Royal Enfield Bullet Trials 350 सिर्फ एक साल में क्यों हुई बंद? जानिए इस अनोखी बाइक के फ्लॉप होने की पूरी वजह

कम बिक्री, सिंगल सीट और BS6 नियमों के चलते Royal Enfield ने बंद किया मॉडल

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Royal Enfield Bullet Trials 350: भारतीय टू-व्हीलर ऑटोमोबाइल बाजार में जब भी रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) का नाम आता है, तो दिमाग में भारी-भरकम आवाज, मजबूत बनावट और लंबी दूरी की आरामदायक सवारी की छवि उभरती है। कंपनी ने अपने इतिहास में कई सफल मोटरसाइकिलें पेश की हैं, लेकिन वर्ष 2019 में लॉन्च हुई ‘बुलेट ट्रायल्स 350’ (Bullet Trials 350) का सफर काफी अजीब और संक्षिप्त रहा। अपने अनूठे स्क्रैम्बलर लुक और रफ-एंड-टफ डिजाइन के कारण अचानक चर्चा में आई यह बाइक ज्यादा दिनों तक शोरूम्स में नहीं टिक सकी। महज एक साल के भीतर ही, यानी मार्च 2020 में रॉयल एनफील्ड ने इस मॉडल का उत्पादन और बिक्री पूरी तरह से बंद कर दिया।

रॉयल एनफील्ड जैसे विशाल और स्थापित ब्रांड द्वारा अपनी ही एक नई बाइक को इतनी जल्दी मार्केट से वापस लेने के फैसले ने सभी को हैरान कर दिया था। ऑटोमोबाइल जानकारों और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस बाइक के फ्लॉप होने और बंद होने के पीछे कई प्रमुख कारण थे, जिनमें ग्राहकों के बीच फैली गलतफहमी, बेहद कमजोर बिक्री, भारत में बीएस6 (BS6) उत्सर्जन मानकों का लागू होना और कंपनी की नई ‘जे-सीरीज’ (J-Series) प्लेटफॉर्म रणनीति शामिल थी।

Royal Enfield Bullet Trials 350: बुलेट ट्रायल्स 350 की एंट्री और इसके पीछे का ऐतिहासिक मकसद

वर्ष 2019 के शुरुआती महीनों में जब रॉयल एनफील्ड ने बुलेट ट्रायल्स 350 को भारतीय बाजार में उतारा, तो इसके पीछे कंपनी का एक खास ऐतिहासिक उद्देश्य था। रॉयल एनफील्ड ने इस बाइक को 1950 के दशक की अपनी प्रतिष्ठित ट्रायल्स बाइक्स की सफलता से प्रेरित होकर तैयार किया था। गौरतलब है कि उस दौर में रॉयल एनफील्ड की मोटरसाइकिलों ने इंटरनेशनल ऑफ-रोड रेसिंग और ऊबड़-खाबड़ रास्तों वाली प्रतियोगिताओं में अपना लोहा मनवाया था।

कंपनी का विचार था कि पुरानी रेसिंग विरासत और क्लासिक अंदाज को आधुनिक रंग-रूप में वापस लाकर युवाओं के सामने पेश किया जाए। हीरो और अन्य ब्रांड्स के बीच रॉयल एनफील्ड एक ऐसी लाइफस्टाइल बाइक देना चाहती थी जो नियमित सड़कों पर चलते समय भी सामान्य बुलेट और क्लासिक 350 से बिल्कुल अलग और आकर्षक नजर आए। यह बाइक उन सवारों को लक्षित करके बनाई गई थी जो रोजाना के आवागमन के साथ-साथ थोड़ा एडवेंचरस फील भी चाहते थे।

इंजन, पावर आउटपुट और सस्पेंशन का परफॉर्मेंस

अगर परफॉर्मेंस और मैकेनिकल स्पेसिफिकेशन्स की बात करें, तो बुलेट ट्रायल्स 350 में कंपनी का पुराना और परखा हुआ 346 सीसी का सिंगल-सिलेंडर, एयर-कूल्ड यूसीई (UCE) इंजन इस्तेमाल किया गया था। यही इंजन उस समय बिक्री के लिए उपलब्ध स्टैंडर्ड बुलेट 350 और क्लासिक 350 में भी आता था। यह इंजन 5,250 आरपीएम पर 19.8 बीएचपी की अधिकतम पावर और 4,000 आरपीएम पर 28 न्यूटन मीटर का पिक टॉर्क जनरेट करता था।

बाइक में 5-स्पीड गियरबॉक्स दिया गया था। इसका लो-एंड टॉर्क काफी शानदार था, जिसकी वजह से शहर के भारी ट्रैफिक और ग्रामीण इलाकों के कच्चे-पक्के रास्तों पर इसे चलाना काफी आसान और मजेदार अनुभव देता था। हालांकि, ऑफ-रोड लुक होने के बावजूद तकनीकी रूप से इसकी सस्पेंशन कैपेसिटी और क्षमताएं सीमित ही थीं।

ग्राहकों में फैली बड़ी गलतफहमी और व्यावहारिक सीमाएं

बुलेट ट्रायल्स 350 की असफलता का एक सबसे बड़ा कारण इसके लुक और वास्तविक क्षमता के बीच का भारी अंतर था, जिसने ग्राहकों के मन में एक बड़ी गलतफहमी पैदा कर दी। बाइक के नाम में ‘ट्रायल्स’ लिखा होना, उठा हुआ साइलेंसर और स्क्रैम्बलर जैसा डिजाइन देखकर ज्यादातर लोगों ने इसे एक प्रॉपर और हार्डकोर ऑफ-रोड एडवेंचर बाइक समझ लिया।

