RG Kar case: आरजी कर मामले में पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष गिरफ्तार, पुरी के होटल से पकड़े गए, अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर आरोप

पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष पुरी के होटल से गिरफ्तार, अंतिम संस्कार में भूमिका के आरोप

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RG Kar case: पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित ऐतिहासिक आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में दो वर्ष पहले हुई डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की दर्दनाक घटना से जुड़े एक नए अध्याय में गुरुवार को बड़ा विकास सामने आया। पानीहाटी से पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक निर्मल घोष को पुलिस ने ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी ताकि महत्वपूर्ण फॉरेंसिक सबूतों को नष्ट किया जा सके। पुलिस के अनुसार, घोष ओडिशा के पुरी स्थित एक होटल में छिपे हुए थे और पहचान छिपाने के लिए नए सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे। बैरकपुर पुलिस कमीशनरेट की खड़दा थाने की टीम ने मोबाइल टॉवर लोकेशन की मदद से उन्हें वहां से हिरासत में लिया।

यह गिरफ्तारी आरजी कर कांड की दूसरी बरसी के आसपास हुई है। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने 9 अगस्त को आयोजित एक विशेष स्मरण कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से पुलिस को निर्देश दिए थे कि पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार से जुड़े गंभीर सवालों पर नया मामला दर्ज कर अलग से सघन जांच की जाए। परिवार के सदस्यों के लिखित हस्ताक्षर न होने, श्मशान घाट के अंतिम संस्कार शुल्क को रातों-रात माफ किए जाने और शव को कतार में खड़े अन्य दो शवों से पहले प्राथमिकता दिए जाने जैसे ज्वलंत मुद्दे लंबे समय से जनता और न्यायपालिका के सामने खड़े थे।

RG Kar case: आरजी कर घटना और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

9 अगस्त 2024 की रात आरजी कर अस्पताल के सेमिनार रूम में 31 वर्षीय महिला ऑन-ड्यूटी ट्रेनी डॉक्टर का शव अत्यंत गंभीर अवस्था में मिला था। प्रारंभिक और विस्तृत फॉरेंसिक जांच में यह पूरी तरह साबित हुआ कि उनके साथ वीभत्स बलात्कार के बाद हत्या की गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना ने न केवल पूरे पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया था। डॉक्टर समुदाय ने महीनों तक विरोध प्रदर्शन किए और कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग की। मामले की मुख्य जांच तुरंत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी, जो मुख्य आपराधिक साजिश और हत्या की जांच कर रही है।

मुख्य जांच से अलग, पीड़िता के परिवार ने बार-बार यह संगीन आरोप लगाया कि घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रभावशाली लोगों और पुलिस प्रशासन ने मिलकर शव का अंतिम संस्कार असामान्य और संदिग्ध जल्दबाजी में कर दिया। पानीहाटी श्मशान घाट में जब शव पहुंचाया गया, तो कतार में पहले से इंतजार कर रहे दो अन्य परिवारों के शवों को पीछे धकेल कर उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पीड़िता के परिजनों का कहना है कि उन्हें कानूनी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने का अवसर तक नहीं दिया गया। श्मशान शुल्क को विशेष आदेश पारित कर माफ कर दिया गया, जो सामान्य नगर निगम नियमों के पूरी तरह विपरीत है। परिजनों का आरोप है कि इस पूरी जल्दबाजी का मुख्य उद्देश्य दूसरे स्वतंत्र पोस्टमॉर्टम की गुंजाइश को हमेशा के लिए खत्म करना और मुख्य अपराधियों को बचाना था।

पीड़िता के पिता द्वारा खड़दा थाने में दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर बैरकपुर पुलिस कमीशनरेट ने एक नई और स्वतंत्र एफआईआर (FIR) दर्ज की। इस एफआईआर में पूर्व विधायक निर्मल घोष के अलावा पानीहाटी नगरपालिका के पार्षद सोमनाथ डे और परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को भी मुख्य नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने और किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध दबाव बनाकर कार्य कराने जैसे भारतीय न्याय संहिता के कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

