले जोखिम की पहचान और स्मार्ट मैनेजमेंट की जरूरत

संस्था ने जोर देकर कहा है कि सड़क सुरक्षा को केवल दर्ज होने वाली दुर्घटनाओं या मौतों की संख्या के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। इसके बजाय दुर्घटना के पूर्ववर्ती संकेतों—जैसे अचानक लेन बदलना, तय दूरी बनाए बिना सटकर चलना, और गलत ओवरटेकिंग—को समय रहते पहचानना जरूरी है।
दिल्ली में लागू किए जा रहे इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के तहत एआई-सक्षम कैमरों और डायनेमिक सिग्नल टाइमिंग को इन चौराहों पर तत्काल लागू करने की आवश्यकता है। केवल चालान काटने से नियमों का स्थायी पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सकता; इसके लिए सड़क डिजाइन में सुधार, सटीक मार्किंग, चौराहों की री-इंजीनियरिंग और चालकों के भीतर नागरिक जिम्मेदारी का बोध विकसित करना बेहद अनिवार्य है।

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