जबकि हकीकत यह थी कि इसका सस्पेंशन ट्रैवल, ग्राउंड क्लीयरेंस और चेसिस फ्रेम बिल्कुल सामान्य क्लासिक 350 वाला ही था। यानी यह केवल देखने में ऑफ-रोडर लगती थी, लेकिन असल में यह केवल एक लाइफस्टाइल सिटी बाइक थी। ऐसे में जिन ग्राहकों ने इसे ऑफ-रोडिंग की उम्मीद से खरीदा, उन्हें निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर, जो सामान्य ग्राहक इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए खरीदना चाहते थे, उन्हें पीछे सीट न होना (सिंगल सीट) और व्यावहारिक उपयोगिता की कमी काफी खली। भारतीय परिवार केंद्रित बाजार में पिलियन सीट न होना बिक्री के लिहाज से बड़ा नुकसान साबित हुआ।

उत्सर्जन मानक बीएस6 और कंपनी का नया जे-सीरीज प्लेटफॉर्म

मार्च 2020 में ट्रायल्स 350 को बंद करने के पीछे केवल कम बिक्री ही एकमात्र वजह नहीं थी, बल्कि भारत सरकार के नीतिगत बदलाव भी शामिल थे। अप्रैल 2020 से देश भर में कड़े बीएस6 (BS6) उत्सर्जन मानक लागू होने वाले थे। इसके चलते ऑटो कंपनियों को अपने पुराने इंजनों को अपडेट करना था या उन्हें पूरी तरह बंद करना था।

रॉयल एनफील्ड उस समय अपने पुराने यूसीई (UCE) इंजन प्लेटफॉर्म को रिटायर करके नए, ज्यादा रिफाइंड और आधुनिक ‘जे-सीरीज’ (J-Series 350cc) इंजन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो रही थी। ट्रायल्स 350 को बीएस6 में अपग्रेड करने के लिए कंपनी को इंजन में आरएंडडी (R&D) और फ्यूल-इंजेक्शन सिस्टम जोड़ने में काफी अतिरिक्त पूंजी लगानी पड़ती। चुंकी इस मॉडल की बिक्री पहले से ही बहुत गिर चुकी थी, इसलिए कंपनी ने घाटे के सौदे को आगे बढ़ाने के बजाय इस मॉडल को हमेशा के लिए बंद करने का व्यावसायिक फैसला लिया।

रॉयल एनफील्ड की रणनीतिक सीख और बाजार का रुख

ट्रायल्स 350 का यह छोटा सा सफर पूरे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक बड़ा सबक साबित हुआ। इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि केवल खूबसूरत दिखने वाला अलग डिजाइन और पुराना नाम किसी वाहन को हिट कराने के लिए काफी नहीं होता। ग्राहकों की व्यावहारिक जरूरतों और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना सबसे ज्यादा जरूरी है। केवल ऑफ-रोड लुक देकर वास्तविक क्षमता न देना ब्रांड की छवि पर भी असर डालता है।

हालांकि, रॉयल एनफील्ड ने इस असफलता से तुरंत सीख ली। कंपनी ने बाद में एडवेंचर और स्क्रैम्बलर सेगमेंट को सही तरीके से कवर करने के लिए ‘हिमालयन’ (Himalayan 411/450) और ‘स्कैम 411’ (Scram 411) जैसे समर्पित और वास्तविक क्षमताओं वाले मॉडल्स बाजार में उतारे, जिन्हें ग्राहकों ने हाथों-हाथ लिया।

आज कलेक्टर्स आइटम और दुर्लभ बाइक बन चुकी है ट्रायल्स 350

भले ही बुलेट ट्रायल्स 350 का व्यावसायिक उत्पादन बंद हो गया हो, लेकिन आज सेकंड-हैंड कार और बाइक मार्केट में इस बाइक की अपनी एक अलग पहचान बन चुकी है। बहुत ही कम समय तक बिकने और सीमित संख्या में निर्मित होने के कारण अब यह बाइक ऑटो उत्साही लोगों के बीच एक ‘कलेक्टर्स आइटम’ (Collector’s Item) मानी जाती है।

पुरानी और दुर्लभ रॉयल एनफील्ड बाइक्स के शौकीन लोग आज भी बुलेट ट्रायल्स 350 को ढूंढकर अपने गैरेज में शामिल करना पसंद करते हैं। इसके लाल और हरे रंग के चमकीले फ्रेम और सिंगल-सीट रैक का अनोखा कॉम्बिनेशन आज भी सड़कों पर जब निकलता है, तो लोगों का ध्यान खींच लेता है।

Royal Enfield Bullet Trials 350: निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो, 2019 में लॉन्च हुई रॉयल एनफील्ड बुलेट ट्रायल्स 350 कंपनी का एक अनूठा और साहसिक प्रयोग थी जो बाजार की व्यावहारिक उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी। कमजोर बिक्री, सिंगल-सीट की अव्यावहारिक बनावट, ग्राहकों की गलतफहमी और अप्रैल 2020 में आए बीएस6 उत्सर्जन नियमों ने इस बाइक के सफर पर ब्रेक लगा दिया। आज भले ही यह मॉडल शोरूम्स में मौजूद न हो, लेकिन रॉयल एनफील्ड के स्वर्णिम इतिहास में यह एक याद रखने योग्य और प्रयोगधर्मी अध्याय के रूप में दर्ज है।

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