Delhi Metro News: CJP प्रदर्शन के बीच दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन बंद, सुप्रीम कोर्ट मेट्रो बंद होने पर CJI ने दी चेतावनी
जंतर मंतर प्रदर्शन के बीच मेट्रो सेवाएं प्रभावित, सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में वकीलों को परेशानी
Delhi Metro News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अभ्यर्थियों के जारी विरोध-प्रदर्शन के चलते राजधानी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मध्य दिल्ली के 16 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है।
इन बंद स्टेशनों में ‘सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन’ भी शामिल है, जिससे वकीलों, मुवक्किलों और अदालत के कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि लंच तक प्रशासन ने इसका कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला, तो वे खुद इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप करेंगे।
मध्य दिल्ली के 16 स्टेशन बंद, यात्री हुए बेहाल
सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो ने लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
सुबह के समय पीक आवर्स के दौरान दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों को राजीव चौक और मंडी हाउस जैसे स्टेशनों के बाहर भटकते देखा गया। कई यात्रियों को कई किलोमीटर दूर उतरकर पैदल, ऑटो या बस का सहारा लेना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो बंद होने पर CJI की सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन बंद होने की वजह से न्यायिक कार्य प्रभावित होने की बात सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाई। उन्होंने बताया कि वैध एंट्री पास और प्रॉक्सिमिटी कार्ड होने के बावजूद वकील और स्टाफ समय पर अदालत परिसर नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सुबह ही मेट्रो अधिकारियों से बात की थी। CJI ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अधिकारियों को लंच तक का समय दिया गया है ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके; अगर तब तक हल नहीं निकला तो उन्हें खुद प्रशासनिक या न्यायिक रूप से दखल देना पड़ेगा। साथ ही, पीठ ने स्पष्ट किया कि वकीलों की अनुपस्थिति के कारण किसी भी मामले में कोई विपरीत (Adverse) आदेश पारित न किया जाए।
बार एसोसिएशन का समाधान: ‘पास धारकों को मिले एंट्री’
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने प्रशासन के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा। विकास सिंह ने सुझाव दिया कि जिन अधिवक्ताओं और स्टाफ के पास सुप्रीम कोर्ट का ‘प्रॉक्सिमिटी कार्ड’ और वैध ‘एंट्री पास’ है, उन्हें प्रॉपर सिक्योरिटी चेकिंग के बाद सुप्रीम कोर्ट स्टेशन से बाहर निकलने (Exit) की अनुमति दी जानी चाहिए। एक अलग एग्जिट गेट बनाकर जांच की जा सकती है, ताकि सुरक्षा भी बनी रहे और अदालत का कामकाज भी सुचारू रूप से चलता रहे।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक चिंताएं
जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन NEET-UG पेपर लीक विवाद, राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा है। लगातार बढ़ते जनसमर्थन और हाल ही में हुई झड़पों को देखते हुए पुलिस प्रशासन मध्य दिल्ली में किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए सतर्कता बरत रहा है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि भीड़ को नियंत्रित करने और संसद व सुरक्षा क्षेत्रों की घेराबंदी रोकने के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा है।
आगे की राह और संतुलन की जरूरत
आम जनता की आवाजाही और सुप्रीम कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। प्रदर्शनकारियों के विरोध के अधिकार और नागरिकों के आवागमन के अधिकार के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब सभी की निगाहें दोपहर के समय पर टिकी हैं कि क्या मेट्रो प्रशासन वकीलों और आम यात्रियों के लिए कोई सुरक्षित मार्ग तैयार करता है या मुख्य न्यायाधीश को इस पर सख्त रुख अपनाना पड़ता है।
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