Saturday Puja: शनिवार को करें शनिदेव और हनुमान जी की पूजा, जानिए शनि दोष निवारण के सरल उपाय

शनिदेव और हनुमान जी की पूजा से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से राहत पाएं

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Saturday Puja: सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में शनिवार का दिन विशेष रूप से न्याय और कर्मफल दाता शनिदेव तथा संकटमोचन हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या प्रतिकूल महादशा के दुष्प्रभावों को शांत करने और जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति व सुरक्षा पाने के लिए इस दिन दोनों देवताओं की संयुक्त पूजा का विधान है।

Saturday Puja: शनिवार को शनिदेव और हनुमान जी की पूजा का धार्मिक रहस्य

धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब लंकापति रावण ने नवग्रहों को बंदी बना रखा था, तब हनुमान जी ने शनिदेव को उसके बंधन से मुक्त कराया था।

इस उपकार से प्रसन्न होकर शनिदेव ने वरदान दिया था कि जो भी जातक अनन्य भाव से संकटमोचन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करेगा, उसे शनि की किसी भी पीड़ा या कुदृष्टि का भय नहीं रहेगा। इसी कारण शनिवार के दिन हनुमान जी और शनिदेव की साथ में उपासना करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है।

पूजा की तैयारी और आवश्यक पूजन सामग्री

शनिवार की पूजा के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शनिदेव की पूजा के लिए काले तिल, शुद्ध सरसों का तेल, नीले या गहरे रंग के पुष्प, उड़द की दाल और काले वस्त्र की व्यवस्था करें।

हनुमान जी की पूजा के लिए सिंदूर, चमेली का तेल, लाल पुष्प, गुड़, भुने हुए चने, तुलसी पत्र और हनुमान चालीसा की पुस्तक तैयार रखें।

शनिदेव और हनुमान जी की प्रामाणिक पूजा विधि

शनिवार के दिन दोनों देवों की पूजा अलग-अलग समय और नियमों के साथ की जाती है। हनुमान जी की उपासना प्रातःकाल और सायंकाल दोनों समय की जा सकती है, जबकि शनिदेव की पूजा सूर्यास्त के उपरांत प्रदोष काल में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

हनुमान जी की पूजा में पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें, प्रतिमा पर चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं और लाल पुष्प अर्पित करें। इसके बाद “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जप करते हुए हनुमान चालीसा, बजरंग बाण अथवा सुंदरकांड का पाठ करें तथा गुड़-चने का भोग लगाएं।

शनिदेव की पूजा सायंकाल के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करें। सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक प्रज्वलित करें और शनि शिला या प्रतिमा पर तेल अर्पित करें। पूजा के दौरान शनिदेव की आंखों में सीधे देखने से बचें और उनके चरणों का दर्शन करते हुए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” बीज मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप करें।

शनिवार के पारंपरिक उपाय और महादान का महत्व

शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए शनिवार के दिन कुछ विशेष पारंपरिक उपाय किए जाते हैं। सायंकाल के समय पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित कर वहां सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इसके साथ ही काले कुत्ते, कौवे या असहाय पशु-पक्षियों को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शनिवार को जरूरतमंद, दिव्यांग और असहाय व्यक्तियों को काले तिल, सरसों का तेल, साबुत उड़द, काले जूते, छाता और कंबल का दान करने से साढ़ेसाती के कष्ट दूर होते हैं।

Saturday Puja: शनिवार के दिन किन बातों का रखें विशेष ध्यान

शनिवार के दिन सात्विक आचरण बनाए रखना आवश्यक है। इस दिन तामसिक भोजन, मदिरापान और कटु वचनों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। किसी भी कमजोर, असहाय या मजदूर वर्ग के व्यक्ति का अपमान न करें।

सच्चे मन, भक्ति भाव और सदाचार के साथ की गई पूजा से शनिदेव प्रसन्न होकर जीवन में अनुशासन, धैर्य, आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

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