Psychology Tips: समय के साथ आपका रिश्ता खोलता है आपके स्वभाव के गहरे राज, जानिए क्यों कुछ लोग हमेशा होते हैं लेट

Psychology Tips: हमेशा लेट होने की आदत खोलती है आपके स्वभाव के गहरे राज, जानें मनोविज्ञान

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Psychology Tips: क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आपके किसी जानने वाले की घड़ी की टिक-टिक के साथ कैसी ट्यूनिंग है? कोई इंसान मीटिंग शुरू होने से पांच मिनट पहले ही बेचैन हो उठता है, तो वहीं दूसरा शख्स हर जगह तय वक्त के काफी बाद आराम से पहुंचता है। घड़ी की सुइयों के साथ इंसान का यह बर्ताव सिर्फ उसकी आदत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उसके व्यक्तित्व के कई अनछुए पहलुओं और मनोवैज्ञानिक आदतों को भी उजागर करता है। समय को देखने और मापने का सबका अपना अलग नजरिया होता है, जो सीधे तौर पर इंसानी फितरत से जुड़ा है।

Psychology Tips: “अभी तो बहुत वक्त है” सोचने वालों का अंदाज

कुछ लोगों का मिजाज ऐसा होता है जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि उनके लिए समय की कोई पाबंदी ही नहीं है। इस श्रेणी के लोग किसी भी पार्टी या महत्वपूर्ण आयोजन के लिए निकलने का प्लान तभी बनाते हैं जब घड़ी की सुइयां लगभग सिर पर आ चुकी होती हैं। उन्हें कभी भी काम का कोई खास दबाव महसूस नहीं होता। उनके मन में हमेशा यही बात चलती रहती है कि अभी तो बहुत वक्त पड़ा है, सब संभल जाएगा। हालांकि हकीकत में ऐसा होता नहीं है, लेकिन समय को लेकर उनकी यह अत्यधिक सकारात्मक सोच उन्हें हर बार अंतिम पलों में भागदौड़ करने के लिए मजबूर कर देती है। वे इस बात को लेकर आश्वस्त रहते हैं कि थोड़ी बहुत जल्दबाजी दिखाने से काम बन ही जाएगा।

वक्त से पहले पहुंचने की बेचैनी और एंग्जाइटी

इसके ठीक विपरीत एक ऐसा वर्ग भी समाज में मौजूद है जो किसी भी काम या तयशुदा मीटिंग के नाम पर बहुत पहले से ही मानसिक तनाव में आ जाता है। उन्हें हमेशा इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं उनसे कोई देरी न हो जाए और इसी एंग्जाइटी से बचने के लिए वे नियत समय से बहुत ज्यादा पहले ही अपनी मंजिल पर पहुंच जाते हैं। जब तक उनका वह काम पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता या वे सुरक्षित अपनी जगह पर नहीं पहुंच जाते, तब तक उनके भीतर की यह बेचैनी शांत नहीं होती। इस तरह के स्वभाव वाले लोगों के लिए समय की पाबंदी एक कड़ा नियम होती है, जिसके टूटने का डर उन्हें चैन से नहीं बैठने देता।

अंतिम पलों में चमत्कार करने का आत्मविश्वास

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो हर काम को एकदम आखिरी वक्त पर पूरा करने की कला में माहिर माने जाते हैं। इन्हें आप बहुत अधिक तनाव में नहीं देख पाएंगे, क्योंकि समय पर अपने प्रोजेक्ट या काम को पूरा कर लेने का इनका पुराना अनुभव इनके भीतर गजब का आत्मविश्वास भर देता है। यदि किसी वजह से इन्हें पांच या दस मिनट की देरी हो भी जाती है, तो ये उसे कोई बड़ी बात नहीं मानते और न ही इसे अपनी किसी गलती के रूप में देखते हैं। काम के दबाव के बीच भी शांत रहकर आखिरी पलों में बाजी पलट देना इनकी फितरत का एक अहम हिस्सा बन चुका होता है।

वक्त का हिसाब न रख पाने वाले लोग

कई बार कुछ लोगों के सामने टाइम मैनेजमेंट यानी समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। ये लोग अपना काम नियत समय पर शुरू तो कर देते हैं, लेकिन काम में इस कदर खो जाते हैं कि उन्हें समय के बीतने का अहसास ही नहीं रहता। घड़ी पर उनकी नजरें टिक नहीं पातीं और अंततः वे तय डेडलाइन तक अपना काम पूरा करने में नाकाम साबित होते हैं। ऐसे स्वभाव वाले लोगों के लिए बिना किसी रिमाइंडर या अलार्म के अपने पूरे दिन का शेड्यूल चला पाना लगभग असंभव सा हो जाता है, क्योंकि वे समय के ट्रैक को लगातार खोते रहते हैं।

Psychology Tips: समय के साथ बर्ताव में अंतर आने के पीछे की वजहें

इंसान का वक्त के प्रति यह रवैया यूं ही नहीं बनता, बल्कि इसके पीछे कई तरह के वैज्ञानिक और व्यक्तिगत कारण छिपे होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके मूल में मुख्य रूप से हमारी अलग-अलग पर्सनैलिटी, न्यूरोबायोलॉजिकल कारण और हमारी उम्र का बड़ा असर होता है। हर व्यक्ति का मस्तिष्क समय को अलग तरीके से महसूस करता है, जिसके कारण किसी के लिए पांच मिनट का मतलब बहुत लंबा होता है तो किसी के लिए वह चुटकियों में बीत जाता है।

Psychology Tips: अपनी इस टाइम पर्सनैलिटी को समझकर ऐसे सुधारें आदतें

यदि आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो अक्सर समय प्रबंधन के मोर्चे पर पिछड़ जाते हैं, तो अपनी कार्यशैली में कुछ छोटे बदलाव लाकर स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

  • अगर आप वक्त पर अपने काम पूरे नहीं कर पाते हैं, तो विभिन्न प्रकार के आधुनिक टाइम मैनेजमेंट ऐप की मदद ले सकते हैं।
  • किसी भी बड़े और महत्वपूर्ण काम को अंतिम समय पर टालने के बजाय उसे तय सीमा से थोड़ा पहले ही शुरू कर देना समझदारी होती है।
  • यदि आपको समय पर काम पूरा न होने का तनाव सताता है, तो अपने रात के सोने और उठने के शेड्यूल को काफी सख्त बनाना चाहिए।
  • इस बात का गहराई से विश्लेषण करें कि आखिर किन वजहों से आपको अक्सर देरी हो जाती है और उन कारणों को दूर करने का प्रयास करें।
  • अपने पूरे हफ्ते के रूटीन में कम से कम एक दिन ऐसा भी जरूर रखें जिस पर कोई समय सारणी या पाबंदी न हो, इससे बाकी के दिनों में आपका दिमाग ज्यादा सुकून के साथ काम कर पाएगा।

वक्त के साथ इंसान का यह रिश्ता ही उसकी असली कार्यशैली को परिभाषित करता है। अपनी इन आदतों को पहचानकर यदि थोड़ा सा संतुलन साध लिया जाए, तो रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी को काफी हद तक आसान बनाया जा सकता है।

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