मुख्यमंत्री के कड़े रुख और पुलिस कार्रवाई में तेजी

आरजी कर कांड की दूसरी बरसी के अवसर पर पानीहाटी में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार किया कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में गंभीर प्रशासनिक गड़बड़ियां और कानूनी अनियमितताएं हुई हैं। मुख्यमंत्री ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के बैरकपुर पुलिस आयुक्त को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि निर्मल घोष, सोमनाथ डे और संजीव मुखर्जी की संदिग्ध भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।

मुख्यमंत्री के सीधे निर्देशों के बाद हरकत में आई पुलिस टीम ने जब घोष के ठिकानों पर दबिश दी, तो वे फरार पाए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होते ही घोष राज्य की सीमा पार कर ओडिशा के पुरी चले गए और वहां एक दूरस्थ होटल में ठहर गए। वे लगातार अपने मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदल रहे थे तथा केवल कुछ चुनिंदा सहायकों के ही संपर्क में थे। बैरकपुर पुलिस की विशेष साइबर और सर्विलांस विंग ने मोबाइल टावर लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर उनके गुप्त ठिकाने का सटीक पता लगाया और पुरी पुलिस के सहयोग से उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

परिवार की न्याय के लिए लंबी लड़ाई और राजनीतिक प्रभाव

इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक पहलू भी है। पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ, जो अब पानीहाटी क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक हैं, ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। उन्होंने इससे पहले भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निर्मल घोष और उनके सहयोगियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी। परिवार का स्पष्ट आरोप है कि घटना वाले दिन पूर्व अस्पताल प्रधानाचार्य संदीप घोष और निर्मल घोष के बीच लगातार फोन पर बातचीत हो रही थी, जो इस बात का प्रमाण है कि पूरे प्रशासनिक ढांचे का उपयोग मामले को दबाने के लिए किया गया।

पूर्व विधायक निर्मल घोष तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के कारण स्थानीय स्तर पर भारी राजनीतिक रसूख रखते थे। परिवार का कहना है कि दो साल तक राज्य पुलिस ने इस साक्ष्य मिटाने वाले पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज किया, लेकिन मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद ही कानून ने अपना काम करना शुरू किया। बैरकपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नया मामला पूरी तरह से पीड़िता के परिजनों की शिकायत और सामने आए प्रशासनिक फॉरेंसिक तथ्यों पर आधारित है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया, पुलिस रिमांड और भावी खुलासे

गिरफ्तारी के बाद पुलिस निर्मल घोष को ट्रांजिट रिमांड पर सड़क मार्ग से वापस कोलकाता ला रही है, जहां उन्हें विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। पुलिस अदालत से आरोपी की कस्टडी की मांग करेगी ताकि उनसे यह उगलवाया जा सके कि अंतिम संस्कार जल्दी कराने के निर्देश उन्हें ऊपर से किस अधिकारी या राजनेता से मिले थे।

इसके साथ ही, मामले के अन्य दो नामजद आरोपियों—पार्षद सोमनाथ डे और संजीव मुखर्जी—की संभावित गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस की कई टीमें अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दूसरी ओर, सीबीआई भी अपनी मुख्य जांच के तहत इस नए घटनाक्रम और पुलिस द्वारा एकत्र किए जाने वाले नए बयानों पर पैनी नजर बनाए हुए है।

RG Kar case: निष्कर्ष

आरजी कर अस्पताल कांड ने देश भर के चिकित्सा क्षेत्र, अदालतों और आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया था। दो वर्ष बाद पूर्व विधायक निर्मल घोष की यह गिरफ्तारी यह साबित करती है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो, न्याय की प्रक्रिया से कोई भी लंबे समय तक बच नहीं सकता। पीड़िता का परिवार और देश की जनता अब यह उम्मीद कर रही है कि इस नई जांच के माध्यम से उस रात की पूरी सच्चाई, प्रशासनिक कोताही और सबूत मिटाने की आपराधिक साजिश का पर्दाफाश होगा।

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